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मुश्किल हुए हालात, सेना के जवान निभा रहे साथ
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हेलीकॉप्टर से लिया गया जनपद जालौन का बाढ़ का दृश्य
- फोटो : ORAI
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उरई/रामपुरा। सिंध नदी का जलस्तर भले ही शनिवार से कम होना शुरू हो गया हो, लेकिन बाढ़ से घिरे ग्रामीणों की मुश्किलें जस की तस है। ग्रामीण घरों में फंसे हैं। हैंडपंप और शौचालय सब पानी में डूबे हैं। पीने के पानी और शौच तक जाने में तमाम दिक्कतें हैं। घरों के भीतर बाढ़ के पानी के बीच सांप और जहरीले कीड़ों के निकलने का भी डर सता रहा है। इन दुश्वारियों के बीच भी ग्रामीणों को यदि कोई मददगार दिखाई दे रहा है तो वे हैं सेना के जवान। जो कि न सिर्फ लोगों को बाढ़ से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर ले जा रहे हैं, बल्कि बीमार बुजुर्गों और महिलाओं को स्वास्थ्य शिविर तक भी पहुंचा रहे हैं।
बता दें कि रामपुरा ब्लाक के कई गांव पिछले पांच दिनों से बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे हैं। अधिकांश ग्रामीणों ने तो गृहस्थी के जरूरी समान के साथ गांव से ही पलायन कर लिया है। जितने लोग गांवों में हैं तो उनकी भी मुसीबतों को देखने वाला कोई नहीं है। ऐसे में सेना के जवानों से ही बाढ़ में फंसे लोगों को मदद मिल पा रही है। जवान एंबुलेंस से बीमारों को स्वास्थ्य कैंपों तक भी लेकर जा रहे हैं।(संवाद)
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फोटो-01 बाढ़ से निकालकर गर्भवती को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाते जवान। संवाद
बाढ़ से निकाल गर्भवती को पहुंचाया अस्पताल
बाढ़ से घिरे ब्लाक के सिद्धपुरा गांव निवासी रामू और उसके घर वाले बहुत चिंतित थे कि बहू साधना गर्भवती है और उसका समय पूरा हो चुका है। गांव में चारों ओर पानी ही पानी है। ऐसे में बहू को सही वक्त पर अस्पताल कैसे मिल पाएगा। शनिवार को करणी सेना के सतीश सिंह ने एसडीएम को समस्या से अवगत कराया और फिर एसडीएम ने सैन्य अधिकारियों से संपर्क किया। फिर क्या था कुछ ही देर में सेना के जवान मोटरबोट लेकर गांव पहुंचे और गर्भवती महिला को बाढ़ के पानी से निकाला। इसके बाद एंबुलेंस से सही समय पर अस्पताल तक पहुंचाकर परिवार की चिंताएं दूर की। (संवाद)
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फोटो-04 प्लास्टिक तानकर गुजर बसर करते बाढ़ पीड़ित। संवाद
प्लास्टिक के नीचे कट रहीं बाढ़ पीड़ितों की रातें
रामपुरा। सिंध नदी से आई बाढ़ का स्तर शनिवार की सुबह से ही कम होने लगा है। हालांकि किसानों की फसलें और ग्रामीणों के घर गृहस्थी सभी कुछ इस बाढ़ में बर्बाद हो चुके हैं। जगम्मनपुर गांव में शरण लेने वाले ग्रामीण किसी तरह प्लास्टिक तानकर अपने परिवार के साथ दिन रात काट रहे हैं। इनका कहना है कि जहरीले जीव जंतुओं के डर से पूरी पूरी रात जागकर गुजारनी पड़ रही है। ग्राम गुढ़ा के ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव के लगभग एक दर्जन मकान या पशु बाड़ा यमुना नदी की लहरों में समा गए हैं। ग्राम कूसेपूरा, मोहब्बतपुरा, डिकौली, जागीर, हुकमपुरा, बिलौड़, पतराही, बेरा आदि गांव बाढ़ में पूरी तरह से घिरे हैं। (संवाद)
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फोटो-03 बाढ़ के पानी में छलांग लगाता किशोर। संवाद
बाढ़ के पानी में पुल से लग रही छलांग
रामपुरा। माधौगढ़ तहसील अंतर्गत पंचनद क्षेत्र में बाढ़ की विभीषिका से जहां चारों ओर त्राहि त्राहि मची है, वही कुछ किशोर जगम्मनपुर जूहीखा पुल पर पहुंचकर पानी के तेज वेग में पुल से छलांग लगाकर खतरनाक स्टंट कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस प्रशासन को इस ओर भी ध्यान देना चाहिए क्योंकि इससे किशोरों की जान को खतरा हो सकता है। लिहाजा पुल के आसपास पुलिस की गश्त होनी चाहिए। (संवाद)
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फोटो-02 मदद के लिए मोटर बोट में सवार भाजपा नेता
नेता व सामाजिक संगठन भी भोजन पानी लेकर दिखे
रामपुरा/सिरसाकलार। परमार्थ समाज सेवी के सचिव संजय सिंह ने एसडीआरएफ के सहयोग से मोटर बोट से बाढ़ ग्रस्त गांवों का दौरा और पीड़ित ग्रामीणों को भोजन के पैकेट वितरित किए। रामपुरा चेयरमैन शैलेंद्र सिंह ने भी सामुदायिक रसोई से लंच पैकेज वितरित कराए। जिला पंचायत सदस्य प्रियंका गौतम, ब्लाक प्रमुख अजीत सिंह, जिला पंचायत सदस्य राघवेंद्र पांडे जगम्मनपुर आदि ने भी बाढ़ पीड़ितों के मध्य लंच पैकेट वितरित कराए। सिरसा प्रतिनिधि के मुताबिक भाजपा जिलाध्यक्ष रामेन्द्र सिंह बना, जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम अनुरागी, जिला पंचायत सदस्य अनिल सिंह सेंगर, ने मोटर बोट से बाढ़ से घिरे गांव लोहाई गांव का निरीक्षण किया और भोजन सामग्री वितरित की। ग्राम प्रधान कल्लू दीक्षित, सानू सेंगर, कुलदीप भदौरिया, बबलू सिंह, पिंटू चौहान आदि मौजूद रहे। (संवाद)
भोजन के साथ स्वास्थ्य शिविर भी लगे
रामपुरा। एडीएम माधौगढ़ के मुताबिक बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं, जहां उन्हें इलाज मिल सके। इसके अलावा प्रशासन भी उनके भोजन की व्यवस्था कर रहा है। लेखपाल कुंअर सिंह ने बताया की खंड विकास अधिकारी ने 500 पैकेट, अधिशासी अधिकारी ने 150 पैकेट, सपा के अशोक राठौर ने 1000 और राहुल सिंह हरौली ने 1500 पैकेट भिजवाए हैं, जिन्हें निनावली, कुसेपुरा, डिकोली, बुढ़ेरा, मुल्लेकापुरा, किशनपुरा और मिर्जापुर भेजा जा रहा है। (संवाद)
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180 परिवारों को सुरक्षित निकाल चुके हैं जवान
रामपुरा। सेना के जवानों ने शुक्रवार की सुबह से लेकर शनिवार की शाम तक बाढ़ प्रभावित गांवों में फंसे 180 परिवारों को नावों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। इनमें गांव कुसेपुरा, निनावली, किशनपुरा, डिकौली, जागीर, चंदनपुरा, सिद्धपुरा, भेलावली आदि के परिवार शामिल हैं। कुसेपुरा से 550 लोगों को तो मुल्लेकापुरा से 120 लोगों को और किशनपुरा से 70 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जवानों ने पहुंचाया है। रेस्क्यू ऑपरेशन में लाए गए लोगों को रामपुरा स्थित समर सिंह इंटर कॉलेज में रखा गया है। इसके अलावा जवानों की ओर से ही आईटीआई कॉलेज के पास कैंप लगाया गया है। यहीं से जवान बाढ़ प्रभावित इलाकों की पेट्रोलिंग के लिए भी निकलते हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम को सेना की सहायता से कुसेपुरा, निनावली, किशनपुरा आदि गांवो में भेजा गया है। (संवाद)
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गड्ढ़े में मिला लापता पूर्व फौजी का शव
रामपुरा। बाढ़ के बीच दो दिन से लापता हुए निनावली निवासी पूर्व फौजी वीर नारायण तिवारी (48) का शव उसके घर के शौचालय के गड्ढे में पड़ा मिला। नदी का पानी कम होने के बाद शव को बाहर निकाला गया। बता दें कि गुरुवार को नादियापार क्षेत्र में भीषण बाढ़ ने तकरीबन पूरे इलाके को चपेट में ले लिया था। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था और पानी गांव के भीतर तक जा पहुंचा था। इसी बीच वीर नारायण बी लापता हो गया था। बाढ़ के पानी के कारण परिजन उसे तलाश भी नहीं पा रहे थे। शनिवार को पानी कम होने पर उसका शव उसके ही घर के पास मिला ही शौचालय के लिए बने गड्ढे में पानी के बीच मिला। थाना प्रभारी निरीक्षक जेपी पाल ने बताया कि मृतक के शव का पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया हैं। अधिकारियों को भी इसकी जानकारी कर दी गई है। (संवाद)
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घर न छोड़ने की जिद बनी सेना के लिए मुश्किल
रामपुरा। सेना के जवानों ने बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन में कुछ दिक्कतें भी सामने आ रही हैं। कुछ ग्रामीण अपना गांव व घर छोड़ने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। उन्हें अपनी जान का भी डर नहीं है। ऐसे लोगों को समझाने में काफी दिक्कत आ रही है। बड़ी मुश्किल से वे अपना घर छोड़कर जवानों की नौका में बैठने को राजी होते हैं। जवानों के मुताबिक कुछ इलाके ऐसे भी हैं जहां पहुंचना आसान नहीं है। नदी के तेज बहाव के कारण स्टीमर चलाने में भी काफी दिक्कतें सामने आ रही हैं। (संवाद)
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बता दें कि रामपुरा ब्लाक के कई गांव पिछले पांच दिनों से बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे हैं। अधिकांश ग्रामीणों ने तो गृहस्थी के जरूरी समान के साथ गांव से ही पलायन कर लिया है। जितने लोग गांवों में हैं तो उनकी भी मुसीबतों को देखने वाला कोई नहीं है। ऐसे में सेना के जवानों से ही बाढ़ में फंसे लोगों को मदद मिल पा रही है। जवान एंबुलेंस से बीमारों को स्वास्थ्य कैंपों तक भी लेकर जा रहे हैं।(संवाद)
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फोटो-01 बाढ़ से निकालकर गर्भवती को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाते जवान। संवाद
बाढ़ से निकाल गर्भवती को पहुंचाया अस्पताल
बाढ़ से घिरे ब्लाक के सिद्धपुरा गांव निवासी रामू और उसके घर वाले बहुत चिंतित थे कि बहू साधना गर्भवती है और उसका समय पूरा हो चुका है। गांव में चारों ओर पानी ही पानी है। ऐसे में बहू को सही वक्त पर अस्पताल कैसे मिल पाएगा। शनिवार को करणी सेना के सतीश सिंह ने एसडीएम को समस्या से अवगत कराया और फिर एसडीएम ने सैन्य अधिकारियों से संपर्क किया। फिर क्या था कुछ ही देर में सेना के जवान मोटरबोट लेकर गांव पहुंचे और गर्भवती महिला को बाढ़ के पानी से निकाला। इसके बाद एंबुलेंस से सही समय पर अस्पताल तक पहुंचाकर परिवार की चिंताएं दूर की। (संवाद)
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फोटो-04 प्लास्टिक तानकर गुजर बसर करते बाढ़ पीड़ित। संवाद
प्लास्टिक के नीचे कट रहीं बाढ़ पीड़ितों की रातें
रामपुरा। सिंध नदी से आई बाढ़ का स्तर शनिवार की सुबह से ही कम होने लगा है। हालांकि किसानों की फसलें और ग्रामीणों के घर गृहस्थी सभी कुछ इस बाढ़ में बर्बाद हो चुके हैं। जगम्मनपुर गांव में शरण लेने वाले ग्रामीण किसी तरह प्लास्टिक तानकर अपने परिवार के साथ दिन रात काट रहे हैं। इनका कहना है कि जहरीले जीव जंतुओं के डर से पूरी पूरी रात जागकर गुजारनी पड़ रही है। ग्राम गुढ़ा के ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव के लगभग एक दर्जन मकान या पशु बाड़ा यमुना नदी की लहरों में समा गए हैं। ग्राम कूसेपूरा, मोहब्बतपुरा, डिकौली, जागीर, हुकमपुरा, बिलौड़, पतराही, बेरा आदि गांव बाढ़ में पूरी तरह से घिरे हैं। (संवाद)
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फोटो-03 बाढ़ के पानी में छलांग लगाता किशोर। संवाद
बाढ़ के पानी में पुल से लग रही छलांग
रामपुरा। माधौगढ़ तहसील अंतर्गत पंचनद क्षेत्र में बाढ़ की विभीषिका से जहां चारों ओर त्राहि त्राहि मची है, वही कुछ किशोर जगम्मनपुर जूहीखा पुल पर पहुंचकर पानी के तेज वेग में पुल से छलांग लगाकर खतरनाक स्टंट कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस प्रशासन को इस ओर भी ध्यान देना चाहिए क्योंकि इससे किशोरों की जान को खतरा हो सकता है। लिहाजा पुल के आसपास पुलिस की गश्त होनी चाहिए। (संवाद)
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फोटो-02 मदद के लिए मोटर बोट में सवार भाजपा नेता
नेता व सामाजिक संगठन भी भोजन पानी लेकर दिखे
रामपुरा/सिरसाकलार। परमार्थ समाज सेवी के सचिव संजय सिंह ने एसडीआरएफ के सहयोग से मोटर बोट से बाढ़ ग्रस्त गांवों का दौरा और पीड़ित ग्रामीणों को भोजन के पैकेट वितरित किए। रामपुरा चेयरमैन शैलेंद्र सिंह ने भी सामुदायिक रसोई से लंच पैकेज वितरित कराए। जिला पंचायत सदस्य प्रियंका गौतम, ब्लाक प्रमुख अजीत सिंह, जिला पंचायत सदस्य राघवेंद्र पांडे जगम्मनपुर आदि ने भी बाढ़ पीड़ितों के मध्य लंच पैकेट वितरित कराए। सिरसा प्रतिनिधि के मुताबिक भाजपा जिलाध्यक्ष रामेन्द्र सिंह बना, जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम अनुरागी, जिला पंचायत सदस्य अनिल सिंह सेंगर, ने मोटर बोट से बाढ़ से घिरे गांव लोहाई गांव का निरीक्षण किया और भोजन सामग्री वितरित की। ग्राम प्रधान कल्लू दीक्षित, सानू सेंगर, कुलदीप भदौरिया, बबलू सिंह, पिंटू चौहान आदि मौजूद रहे। (संवाद)
भोजन के साथ स्वास्थ्य शिविर भी लगे
रामपुरा। एडीएम माधौगढ़ के मुताबिक बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं, जहां उन्हें इलाज मिल सके। इसके अलावा प्रशासन भी उनके भोजन की व्यवस्था कर रहा है। लेखपाल कुंअर सिंह ने बताया की खंड विकास अधिकारी ने 500 पैकेट, अधिशासी अधिकारी ने 150 पैकेट, सपा के अशोक राठौर ने 1000 और राहुल सिंह हरौली ने 1500 पैकेट भिजवाए हैं, जिन्हें निनावली, कुसेपुरा, डिकोली, बुढ़ेरा, मुल्लेकापुरा, किशनपुरा और मिर्जापुर भेजा जा रहा है। (संवाद)
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180 परिवारों को सुरक्षित निकाल चुके हैं जवान
रामपुरा। सेना के जवानों ने शुक्रवार की सुबह से लेकर शनिवार की शाम तक बाढ़ प्रभावित गांवों में फंसे 180 परिवारों को नावों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। इनमें गांव कुसेपुरा, निनावली, किशनपुरा, डिकौली, जागीर, चंदनपुरा, सिद्धपुरा, भेलावली आदि के परिवार शामिल हैं। कुसेपुरा से 550 लोगों को तो मुल्लेकापुरा से 120 लोगों को और किशनपुरा से 70 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जवानों ने पहुंचाया है। रेस्क्यू ऑपरेशन में लाए गए लोगों को रामपुरा स्थित समर सिंह इंटर कॉलेज में रखा गया है। इसके अलावा जवानों की ओर से ही आईटीआई कॉलेज के पास कैंप लगाया गया है। यहीं से जवान बाढ़ प्रभावित इलाकों की पेट्रोलिंग के लिए भी निकलते हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम को सेना की सहायता से कुसेपुरा, निनावली, किशनपुरा आदि गांवो में भेजा गया है। (संवाद)
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गड्ढ़े में मिला लापता पूर्व फौजी का शव
रामपुरा। बाढ़ के बीच दो दिन से लापता हुए निनावली निवासी पूर्व फौजी वीर नारायण तिवारी (48) का शव उसके घर के शौचालय के गड्ढे में पड़ा मिला। नदी का पानी कम होने के बाद शव को बाहर निकाला गया। बता दें कि गुरुवार को नादियापार क्षेत्र में भीषण बाढ़ ने तकरीबन पूरे इलाके को चपेट में ले लिया था। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था और पानी गांव के भीतर तक जा पहुंचा था। इसी बीच वीर नारायण बी लापता हो गया था। बाढ़ के पानी के कारण परिजन उसे तलाश भी नहीं पा रहे थे। शनिवार को पानी कम होने पर उसका शव उसके ही घर के पास मिला ही शौचालय के लिए बने गड्ढे में पानी के बीच मिला। थाना प्रभारी निरीक्षक जेपी पाल ने बताया कि मृतक के शव का पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया हैं। अधिकारियों को भी इसकी जानकारी कर दी गई है। (संवाद)
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घर न छोड़ने की जिद बनी सेना के लिए मुश्किल
रामपुरा। सेना के जवानों ने बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन में कुछ दिक्कतें भी सामने आ रही हैं। कुछ ग्रामीण अपना गांव व घर छोड़ने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। उन्हें अपनी जान का भी डर नहीं है। ऐसे लोगों को समझाने में काफी दिक्कत आ रही है। बड़ी मुश्किल से वे अपना घर छोड़कर जवानों की नौका में बैठने को राजी होते हैं। जवानों के मुताबिक कुछ इलाके ऐसे भी हैं जहां पहुंचना आसान नहीं है। नदी के तेज बहाव के कारण स्टीमर चलाने में भी काफी दिक्कतें सामने आ रही हैं। (संवाद)