उरई (जालौन)। काशी पीठाधीश्वर स्वामी डा. रामकमल दास वेदांती ने कहा कि देश के महामंडलेश्वरों और संत समाज को संतों के लिए एक आचार संहिता बननी चाहिए क्योंकि ऋषि वह है जो अपनी आभा और ज्ञान से समाज और देश का भला करता है जबकि संत वह है जो समाज के लिए अपना सब कुछ उसी तरह अर्पित करे। जैसे नदी पहाड़ और वृक्ष जो अपना सब कुछ समाज के लिए अर्पित कर देते है। यह बात मंगलवार को मोहल्ला बघौरा में स्थित रघुनाथेश्वर मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पूर्व पत्रकारों से वार्ता के दौरान व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि जो संत आचरण से शून्य हो जाते हैं तथा भौतिक सुखों के लिए अंधी दौड़ लगाते हैं उन कथित संतों को जेल जाना पड़ता है। संत डॉ वेदांती ने कहा की हमारे धर्म शास्त्रों में जो वैज्ञानिक बातें बताई गई है तो मनुष्य यदि उन पर अमल करें तो उसका जीवन सुखी हो सकता है और देश और समाज का भी भला हो सकता है नासा के वैज्ञानिकों ने अपने शोध से यह साबित किया है सूर्य की किरणों से ओम की आभा उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा भगवान श्री कृष्ण ने पर्यावरण का बहुत ही ध्यान दिया इसीलिए उन्होंने पंचतत्व की वैज्ञानिकता को जन जन को समझाया। एक सवाल के जवाब में डॉ वेदांती ने कहा कि राम भक्तों ने राम जन्म भूमि को बचाने और वहां भव्य मंदिर बनाने के लिए 500 बर्ष तक संघर्ष किया और कई रामभक्तों ने कुर्बानिया दी। अब अयोध्या में भगवान राम के जन्मस्थल पर भव्य राम मंदिर बनेगा। इस दौरान श्रीमद्भागवत कथा के मुख्य यजमान अनिल यादव, आरती यादव, केशव यादव, शरद श्रीवास्तव आदि रहे।