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जिपं अध्यक्ष: त्रिकोणीय हो सकता है मुकाबला
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस/ विकास शर्मा।
Updated Sun, 09 Jul 2017 10:49 PM IST
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जिला पंचायत अध्यक्ष के उपचुनाव का बिगुल बजते ही जिले में सियासी सरगर्मियां पूरे उफान पर पहुंच चुकी हैं। सियासत में सक्रिय लोग ही नहीं, बल्कि हर आम-ओ-खास की नजरें 23 जुलाई को होने जा रहे इस चुनाव के नतीजे पर हैं।
अविश्वास प्रस्ताव में जो लड़ाई बसपा बनाम अन्य दल हो गई थी, उसके इस बार त्रिकोणीय होने की सुगबुगाहट महसूस हो रही है। सत्ताधारी भाजपा में भी अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज होने का मोह जाग गया है, जबकि अविश्वास प्रस्ताव की लड़ाई में भाजपा समर्थित सदस्यों ने सपा और रालोद का साथ दिया था। भाजपाई दिग्गज करीब दो दशक बाद जिला पंचायत में अपना नुमाइंदा बिठाने की हर मुमकिन कोशिश में जुट गए हैं। रात-दिन इसके लिए रणनीति बन रही है। ऐसे में इस पद के लिए अब सपा और रालोद के महारथियों का दावा कमजोर पड़ सकता है या फिर उन्हें बसपा को मात देने की खातिर भाजपा की शर्तें मानने को मजबूर होना पड़ सकता है मगर इसकी गुंजाइश कम ही लग रही है।
सूबे की सियासी की धुर विरोधी भाजपा और सपा शायद ही जिले की सबसे बड़ी पंचायत के इस बेहद अहम चुनाव में एक-दूसरे को जीत दिलाना चाहेंगी। वैसे भी अब खुद भाजपा नेतृत्व ने उन पंचायतों में अपने नुमाइंदे बिठाने की कमान संभाल ली है, जहां अब तक विरोधी राज कर रहे हैं। ऐसे में सपा और रालोद सदस्यों के सामने इस लड़ाई में पीछे हटने या फिर भाजपा का साथ देने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं रह जाएगा। भाजपा की मजबूरी यह भी है कि वह जिले के इस सबसे बड़े पद पर अपनी धुर विरोधी पार्टी के किसी नुमाइंदे को नहीं बिठा सकती और न हीं पार्टी नेतृत्व इसके लिए राजी होगा।
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जिस सपा और रालोद की मदद से बसपा के जिला पंचायत अध्यक्ष को कुर्सी से हटाया गया है, अब उनके ही खेमों में ही सेंधमारी की कोशिश सत्तापक्ष की तरफ से चल रही हैं। उनके सदस्यों को अब भाजपा अपने साथ खड़ा करने के लिए पूरा जोर लगा रही है। इधर, विपक्षी एकता में फूट पड़ती देख बसपा को भी अब दोबारा काबिज होने की राह आसान दिख रही है। बसपाई दिग्गजों ने अब फिर से अपने सदस्यों को साधना शुरू कर दिया है। ज्यादातर सदस्यों को बसपाई दिग्गजों ने अंडरग्राउंड कर दिया है। दूसरी ओर रालोद और सपा के दिग्गज अपना दावा कमजोर नहीं होने देेना चाहते। इस सियासी मुकाबले में जीत किसकी झोली में जाएगी, इसका सबको बेसब्री से इंतजार है।
ये रहेगा अध्यक्ष चुनाव का कार्यक्रम
हाथरस। राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला पंचायत के उपचुनाव का जो कार्यक्रम तय किया है, उसके मुताबिक 17 जुलाई को सुबह 11 से दोपहर तीन बजे तक नामांकन होंगे। इसी दिन दोपहर तीन बजे से नामांकनों की जांच होगी। 20 जुलाई को सुबह 11 से दोपहर तीन बजे तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे। 23 जुलाई को सुबह 11 से दोपहर तीन बजे तक मतदान कराया जाएगा और दोपहर तीन बजे के बाद मतगणना कराई जाएगी। तुरंत बाद परिणाम घोषित कर दिया जाएगा।
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अविश्वास प्रस्ताव में जो लड़ाई बसपा बनाम अन्य दल हो गई थी, उसके इस बार त्रिकोणीय होने की सुगबुगाहट महसूस हो रही है। सत्ताधारी भाजपा में भी अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज होने का मोह जाग गया है, जबकि अविश्वास प्रस्ताव की लड़ाई में भाजपा समर्थित सदस्यों ने सपा और रालोद का साथ दिया था। भाजपाई दिग्गज करीब दो दशक बाद जिला पंचायत में अपना नुमाइंदा बिठाने की हर मुमकिन कोशिश में जुट गए हैं। रात-दिन इसके लिए रणनीति बन रही है। ऐसे में इस पद के लिए अब सपा और रालोद के महारथियों का दावा कमजोर पड़ सकता है या फिर उन्हें बसपा को मात देने की खातिर भाजपा की शर्तें मानने को मजबूर होना पड़ सकता है मगर इसकी गुंजाइश कम ही लग रही है।
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सूबे की सियासी की धुर विरोधी भाजपा और सपा शायद ही जिले की सबसे बड़ी पंचायत के इस बेहद अहम चुनाव में एक-दूसरे को जीत दिलाना चाहेंगी। वैसे भी अब खुद भाजपा नेतृत्व ने उन पंचायतों में अपने नुमाइंदे बिठाने की कमान संभाल ली है, जहां अब तक विरोधी राज कर रहे हैं। ऐसे में सपा और रालोद सदस्यों के सामने इस लड़ाई में पीछे हटने या फिर भाजपा का साथ देने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं रह जाएगा। भाजपा की मजबूरी यह भी है कि वह जिले के इस सबसे बड़े पद पर अपनी धुर विरोधी पार्टी के किसी नुमाइंदे को नहीं बिठा सकती और न हीं पार्टी नेतृत्व इसके लिए राजी होगा।
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जिस सपा और रालोद की मदद से बसपा के जिला पंचायत अध्यक्ष को कुर्सी से हटाया गया है, अब उनके ही खेमों में ही सेंधमारी की कोशिश सत्तापक्ष की तरफ से चल रही हैं। उनके सदस्यों को अब भाजपा अपने साथ खड़ा करने के लिए पूरा जोर लगा रही है। इधर, विपक्षी एकता में फूट पड़ती देख बसपा को भी अब दोबारा काबिज होने की राह आसान दिख रही है। बसपाई दिग्गजों ने अब फिर से अपने सदस्यों को साधना शुरू कर दिया है। ज्यादातर सदस्यों को बसपाई दिग्गजों ने अंडरग्राउंड कर दिया है। दूसरी ओर रालोद और सपा के दिग्गज अपना दावा कमजोर नहीं होने देेना चाहते। इस सियासी मुकाबले में जीत किसकी झोली में जाएगी, इसका सबको बेसब्री से इंतजार है।
ये रहेगा अध्यक्ष चुनाव का कार्यक्रम
हाथरस। राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला पंचायत के उपचुनाव का जो कार्यक्रम तय किया है, उसके मुताबिक 17 जुलाई को सुबह 11 से दोपहर तीन बजे तक नामांकन होंगे। इसी दिन दोपहर तीन बजे से नामांकनों की जांच होगी। 20 जुलाई को सुबह 11 से दोपहर तीन बजे तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे। 23 जुलाई को सुबह 11 से दोपहर तीन बजे तक मतदान कराया जाएगा और दोपहर तीन बजे के बाद मतगणना कराई जाएगी। तुरंत बाद परिणाम घोषित कर दिया जाएगा।