हाथरस: गांव में हुई लंपी की एंट्री, 13 गोवंश में पुष्टि जिनका चल रहा इलाज, डरे हुए हैं पशुपालक
पशुपालकों का कहना है कि लंपी की चपेट में आने से दुधारू गायों का दूध उत्पादन तेजी से घट रहा है। निजी पशु चिकित्सकों से उपचार कराने से आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। कुछ स्थानों पर पशुओं की मौत भी हो चुकी है हालांकि, सरकारी स्तर पर इसकी पुष्टि नहीं है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में गोवंश में लंपी स्किन डिजीज के मामले सामने आने से पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। पशु चिकित्सा विभाग ने हाथरस जिले में 13 गोवंश में लंपी वायरस की पुष्टि की है। सादाबाद, बिसावर, सिकंदराराऊ, मुरसान और सासनी क्षेत्र के कई गांवों में पशुओं में बीमारी के लक्षण सामने आने से पशुपालक सहमे हुए हैं।
पशुपालकों का कहना है कि लंपी की चपेट में आने से दुधारू गायों का दूध उत्पादन तेजी से घट रहा है। निजी पशु चिकित्सकों से उपचार कराने से आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। कुछ स्थानों पर पशुओं की मौत भी हो चुकी है हालांकि, सरकारी स्तर पर इसकी पुष्टि नहीं है।
लंपी से प्रभावित पशुओं की निगरानी की जा रही है। सादाबाद क्षेत्र में 13 केसों की पुष्टि हुई है जिनका इलाज चल रहा है। जिले में अन्य क्षेत्रों में भी टीमें पशुओं का वैक्सीनेशन कर रही हैं।-डॉ. विजय सिंह यादव, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी।
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आठ से अधिक गांवों में फैला लंपी वायरस
सादाबाद क्षेत्र के एदलपुर, वेदई, बिसावर, ऊंचागांव, रसमई, नौगांव, मांगरू, कुरसंडा समेत कई गांवों में लंपी वायरस फैल रहा है। एदलपुर में प्रशासक धर्मपाल सिंह, महावीर सिंह, श्यामवीर सिंह, जोगेंद्र सिंह, सत्यपाल सिंह, मोहन श्याम और हरवीर सिंह के पशु बीमार हैं। धर्मपाल सिंह का कहना है कि पशुओं का लगातार उपचार कराने के बावजूद बीमारी काबू में नहीं आ रही है। विधिपुर गांव में भी वीरेंद्र सिंह, सोनू, हरवीर सिंह, चंद्रपाल सिंह और दीवान सिंह के पशुओं में लंपी के लक्षण बताए गए हैं।
बिसावर क्षेत्र की ग्राम पंचायत कजरौठी के पोदा और गिजरौला गांव में भी पशुपालक परेशान हैं। पोदा निवासी मुकेश सिंह की दुधारू गाय लंपी की चपेट में आने के बाद दूध देना लगभग बंद कर चुकी है। भूपेंद्र सिंह ने बताया कि निजी चिकित्सकों से महंगा इलाज कराने के बाद भी पशुओं की हालत में सुधार नहीं हो रहा है। कजरौठी निवासी बलवीर सिंह और गिजरौला निवासी राकेश सिंह की भी एक-एक गाय की मौत हो चुकी है जबकि एक मरणासन्न अवस्था में है।
मुरसान में भी पशु बीमारी
मुरसान क्षेत्र के भकरोई गांव में भूरा, सौरभ, चंद्रभान और शिवराज समेत अन्य ग्रामीणों की गायों में लंपी के लक्षण बताए जा रहे हैं। करील गांव की गोशाला में भी करीब पांच गोवंश के बीमारी की चपेट में आने की जानकारी सामने आई है। फरसौटी गांव में मोहित कुमार के भाई की गाय भी संक्रमित है। पशुपालकों ने गांव-गांव जांच, उपचार और टीकाकरण कराने की मांग की है।
सासनी में एक केस, चल रहा उपचार
सासनी क्षेत्र के बिजाहरी गांव के बिजलीघर में मीना देवी की गाय में लंपी बीमारी का मामला सामने आया है। गाय का पशु चिकित्सालय में उपचार चल रहा है। पशुपालक के अनुसार बीमारी से पहले गाय करीब छह लीटर दूध देती थी लेकिन अब दूध देना बंद कर दिया है। शरीर पर बड़े-बड़े फफोले और गांठें हो गई हैं। इसे दूसरे पशुओं से अलग रखा गया है।
पराग डेयरी ने गाय के दूध की खरीद पर लगाई रोक
पशु चिकित्सक डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि गांवों और गोशालाओं में पहले ही टीकाकरण कराया जा चुका है। लंपी बीमारी को देखते हुए पराग डेयरी में गायों का दूध लेने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। पशु चिकित्सक पराग डेयरी की गोशाला में सभी गाय स्वस्थ होने का दावा कर रहे हैं।
सिकंदराराऊ में दो मामले, 90 फीसदी टीकाकरण
सिकंदराराऊ के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. कैसी लोधी ने बताया कि पुरदिलनगर में पशुओं में लंपी वायरस के दो मामले सामने आए थे, जिन्हें समय रहते नियंत्रित कर लिया गया। क्षेत्र में करीब 90 फीसदी पशुओं का लंपी वैक्सीनेशन हो चुका है। शेष पशुओं का टीकाकरण भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि सिकंदराराऊ तहसील में पुरदिलनगर के अलावा फिलहाल लंपी बीमारी का कोई अन्य मामला प्रकाश में नहीं आया है।
संक्रमित पशु को अलग रखने की सलाह
पशु चिकित्सकों ने पशु पालकों को सलाह दी है कि वे बीमारी के संदिग्ध या संक्रमित पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें। लंपी बीमारी मक्खी, मच्छर और किलनी जैसे कीटों के माध्यम से फैल सकती है, इसलिए पशुशाला के आसपास साफ-सफाई रखना और गंदा पानी जमा नहीं होने देना जरूरी है। पशुओं में लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क कर उपचार और टीकाकरण कराएं।
लंपी स्किन डिजीज के प्रमुख लक्षण
- तेज बुखार : संक्रमित पशु को अचानक तेज बुखार आता है।
- त्वचा पर गांठें : शरीर पर कठोर गांठें या उभरे हुए घाव बन जाते हैं।
- भूख व खुराक में कमी : पशु खाना-पीना कम कर देता है।
- शारीरिक कमजोरी : बीमारी के कारण पशु में अत्यधिक सुस्ती और कमजोरी आ जाती है।
- पानी बहना : पशु के आंख और नाक से लगातार पानी बहने लगता है।
- दूध उत्पादन में गिरावट : दुधारू पशुओं के दूध उत्पादन में कमी आ जाती है।