{"_id":"6a5e6e2c672929be25013cc7","slug":"clerk-dies-in-road-accident-while-on-way-to-mahakal-orai-news-c-224-1-ori1005-147049-2026-07-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jalaun News: महाकाल जा रहे लिपिक की सड़क हादसे में मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jalaun News: महाकाल जा रहे लिपिक की सड़क हादसे में मौत
विज्ञापन
फोटो - 03 मृतक श्यामजी की फाइल फोटो।
सिरसा कलार। थाना क्षेत्र के ग्राम अभैदेपुर निवासी पीडब्ल्यूडी उन्नाव में तैनात लिपिक की सड़क हादसे में मौत हो गई। वह आठ साथियों के साथ महाकालेश्वर के दर्शन के लिए उज्जैन जा रहे थे। हादसे में उनके एक साथी की भी जान चली गई, जबकि अन्य घायल हो गए।
थाना क्षेत्र के अभैदेपुर गांव निवासी श्यामजी प्रजापति (37) उन्नाव में पीडब्ल्यूडी में लिपिक के पद पर तैनात थे। परिजनों के अनुसार 18 जुलाई की रात श्यामजी साथियों के साथ कार से उज्जैन के लिए निकले थे। रास्ते में अगला टायर फट जाने से कार अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में सभी लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां देर रात उपचार के दौरान श्यामजी की मौत हो गई। उनके एक साथी ने भी दम तोड़ दिया।
रविवार रात जब श्यामजी का शव गांव पहुंचा तो पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। सोमवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया।
श्यामजी के पिता स्वर्गीय अतिरूप प्रजापति भी लोक निर्माण विभाग उरई में कार्यरत थे। सेवाकाल के दौरान उनके निधन के बाद श्यामजी की नियुक्ति मृतक आश्रित के रूप में विभाग में हुई थी। बाद में उनका स्थानांतरण उन्नाव हो गया था।
विज्ञापन
मृतक अपने पीछे पत्नी मंजेशी, पुत्र दिव्यांश और पुत्री मानसी को छोड़ गए हैं। परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य के निधन से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। छोटे भाई श्याम सुंदर सहित पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
विज्ञापन
थाना क्षेत्र के अभैदेपुर गांव निवासी श्यामजी प्रजापति (37) उन्नाव में पीडब्ल्यूडी में लिपिक के पद पर तैनात थे। परिजनों के अनुसार 18 जुलाई की रात श्यामजी साथियों के साथ कार से उज्जैन के लिए निकले थे। रास्ते में अगला टायर फट जाने से कार अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में सभी लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां देर रात उपचार के दौरान श्यामजी की मौत हो गई। उनके एक साथी ने भी दम तोड़ दिया।
विज्ञापन
रविवार रात जब श्यामजी का शव गांव पहुंचा तो पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। सोमवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया।
श्यामजी के पिता स्वर्गीय अतिरूप प्रजापति भी लोक निर्माण विभाग उरई में कार्यरत थे। सेवाकाल के दौरान उनके निधन के बाद श्यामजी की नियुक्ति मृतक आश्रित के रूप में विभाग में हुई थी। बाद में उनका स्थानांतरण उन्नाव हो गया था।
विज्ञापन
मृतक अपने पीछे पत्नी मंजेशी, पुत्र दिव्यांश और पुत्री मानसी को छोड़ गए हैं। परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य के निधन से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। छोटे भाई श्याम सुंदर सहित पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।