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Hathras News: यमुना का जलस्तर घटा, गंगा में स्थिति बरकरार
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हजियापुर क्षेत्र के गांव सलेमापुर में मूसलाधार बारिश के कारण डूबी कपास की फसल। संवाद
- फोटो : samvad
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टप्पल इलाके में यमुना के जलस्तर से बुधवार को गिरावट दर्ज की गई। जबकि गंगा में जलस्तर लगातार स्थिर बना हुआ है। प्रशासन दोनों नदियों के जलस्तर पर बाढ़ चौकियों से पूरी निगरानी रख रहा है। हालांकि यमुना में पिछले दिनों बाढ़ का पानी महाराजगढ़, किशनगढ़, पखोदना, नगला अमर सिंह आदि में घुस जाने और संपर्क मार्ग के टूट जाने से ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
यमुना किनारे बसे गांवों में पानी घुस जाने से ग्रामीण गांव छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं। संपर्क मार्ग टूट जाने से ग्रामीण निजी एवं सरकारी नाव की मदद से आवागमन कर रहे हैं। इससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर पशुओं के चारे की समस्या का संकट एवं पशुओं के बीमारी की चपेट आने से उन्हें परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। बाढ़ के चलते गांवों में लोग खांसी, जुकाम, बुखार आदि मौसमी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
यमुना में पिछले कई दिनों से जल स्तर में बढ़ोत्तरी हो रही है। पानी खतरे के निशान के आस-पास बह रहा था। गांव के अंदर तक घुस जाने एवं सड़क के कट जाने से ग्रामीणों का संपर्क टूटा हुआ है। एडीएम वित्त एवं राजस्व मीनू राणा ने बताया कि टप्पल में यमुना का जलस्तर में मामूली कमी दर्ज की गई है। अब दिल्ली के ओखला बैराज से 44934 क्यूसैक पानी छोड़ा गया है जिससे जलस्तर 198.15 मीटर पर पहुंच गया है। जबकि खतरे का निशान 200.60 मीटर पर है। इधर, गंगा में भी पानी खतरे के निशान के आस-पास है।
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यहां नरौरा बैराज से कुल 118577 क्यूसैक पानी छोड़ा गया है। जिससे जलस्तर खतरे के निशान 178.765 मीटर के सापेक्ष 178.06 मीटर पानी बह रहा है। उन्होंने बताया कि टप्पल में ग्रामीणों को प्रशासन की ओर से राहत सामग्री का वितरण किया जा रहा है। कुछ सामाजिक संस्थाएं भी इस मदद के कार्य में आगे आ रही हैं। उन्होंने बताया कि हालात सामान्य होने पर खेतों में बर्बाद हुई फसलों एवं मकानों में हुए नुकसान का सर्वे कराया जाएगा, ताकि नुकसान का मुआवजा देकर उसकी भरपायी की जा सके।
जिले में कहीं भी नुकसान की खबर नहीं
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व मीनू राणा ने बताया है कि बुधवार को हुई जोरदार बारिश से जिले भर में कहीं भी किसी मकान के गिरने अथवा दैवीय आपदा के तहत किसी प्रकार के नुकसान की कोई खबर नहीं है। यमुना में जलस्तर लगातार कम हो रहा है, जबकि गंगा का जलस्तर स्थिर बना हुआ है।
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यमुना किनारे बसे गांवों में पानी घुस जाने से ग्रामीण गांव छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं। संपर्क मार्ग टूट जाने से ग्रामीण निजी एवं सरकारी नाव की मदद से आवागमन कर रहे हैं। इससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर पशुओं के चारे की समस्या का संकट एवं पशुओं के बीमारी की चपेट आने से उन्हें परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। बाढ़ के चलते गांवों में लोग खांसी, जुकाम, बुखार आदि मौसमी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
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यमुना में पिछले कई दिनों से जल स्तर में बढ़ोत्तरी हो रही है। पानी खतरे के निशान के आस-पास बह रहा था। गांव के अंदर तक घुस जाने एवं सड़क के कट जाने से ग्रामीणों का संपर्क टूटा हुआ है। एडीएम वित्त एवं राजस्व मीनू राणा ने बताया कि टप्पल में यमुना का जलस्तर में मामूली कमी दर्ज की गई है। अब दिल्ली के ओखला बैराज से 44934 क्यूसैक पानी छोड़ा गया है जिससे जलस्तर 198.15 मीटर पर पहुंच गया है। जबकि खतरे का निशान 200.60 मीटर पर है। इधर, गंगा में भी पानी खतरे के निशान के आस-पास है।
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यहां नरौरा बैराज से कुल 118577 क्यूसैक पानी छोड़ा गया है। जिससे जलस्तर खतरे के निशान 178.765 मीटर के सापेक्ष 178.06 मीटर पानी बह रहा है। उन्होंने बताया कि टप्पल में ग्रामीणों को प्रशासन की ओर से राहत सामग्री का वितरण किया जा रहा है। कुछ सामाजिक संस्थाएं भी इस मदद के कार्य में आगे आ रही हैं। उन्होंने बताया कि हालात सामान्य होने पर खेतों में बर्बाद हुई फसलों एवं मकानों में हुए नुकसान का सर्वे कराया जाएगा, ताकि नुकसान का मुआवजा देकर उसकी भरपायी की जा सके।
जिले में कहीं भी नुकसान की खबर नहीं
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व मीनू राणा ने बताया है कि बुधवार को हुई जोरदार बारिश से जिले भर में कहीं भी किसी मकान के गिरने अथवा दैवीय आपदा के तहत किसी प्रकार के नुकसान की कोई खबर नहीं है। यमुना में जलस्तर लगातार कम हो रहा है, जबकि गंगा का जलस्तर स्थिर बना हुआ है।