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कंबल पर कैंची: कंबल कर दिया हल्का, भारी पड़ेगी सर्दी
Sun, 24 Nov 2024 03:17 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
Updated Sun, 24 Nov 2024 03:17 AM IST
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उरई। सर्दी से बचाव के लिए जैम पोर्टल पर दो किलो 200 ग्राम वजनी कंबल की खरीद के आदेश हुए थे। लेकिन स्वास्थ्य महकमे ने कंबल की खरीद में ही खेल कर दिया। अमर उजाला की टीम ने जिला अस्पताल और महिला अस्पताल की पड़ताल कर कंबलों का वजन कराया तो कंबल करीब सात सौ ग्राम कम वजन के निकले। इन कंबलों की खरीद में मानकों की अनदेखी की गई है।
महिला अस्पताल में अमर उजाला की टीम ने पड़ताल के दौरान जब कंबल का वजन कराया तो कंबल सिर्फ 1500 ग्राम के निकले। जबकि उनमें ऊन की मात्रा भी ज्यादा नहीं थी। अधिकांश मरीज अपने घरों से कंबल लाए थे। इसी तरह जिला अस्पताल की पड़ताल के दौरान जब कंबलों का वजन कराया गया तो उनका वजन एक किलो 580 ग्राम निकला। यह वजन भी मानक से करीब छह सौ बीस ग्राम कम था।
इसके बाद एक और कंबल का वजन कराया गया तो उसका भी इतना ही निकला। इन कंबलों का वजन कहां चला गया। इससे तो साफ जाहिर होता है कि खरीदारी के दौरान इसमें भी गड़बड़ी हुई। इस बात का जवाब देने से अधिकारी भी कतरा रहे हैं। मरीजों का कहना है कि जो कंबल अभी दिए जा रहे है, उनमें ठंड से बचाव नहीं हो रहा है। जब कड़ाके की सर्दी होगी, तब भगवान ही मालिक होगा। हालांकि ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी दावा कर रहे है कि जो मरीज अतिरिक्त कंबल मांगते है तो उन्हें दिए जाते है। जबकि भर्ती मरीज इस बात से इन्कार रहे हैं।
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केस-1-
जिला अस्पताल के आर्थो वार्ड में भर्ती कुठौंद के धराना गांव निवासी राजू (30) का पिछले शनिवार को बाइक की टक्कर से पैर टूट गया था। वह एक कंबल घर से लाए थे। उनका कहना है कि शनिवार को अस्पतास से कंबल दिया गया था, तबसे बदला नहीं गया।
केस-2-
मुसमरिया गांव के गया प्रसाद बाइक से गिरकर घायल हो गए थे। उनका पैर टूट गया है। वह 11 नवंबर से जिला अस्पताल में भर्ती हैं। पिछले शनिवार को उनका ऑपरेशन हुआ था। उनका कहना है कि कंबल से बदबू आने लगी है पर उनका कंबल नहीं बदला गया है।
केस-3-
सैदनगर गांव के दुर्गाप्रसाद बुधवार को तख्त से गिरकर घायल हो गए थे। उनका बेटे अरविंद ने उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया। उनका कहना है कि उन्हें जो कंबल दिया गया है, वह फटा है, साथ ही वजन भी कम है। कंबल बदलने को कहा था तो कल बदलने की बात कही थी।
केस-4-
धंतौली धनौरा निवासी उर्मिला जिला महिला अस्पताल के प्रसूता वार्ड में भर्ती है। उन्हें गुरुवार को एक बेटे को जन्म दिया है। उनका कंबल फटा है, साथ ही उसका वजन भी कम है। उनका कहना है कि वह घर से कंबल लाई थी। एंबुलेंस की भी सेवा नहीं मिली। प्राइवेट वाहन से जिला अस्पताल पहुंची थीं।
यह है मानक
सरकारी मानक के अनुसार, कम से कम पांच सौ रुपये कीमत के कंबल खरीदे जाने थे। इसमें कंबल दो किलो 200 ग्राम वजन का होना चाहिए। कंबल की लंबाई 135 सेंटीमीटर और चौड़ाई 140 सेंटीमीटर होनी चाहिए। इसमें 70 प्रतिशत ऊन होनी चाहिए। हालांकि हकीकत में इन मानकों की अनदेखी की गई है।
वर्जन
उन्हें मानक के विपरीत कंबलों के आने की कोई जानकारी नहीं है। अगर ऐसा हुआ है तो इसकी जानकारी की जाएगी। -डॉ. एनडी शर्मा, सीएमओ
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महिला अस्पताल में अमर उजाला की टीम ने पड़ताल के दौरान जब कंबल का वजन कराया तो कंबल सिर्फ 1500 ग्राम के निकले। जबकि उनमें ऊन की मात्रा भी ज्यादा नहीं थी। अधिकांश मरीज अपने घरों से कंबल लाए थे। इसी तरह जिला अस्पताल की पड़ताल के दौरान जब कंबलों का वजन कराया गया तो उनका वजन एक किलो 580 ग्राम निकला। यह वजन भी मानक से करीब छह सौ बीस ग्राम कम था।
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इसके बाद एक और कंबल का वजन कराया गया तो उसका भी इतना ही निकला। इन कंबलों का वजन कहां चला गया। इससे तो साफ जाहिर होता है कि खरीदारी के दौरान इसमें भी गड़बड़ी हुई। इस बात का जवाब देने से अधिकारी भी कतरा रहे हैं। मरीजों का कहना है कि जो कंबल अभी दिए जा रहे है, उनमें ठंड से बचाव नहीं हो रहा है। जब कड़ाके की सर्दी होगी, तब भगवान ही मालिक होगा। हालांकि ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी दावा कर रहे है कि जो मरीज अतिरिक्त कंबल मांगते है तो उन्हें दिए जाते है। जबकि भर्ती मरीज इस बात से इन्कार रहे हैं।
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केस-1-
जिला अस्पताल के आर्थो वार्ड में भर्ती कुठौंद के धराना गांव निवासी राजू (30) का पिछले शनिवार को बाइक की टक्कर से पैर टूट गया था। वह एक कंबल घर से लाए थे। उनका कहना है कि शनिवार को अस्पतास से कंबल दिया गया था, तबसे बदला नहीं गया।
केस-2-
मुसमरिया गांव के गया प्रसाद बाइक से गिरकर घायल हो गए थे। उनका पैर टूट गया है। वह 11 नवंबर से जिला अस्पताल में भर्ती हैं। पिछले शनिवार को उनका ऑपरेशन हुआ था। उनका कहना है कि कंबल से बदबू आने लगी है पर उनका कंबल नहीं बदला गया है।
केस-3-
सैदनगर गांव के दुर्गाप्रसाद बुधवार को तख्त से गिरकर घायल हो गए थे। उनका बेटे अरविंद ने उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया। उनका कहना है कि उन्हें जो कंबल दिया गया है, वह फटा है, साथ ही वजन भी कम है। कंबल बदलने को कहा था तो कल बदलने की बात कही थी।
केस-4-
धंतौली धनौरा निवासी उर्मिला जिला महिला अस्पताल के प्रसूता वार्ड में भर्ती है। उन्हें गुरुवार को एक बेटे को जन्म दिया है। उनका कंबल फटा है, साथ ही उसका वजन भी कम है। उनका कहना है कि वह घर से कंबल लाई थी। एंबुलेंस की भी सेवा नहीं मिली। प्राइवेट वाहन से जिला अस्पताल पहुंची थीं।
यह है मानक
सरकारी मानक के अनुसार, कम से कम पांच सौ रुपये कीमत के कंबल खरीदे जाने थे। इसमें कंबल दो किलो 200 ग्राम वजन का होना चाहिए। कंबल की लंबाई 135 सेंटीमीटर और चौड़ाई 140 सेंटीमीटर होनी चाहिए। इसमें 70 प्रतिशत ऊन होनी चाहिए। हालांकि हकीकत में इन मानकों की अनदेखी की गई है।
वर्जन
उन्हें मानक के विपरीत कंबलों के आने की कोई जानकारी नहीं है। अगर ऐसा हुआ है तो इसकी जानकारी की जाएगी। -डॉ. एनडी शर्मा, सीएमओ