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‘दुख में साथ निभाने वाला ही सच्चा मित्र
Jalaun
Updated Sun, 30 Nov 2014 05:30 AM IST
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मुहम्मदाबाद (जालौन)। बजरंग सत्संग आश्रम डकोर में हो रही श्रीमद्भागवत कथा में शनिवार को कथावाचक स्वामी वृंदावन आचार्य ने मित्रता की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि दुख की घड़ी में दूसरों के काम आने वाला व्यक्ति ही सच्चा मित्र होता है।
उन्होंने कहा कि सुख-दुख में सच्चा मित्र ही मित्र के काम आता है। दुख की घड़ी में जो तन, मन, धन से निस्वार्थ भाव से दूसरों के प्रति काम आए, उसी को सच्चा हितैषी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि सुख में साथ रहने वाला व दुख में पीठ दिखाकर भागने वाला कभी सच्चा मित्र नहीं हो सकता। मित्रता में स्वार्थ एवं लालच नहीं होना चाहिए। इसी प्रसंग में सुदामा की कथा सुनाते हुए कहा कि गरीब ब्राह्मण सुदामा की दीन दशा देखकर भगवान श्रीकृष्ण रो पडे़ और सुदामा को हृदय से लगा लिया, इतना ही नहीं उनकी गरीबी भी दूर कर दी। अंत में कथा के परीक्षित ज्ञान सिंह यादव एवं श्रीमती शांति देवी ने श्रीमद्भागवत पुराण का पूजन कर आरती उतारी। इसके बाद आयोजक मनोज एवं विनोद यादव ने श्रृद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया। इस मौके पर बादाम सिंह, पिंटू यादव, क्षत्रपाल सिंह, अशोक यादव, खेम राज, बल्लन, विनय, राकेश गुप्ता आदि मौजूद रहे।
उधर, उरई के मोहल्ला राजेंद्र नगर में हो रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास पं. प्रदीप तिवारी ने मनु महाराज के पुत्र का चरित्र वर्णन दिया। प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए कहा कि मन मनुष्य से ऐसे प्रेम करता है, जैसे बालू में बालू की दीवाल खड़ी कर दी जाए। लेकिन बालू की दीवार का कोई भरोसा नहीं है कब गिर जाए। इसी तरह मन का कोई भरोसा नहीं है, कब फिसल जाए। कथा के दौरान पं. संदीप मिश्रा ने भजन सुनाकर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। कथा परीक्षित श्रीमती उर्मिला देवी ने कथा के समापन पर आरती कर श्रृद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया।
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उन्होंने कहा कि सुख-दुख में सच्चा मित्र ही मित्र के काम आता है। दुख की घड़ी में जो तन, मन, धन से निस्वार्थ भाव से दूसरों के प्रति काम आए, उसी को सच्चा हितैषी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि सुख में साथ रहने वाला व दुख में पीठ दिखाकर भागने वाला कभी सच्चा मित्र नहीं हो सकता। मित्रता में स्वार्थ एवं लालच नहीं होना चाहिए। इसी प्रसंग में सुदामा की कथा सुनाते हुए कहा कि गरीब ब्राह्मण सुदामा की दीन दशा देखकर भगवान श्रीकृष्ण रो पडे़ और सुदामा को हृदय से लगा लिया, इतना ही नहीं उनकी गरीबी भी दूर कर दी। अंत में कथा के परीक्षित ज्ञान सिंह यादव एवं श्रीमती शांति देवी ने श्रीमद्भागवत पुराण का पूजन कर आरती उतारी। इसके बाद आयोजक मनोज एवं विनोद यादव ने श्रृद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया। इस मौके पर बादाम सिंह, पिंटू यादव, क्षत्रपाल सिंह, अशोक यादव, खेम राज, बल्लन, विनय, राकेश गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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उधर, उरई के मोहल्ला राजेंद्र नगर में हो रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास पं. प्रदीप तिवारी ने मनु महाराज के पुत्र का चरित्र वर्णन दिया। प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए कहा कि मन मनुष्य से ऐसे प्रेम करता है, जैसे बालू में बालू की दीवाल खड़ी कर दी जाए। लेकिन बालू की दीवार का कोई भरोसा नहीं है कब गिर जाए। इसी तरह मन का कोई भरोसा नहीं है, कब फिसल जाए। कथा के दौरान पं. संदीप मिश्रा ने भजन सुनाकर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। कथा परीक्षित श्रीमती उर्मिला देवी ने कथा के समापन पर आरती कर श्रृद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया।
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