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हाथों में रचाई मेंहदी, पति की दीर्घायु की कामना की
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हरियाली तीज पर घर में पूजा करती महिलाएं।
- फोटो : HATHRAS
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
सावन माह में हरियाली तीज का पर्व बृहस्पतिवार को उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। महिलाओं ने घर-घर मां पार्वती और भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की और पति की दीर्घायु की कामना की। महिलाओं ने इस मौके पर पकवान बनाए। कोरोना काल के चलते इस बार सार्वजकिन आयोजन नहीं हुए। न हीं जगह जगह पेड़ों की डाल पर झूले व मल्हारो की गूंज सुनाई दी।
हरियाली तीज पर्व को लेकर बृहस्पतिवार की सुबह से घरों में तैयारियां शुरू हो गई थीं। सुहागिन महिलाओं ने सोलह शृंगार किए। हरे रंगे परिधान पहने। चूड़ियां पहनकर मिट्टी से गौर की प्रतिमाएं बनाईं, फिर मनोयोग से माता गौरी और देवाधिदेव महादेव का पूजन हल्दी, चावल और अन्य सामग्री से किया। भोग लगाने के साथ आरती उतारी गई। शाम को गौरी मैया को झूला झुलाया गया। सुहागिनों ने अपने पति की दीर्घायु की कामना की। शाम को घरों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए गीत और मल्हारों का आयोजन किया। शाम को काफी परिवारों ने शहर के रेस्टोरेंट में व्यंजनों का लुत्फ उठाया। कोरोना काल के चलते इस बार किला परिसर में मेले का आयोजन नहीं किया गया। शहर से देहात तक जगह-जगह झूले भी नहीं डाले गए।
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सावन माह में हरियाली तीज का पर्व बृहस्पतिवार को उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। महिलाओं ने घर-घर मां पार्वती और भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की और पति की दीर्घायु की कामना की। महिलाओं ने इस मौके पर पकवान बनाए। कोरोना काल के चलते इस बार सार्वजकिन आयोजन नहीं हुए। न हीं जगह जगह पेड़ों की डाल पर झूले व मल्हारो की गूंज सुनाई दी।
हरियाली तीज पर्व को लेकर बृहस्पतिवार की सुबह से घरों में तैयारियां शुरू हो गई थीं। सुहागिन महिलाओं ने सोलह शृंगार किए। हरे रंगे परिधान पहने। चूड़ियां पहनकर मिट्टी से गौर की प्रतिमाएं बनाईं, फिर मनोयोग से माता गौरी और देवाधिदेव महादेव का पूजन हल्दी, चावल और अन्य सामग्री से किया। भोग लगाने के साथ आरती उतारी गई। शाम को गौरी मैया को झूला झुलाया गया। सुहागिनों ने अपने पति की दीर्घायु की कामना की। शाम को घरों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए गीत और मल्हारों का आयोजन किया। शाम को काफी परिवारों ने शहर के रेस्टोरेंट में व्यंजनों का लुत्फ उठाया। कोरोना काल के चलते इस बार किला परिसर में मेले का आयोजन नहीं किया गया। शहर से देहात तक जगह-जगह झूले भी नहीं डाले गए।

हरियाली तीज पर झूला झूलती महिलाएं। - फोटो : HATHRAS
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