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Jalaun News: पथरेठा में बोई फसल वाले खेत पर कागजों में मेड़ बंदी
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फोटो - 22 खेत में खड़ी फसल पर कागजों में दिखाया जा रहा मनरेगा का कार्य। संवाद
कदौरा। मनरेगा में फर्जीवाड़ा रुकने का नाम नहीं ले रहा है। हालत यह है कि जिम्मेदारों की मिलीभगत से लोग कागजों में मजदूरों को दिखाकर हजारों रुपये का भुगतान करवाकर सरकारी धन का बंदरबांट कर रहे हैं। कदौरा के पथरेठा गांव में जिस कार्य को कागजों में होना दिखा जा रहा है। उस खेत में गेहूं की बोआई हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि यह कार्य अकेला इसी पंचायत में नहीं हो रहा है। अगर सही से जांच की जाए, तो कई गांवों में फर्जी भुगतान मिलेंगे।
कदौरा विकास खंड के ग्राम पंचायत पथरेठा में मनरेगा योजना के तहत मेड़बंदी और समतलीकरण कार्य में फर्जीवाड़ा सामने आया है। ग्राम पंचायत में स्थानीय किसान सेवा के खेत पर मेड़बंदी कार्य दर्शाया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग मिली। ग्रामीण देवकरण, कमला और रोधन ने बताया कि जिस खेत पर पिछले दस दिनों से 38 मजदूरों की ऑनलाइन मस्टर रोल जारी की जा रही है। वह खेत इस समय पूरी तरह से फसल से भरा हुआ है।
खेत में एक इंच भी खाली जगह नहीं है। ऐसे में मेड़बंदी या समतलीकरण का कोई सवाल ही नहीं उठता। ग्रामीणों ने कहा कि न तो कभी खेत पर किसी मजदूर को काम करते देखा गया और न ही किसी प्रकार का मनरेगा कार्य शुरू हुआ। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों और ग्राम पंचायत के जिम्मेदार लोगों की मिलीभगत से फर्जी मस्टर रोल तैयार कर सरकारी धन की भारी हेराफेरी हो रही है। उनका कहना है कि काम केवल कागज़ों में दिखाकर मजदूरों के नाम पर भुगतान कराया जा रहा है। ग्रामीणों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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वर्जन
इसकी जांच करवाई जाएगी। अगर काम नहीं हो रहा है, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी। किसी भी प्रकार से गलत काम नहीं होने दिया जाएगा।
रामेंद्र सिंह कुशवाह, डीसी, मनरेगा
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कदौरा विकास खंड के ग्राम पंचायत पथरेठा में मनरेगा योजना के तहत मेड़बंदी और समतलीकरण कार्य में फर्जीवाड़ा सामने आया है। ग्राम पंचायत में स्थानीय किसान सेवा के खेत पर मेड़बंदी कार्य दर्शाया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग मिली। ग्रामीण देवकरण, कमला और रोधन ने बताया कि जिस खेत पर पिछले दस दिनों से 38 मजदूरों की ऑनलाइन मस्टर रोल जारी की जा रही है। वह खेत इस समय पूरी तरह से फसल से भरा हुआ है।
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खेत में एक इंच भी खाली जगह नहीं है। ऐसे में मेड़बंदी या समतलीकरण का कोई सवाल ही नहीं उठता। ग्रामीणों ने कहा कि न तो कभी खेत पर किसी मजदूर को काम करते देखा गया और न ही किसी प्रकार का मनरेगा कार्य शुरू हुआ। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों और ग्राम पंचायत के जिम्मेदार लोगों की मिलीभगत से फर्जी मस्टर रोल तैयार कर सरकारी धन की भारी हेराफेरी हो रही है। उनका कहना है कि काम केवल कागज़ों में दिखाकर मजदूरों के नाम पर भुगतान कराया जा रहा है। ग्रामीणों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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इसकी जांच करवाई जाएगी। अगर काम नहीं हो रहा है, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी। किसी भी प्रकार से गलत काम नहीं होने दिया जाएगा।
रामेंद्र सिंह कुशवाह, डीसी, मनरेगा