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Hathras News: चौका-चूल्हे के साथ उद्योग-व्यापार हिसाब संभाल रहीं महिलाएं

Mon, 14 Jul 2025 01:10 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस Updated Mon, 14 Jul 2025 01:10 AM IST
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Women are handling business accounts along with cooking and cooking
चार्टर्ड अकाउंटेंसी आज देश की 10 शीर्ष कठिन परीक्षाओं में से एक है। एक समय था, जब चार्टर्ड अकाउंटेंसी में सिर्फ युवक ही कॅरिअर देखा करते थे, लेकिन अब युवतियां भी इस क्षेत्र में अपना कॅरिअर बना रही हैं। हाथरस जैसे छोटे शहर में भी महिला सीए अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं।
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पिछले करीब 20 सालों में चार्टर्ड अकाउंटेंसी के क्षेत्र में बड़ा अंतर आया है। जहां एक ओर इसकी कार्यशैली बदली है, वहीं इसे कॅरिअर के रूप में अपनाने में महिलाएं भी आगे आ रही हैं। वर्ष 2005 में करीब 10 फीसदी ही महिलाएं चार्टर्ड अकाउंटेंसी के क्षेत्र में थीं, जिनकी हिस्सेदारी आज 30 फीसदी से अधिक है।
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अब सिर्फ चौका-चूल्हा नहीं, बल्कि उद्योग-व्यापार का हिसाब-किताब रखने में महिलाएं अपनी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ा रही हैं। हाल ही में आए सीए फाउंडेशन के परिणाम में जिले की करीब 12 युवतियों ने सफलता हासिल की है, जबकि युवकों की संख्या करीब 25 है। प्रैक्टिस करने वाली सीए महिलाएं भी बेबाक तरीके से अपने कॅरिअर को नए आयामों तक पहुंचा रही हैं।
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सामाजिक सुरक्षा व ऑनलाइन कोचिंग दे रही बड़ी राहत

चार्टर्ड अकाउंटेंसी के क्षेत्र में ऑनलाइन कोचिंग से भी बड़ा बदलाव आया है। एक समय था, जब इंटर करने के बाद सीए की कोचिंग के लिए बेटी को बाहर भेज पाना अभिभावकों के लिए मुश्किल होता था, लेकिन अब ऑनलाइन कोचिंग ने इस मुश्किल को आसान कर दिया है। बेटियों की सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदम भी सीए के क्षेत्र में बेटियों की बढ़ती हिस्सेदारी का एक कारण है।


हमारे समय में चार्टर्ड अकाउंटेंसी के लिए कुछ दिक्कतें होती थीं। उस समय फील्ड में काम कराने पर अभिभावक हिचकते थे। सीए के बजाय सीएस पर लड़कियां अधिक ध्यान देती थीं, लेकिन समय के साथ बहुत कुछ बदला है। बेटियां अपने कॅरिअर के चुनाव के लिए स्वतंत्र हैं, सुविधा व सुरक्षा दोनों ही पहले से बेहतर हैं, जिससे अभिभावकों की सोच बदली है। -पूनम अग्रवाल, चार्टर्ड अकाउंटेंट।

मेरा मानना है कि हम महिलाएं घर और ऑफिस दोनों को संतुलित तरीके से संभाल सकती हैं। सुबह बच्चों को स्कूल भेजना, घर के काम निपटाना और फिर ऑफिस की मीटिंग्स में हिस्सा लेना, यह सब मेरे लिए नया नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि परिवार और समाज हमें सहयोग दें, हमें समझें और हमारे योगदान को पहचानें, क्योंकि एक सशक्त महिला केवल अपने घर को ही नहीं, पूरे समाज को आगे बढ़ाती है।
-रिचा अग्रवाल, चार्टर्ड अकाउंटेंट।






एक महिला सिर्फ अपने परिवार की रीढ़ नहीं होती है, वह एक प्रगतिशील राष्ट्र के पीछे की बढ़ती हुई शक्ति भी है। वह परिवार और सफलता में से किसी एक को नहीं चुनती, बल्कि ऐसा रास्ता बनाती है, जहां दोनों साथ-साथ चलते हैं। जब एक महिला आगे बढ़ती है तो परिवार समृद्ध होता है। जब एक महिला नेतृत्व करती है तो राष्ट्र बदल जाता है। महिलाओं के प्रति सोच बदलने की जरूरत है।

-तान्या जैन, चार्टर्ड अकाउंटेंट।

हम आज की बेटियां हैं, जो अपने आप पर पूरा भरोसा करती हैं। यही भरोसा है, जिसने हमें सफलता दिलाई। पिछले कुछ समय में बदले माहौल ने माता-पिता की सोच को बदला है। आज माता-पिता अपने आशीर्वाद के साथ अपना भरोसा भी बेटियों को देते हैं। मैं अपनी जैसे सभी बेटियों को कहना चाहूंगी कि सफलता अगर ठान ली जाए तो अवश्य मिलती है। खुद के व माता-पिता के भरोसे को हमेशा मजबूत करें।
-यशिका अग्रवाल, चार्टर्ड अकाउंटेंट।
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