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Dehradun News: 18 बीघा भूमि हड़पने के आरोप में दो बिल्डारों पर प्राथमिकी

Fri, 11 Sep 2026 07:26 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 11 Sep 2026 07:26 PM IST
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FIR against two builders for allegedly grabbing 18 bighas of land
देहरादून। राजपुर थाना क्षेत्र में तरला नागल निवासी नूर हसन की करीब 18 बीघा पैतृक कृषि भूमि को फर्जी दस्तावेज तैयार कर हड़प लिया गया। इसके लिए दो बिल्डरों प्रदीप नागरथ और केके सोइन ने मृत व्यक्ति की पावर ऑफ अटॉर्नी (मुख्तारनामे) का इस्तेमाल किया और अपनी कंपनी के नाम करा ली। हाईकोर्ट के आदेश पर दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
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नूर हसन ने आरोप लगाया कि उनकी पैतृक भूमि राजस्व अभिलेखों में उनके पूर्वजों के नाम दर्ज थी। भूमि के एक सहखातेदार करीमुद्दीन ने वर्ष 1990 में केके सोइन के पक्ष में जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी दिया था, जबकि करीमुद्दीन की मृत्यु वर्ष 1996 में हो चुकी थी। आरोप है कि इसी मुख्तारनामे के आधार पर दून वैली कॉलोनाइजर एंड बिल्डर प्रालि के साथ एक एमओयू किया गया और बाद में मध्यस्थता की कार्रवाई शुरू की गई। वर्ष 2002 में मध्यस्थता संबंधी वाद दायर किया गया और वर्ष 2003 में पंचाट के जरिये कंपनी के पक्ष में विक्रय पत्र कराने का आदेश प्राप्त किया गया। इसके करीब 12 वर्ष बाद वर्ष 2015 में एक वाद दाखिल कर भूमि का रजिस्ट्री कंपनी के नाम कराई गई। बाद में इसका पंजीकरण भी कर दिया गया। शिकायतकर्ता की शिकायत पर सीओ मसूरी ने वर्ष 2024 में प्रारंभिक जांच की थी।
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जांच में मामले की सच्चाई जानने के लिए प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना की आवश्यकता बताई गई थी, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। इसके बाद नूर हसन ने स्थानीय अदालत और फिर उत्तराखंड हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट ने गत तीन सितंबर के आदेश में मृत व्यक्ति के मुख्तारनामे के आधार पर हुए एमओयू और पुलिस की ओर से एफआईआर दर्ज न किए जाने पर सवाल उठाए। इसके बाद अब नागरथ और केके सोइन के खिलाफ राजपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। एसओ राजपुर पीडी भट्ट ने बताया कि सभी नए और पुराने तथ्यों को शामिल कर मामले की जांच की जा रही है। पहले संस्तुति के बाद एफआईआर क्यों नहीं हुई इन तथ्यों को भी शामिल किया जाएगा।
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