{"_id":"5c9a6da7bdec221425446a28","slug":"101553624487-jalaun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेटियां भी बढ़ा रहीं हैं परिवार का मान-सम्मान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेटियां भी बढ़ा रहीं हैं परिवार का मान-सम्मान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आटा (जालौन)। अमर उजाला के महाअभियान अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के अंतर्गत हाईवे स्थित बीएमटी इंटर कालेज आटा में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर जागरुकता रैली एवं गोष्ठी का आयोजन हुआ। इसमें वक्ताओं ने कहा कि आज के इस दौर में बेटी-बेटे में फर्क नहीं करना चाहिए। खेल का मैदान हो या नौकरी अथवा व्यवसाय, सभी जगह बेटियां भी परिवार का मान सम्मान बढ़ा रही हैं। इसी कड़ी में कालेज की छात्राओं के साथ साथ शिक्षक शिक्षिकाओं ने भी नारी सम्मान की शपथ ली।
गोष्ठी में कालेज के प्रधानाचार्य शैलेंद्र पाठक ने कहा कि बेटियां दो परिवारों को संभालती है। इसलिए उन पर अधिक जिम्मेदारी होती है लेकिन बेटियां इस जिम्मेदारी में खुद को कमजोर न समझें बल्कि इसे अपनी ताकत बनाएं, जिससे उनका सम्मान बढ़ेगा। शिक्षक रामगोपाल दुबे ने कहा कि आज किसी भी क्षेत्र में देख लें तो बेटियां बेटों के आगे खड़ी नजर आती है।
लिहाजा अभिभावकों को चाहिए कि वे घरों में बेटे बेटी का फर्क बिल्कुल भी न करें। जिस तरह बेटे का पालन पोषण किया जाता है, वैसे ही बेटियों को भी पाले। उन्होंने बताया कि बोर्ड का परीक्षाफल हो या विश्वविद्यालय का सभी जगह आज बेटियां बेटों से आगे खड़ी नजर आती है। इसी तरह शिक्षक संतोष कुमार, राजेंद्र प्रसाद ने भी बेटियों का महत्व बताते हुए कहा कि कन्या भ्रूण हत्या से बड़ा कोई अपराध नहीं है।
विज्ञापन
लोग नवरात्र में देवी पूजन करते है, शादियों में कन्या दान करते है फिर भी कन्या भ्रूण हत्या का सिलसिला बना हुआ है। इसे रोकने के लिए हम सबको मिलकर एकजुट प्रयास करना होगा। गोष्ठी के बाद कालेज की छात्राओं ने हाथों में अपराजिता का बैनर थामकर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देते हुए रैली भी निकाली। कालेज प्रबंधन ने अपराजिता के प्रयास की सराहना की।
पहले से बदली है स्थिति
छात्रा राधा का कहना है कि जैसा पहले सुनते थे, आज समय में परिवर्तन आया है, हम बेटियों को भी घर में प्यार, दुलार और सम्मान मिलना शुरू हुआ है। यह एक अच्छी शुरूआत है, जो आगे भी जारी रहेगी।
उत्पीड़न के खिलाफ उठाएं आवाज
छात्रा खुशबू का कहना है कि बेटियों ने साबित कर दिया है कि वे किसी से कम नहीं है। फिर भी अभी जरूरत है कि बेटियां किसी भी उत्पीड़न चाहें वह घर में हो या बाहर, उसके खिलाफ आवाज उठाएं।
विज्ञापन
गोष्ठी में कालेज के प्रधानाचार्य शैलेंद्र पाठक ने कहा कि बेटियां दो परिवारों को संभालती है। इसलिए उन पर अधिक जिम्मेदारी होती है लेकिन बेटियां इस जिम्मेदारी में खुद को कमजोर न समझें बल्कि इसे अपनी ताकत बनाएं, जिससे उनका सम्मान बढ़ेगा। शिक्षक रामगोपाल दुबे ने कहा कि आज किसी भी क्षेत्र में देख लें तो बेटियां बेटों के आगे खड़ी नजर आती है।
विज्ञापन
लिहाजा अभिभावकों को चाहिए कि वे घरों में बेटे बेटी का फर्क बिल्कुल भी न करें। जिस तरह बेटे का पालन पोषण किया जाता है, वैसे ही बेटियों को भी पाले। उन्होंने बताया कि बोर्ड का परीक्षाफल हो या विश्वविद्यालय का सभी जगह आज बेटियां बेटों से आगे खड़ी नजर आती है। इसी तरह शिक्षक संतोष कुमार, राजेंद्र प्रसाद ने भी बेटियों का महत्व बताते हुए कहा कि कन्या भ्रूण हत्या से बड़ा कोई अपराध नहीं है।
विज्ञापन
लोग नवरात्र में देवी पूजन करते है, शादियों में कन्या दान करते है फिर भी कन्या भ्रूण हत्या का सिलसिला बना हुआ है। इसे रोकने के लिए हम सबको मिलकर एकजुट प्रयास करना होगा। गोष्ठी के बाद कालेज की छात्राओं ने हाथों में अपराजिता का बैनर थामकर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देते हुए रैली भी निकाली। कालेज प्रबंधन ने अपराजिता के प्रयास की सराहना की।
पहले से बदली है स्थिति
छात्रा राधा का कहना है कि जैसा पहले सुनते थे, आज समय में परिवर्तन आया है, हम बेटियों को भी घर में प्यार, दुलार और सम्मान मिलना शुरू हुआ है। यह एक अच्छी शुरूआत है, जो आगे भी जारी रहेगी।
उत्पीड़न के खिलाफ उठाएं आवाज
छात्रा खुशबू का कहना है कि बेटियों ने साबित कर दिया है कि वे किसी से कम नहीं है। फिर भी अभी जरूरत है कि बेटियां किसी भी उत्पीड़न चाहें वह घर में हो या बाहर, उसके खिलाफ आवाज उठाएं।