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Jalaun News: कमर तक पानी पार कर स्कूल से घर पहुंचे बच्चे

Sat, 18 Jul 2026 11:51 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 18 Jul 2026 11:51 PM IST
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Children reached home from school after wading through waist-deep water.
फोटो - 19 परासन से होते हुए नाला भरे पानी से निकलते स्कूली बच्चे। संवाद - फोटो : 1
आटा। कदौरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत परासन के मजरा कुइयाझोर में शनिवार को करीब एक घंटे की बारिश ने एक बार फिर विकास के दावों की पोल खोल दी। बारिश के बाद गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाले दोनों कच्चे रास्ते कीचड़ और जलभराव से दलदल में तब्दील हो गए। इससे करीब 400 की आबादी वाला गांव लगभग कट गया और ग्रामीण घरों में कैद होकर रह गए।
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सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ी। गांव के 15 से 20 बच्चे रोजाना की तरह पैदल परासन पहुंचकर बस से कालपी-राठ मार्ग स्थित स्कूल गए थे। छुट्टी के बाद बारिश शुरू होने से बस केवल परासन तक ही पहुंच सकी। गांव तक जाने वाले करीब दो किलोमीटर लंबे कच्चे रास्ते पर कीचड़ और पानी भर जाने के कारण बच्चों को पैदल ही लौटना पड़ा। रास्ते में पड़ने वाले नाले में कमर तक पानी बह रहा था। जान जोखिम में डालकर बच्चे नाले को पार करते हुए भीगकर घर पहुंचे।
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ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में गांव का संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। मरीजों, गर्भवती महिलाओं और स्कूली बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। एंबुलेंस और अन्य वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते। ग्रामीणों ने बताया कि 12 सितंबर 2024 को भी सड़क खराब होने के कारण गांव के बुजुर्ग अच्छेलाल को समय पर इलाज नहीं मिल सका था। एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंची तो ग्रामीण उन्हें चारपाई पर लादकर अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई थी। घटना के बाद प्रशासन और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने निरीक्षण कर करीब चार करोड़ रुपये की लागत से सड़क निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा था, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण उसे मंजूरी नहीं मिल सकी।
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आश्वासन से आगे नहीं बढ़ा सड़क निर्माण
ग्रामीण सुखलाल का कहना है कि हर बरसात में हालात ऐसे ही हो जाते हैं। वर्षों से पक्की सड़क की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। उन्होंने जल्द सड़क निर्माण की मांग की।
सड़क न होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
ग्रामीण ओमवती ने बताया कि बारिश शुरू होते ही गांव के दोनों कच्चे रास्ते पानी में डूब जाते हैं। बच्चों को रोज दो से ढाई किलोमीटर पैदल चलकर बस तक पहुंचना पड़ता है। बारिश में नाले में घुटनों से लेकर कमर तक पानी बहता है, जिससे बच्चों की जान हमेशा खतरे में रहती है। पक्की सड़क न होने से उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।


वर्जन
कुइयाझोर सड़क को कार्ययोजना में शामिल कर लिया गया है। शासन से स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। -महेंद्र कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग

फोटो - 19 परासन से होते हुए नाला भरे पानी से निकलते स्कूली बच्चे। संवाद

फोटो - 19 परासन से होते हुए नाला भरे पानी से निकलते स्कूली बच्चे। संवाद- फोटो : 1

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