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जनपद न्यायालय धूम्रपान निषेध क्षेत्र घोषित
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उरई। जिला दीवानी न्यायालय परिसर को धूम्रपान निषेध क्षेत्र घोषित किया गया है। यहां धूम्रपान करना अपराध होगा और उल्लंघन करने पर 200 रुपये तक जुर्माना और सजा तक हो सकती है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अनिल कुमार यादव ने बताया कि सार्वजनिक स्थलों पर तंबाकू उत्पादों अथवा बीड़ी सिगरेट इत्यादि का उपयोग (तंबाकू नियंत्रण अधिनियम 2003) के अंतर्गत प्रतिबंधित है। इसके तहत सभी शासकीय कार्यालयों, न्यायालय परिसर, शिक्षण संस्थानों और लोक परिवहन जैसे रेलवे, बस इत्यादि में धूम्रपान करना अपराध घोषित किया जा चुका है।
तंबाकू उत्पादों का प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष विज्ञापन जहां एक ओर पूर्ण प्रतिबंधित है। वहीं नाबालिग बच्चों को तंबाकू उत्पाद बेचना या उससे बिक्री कराना भी निषेध है। उन्होंने बताया कि अक्सर देखने में आता है कि न्यायालय परिसर में आने वाले वादकारी, अधिवक्ता और जनसामान्य यहां वहां पान, गुटखा, पान मसाला और बीड़ी सिगरेट का उपयोग कर गंदगी फैलाते हैं।
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इससे एक ओर जहां भवन परिसर गंदा होता है वहीं दूसरी ओर संक्रामक रोग फैलने का भी खतरा रहता है। इस कानून का कड़ाई से पालन कराने के लिए वह स्वयं जिला न्यायालय परिसर में अचानक भ्रमण करेंगे। धूम्रपान अथवा तंबाकू उत्पाद का न्यायालय परिसर में सेवन करते पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति पर 200 रुपये तक जुर्माना किया जाएगा। इसके बाद भी उल्लंघन करने पर जेल भी भेजा जा सकता है।
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अनिल कुमार यादव ने बताया कि सार्वजनिक स्थलों पर तंबाकू उत्पादों अथवा बीड़ी सिगरेट इत्यादि का उपयोग (तंबाकू नियंत्रण अधिनियम 2003) के अंतर्गत प्रतिबंधित है। इसके तहत सभी शासकीय कार्यालयों, न्यायालय परिसर, शिक्षण संस्थानों और लोक परिवहन जैसे रेलवे, बस इत्यादि में धूम्रपान करना अपराध घोषित किया जा चुका है।
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तंबाकू उत्पादों का प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष विज्ञापन जहां एक ओर पूर्ण प्रतिबंधित है। वहीं नाबालिग बच्चों को तंबाकू उत्पाद बेचना या उससे बिक्री कराना भी निषेध है। उन्होंने बताया कि अक्सर देखने में आता है कि न्यायालय परिसर में आने वाले वादकारी, अधिवक्ता और जनसामान्य यहां वहां पान, गुटखा, पान मसाला और बीड़ी सिगरेट का उपयोग कर गंदगी फैलाते हैं।
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इससे एक ओर जहां भवन परिसर गंदा होता है वहीं दूसरी ओर संक्रामक रोग फैलने का भी खतरा रहता है। इस कानून का कड़ाई से पालन कराने के लिए वह स्वयं जिला न्यायालय परिसर में अचानक भ्रमण करेंगे। धूम्रपान अथवा तंबाकू उत्पाद का न्यायालय परिसर में सेवन करते पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति पर 200 रुपये तक जुर्माना किया जाएगा। इसके बाद भी उल्लंघन करने पर जेल भी भेजा जा सकता है।