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सफेद हाथी बनी बोर्न केयर यूनिट
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस।
Updated Sun, 13 Aug 2017 12:01 AM IST
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सफेद हाथी बनी बोर्न केयर यूनिट
- फोटो : Amar Ujala
गोरखपुर की तरह ही मासूमों को उपचार देने के मामले में जिले की स्वास्थ्य सेवाएं भी बदहाल हैं। करीब दो माह पहले जिला महिला अस्पताल में एसएनसीयू (सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट) का शुभारंभ किया गया, लेकिन आज तक इस यूनिट का लाभ मासूम बच्चों को नहीं मिल पाया है। आज भी यह यूनिट बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती के लिए तरस रही है।
नवजात बच्चों पर जन्म के बाद बीमारियों का हमला होने की शिकायतें आम होती जा रही हैं। बच्चे को कहीं पीलिया तो नहीं हो गया, वजन कम तो नहीं रह गया या कोई और परेशानी तो नहीं आ गई। इन समस्याओं के निपटारे और शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए करीब दो साल पहले राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत जिला अस्पताल में नवजात बच्चों की देखभाल करने के लिए सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट की स्थापना के लिए 32 लाख रुपये की स्वीकृति शासन ने दी थी।
जिला महिला अस्पताल के पुराने लेबर रूम में यूनिट का वार्ड बनाकर तैयार कर दिया गया और आधुनिक मशीनें भी लगा दी गईं, लेकिन महकमा दो साल बाद भी इस यूनिट को संचालित नहीं कर पाया है। इस यूनिट को संचालित करने के लिए महकमे को तीन बाल रोग विशेषज्ञ और आठ संविदा नर्स चाहिए, जो कि हर समय बच्चे की देखभाल और साफ सफाई पर ध्यान दे सकें, लेकिन आठ संविदा नर्स की नियुक्ति तो हो गई, लेकिन महकमे को आज तक बाल रोग विशेषज्ञ नहीं मिल पाया है, जिस कारण बच्चों को इस यूनिट का लाभ आज तक नहीं मिल सका है।
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नवजात बच्चों पर जन्म के बाद बीमारियों का हमला होने की शिकायतें आम होती जा रही हैं। बच्चे को कहीं पीलिया तो नहीं हो गया, वजन कम तो नहीं रह गया या कोई और परेशानी तो नहीं आ गई। इन समस्याओं के निपटारे और शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए करीब दो साल पहले राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत जिला अस्पताल में नवजात बच्चों की देखभाल करने के लिए सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट की स्थापना के लिए 32 लाख रुपये की स्वीकृति शासन ने दी थी।
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जिला महिला अस्पताल के पुराने लेबर रूम में यूनिट का वार्ड बनाकर तैयार कर दिया गया और आधुनिक मशीनें भी लगा दी गईं, लेकिन महकमा दो साल बाद भी इस यूनिट को संचालित नहीं कर पाया है। इस यूनिट को संचालित करने के लिए महकमे को तीन बाल रोग विशेषज्ञ और आठ संविदा नर्स चाहिए, जो कि हर समय बच्चे की देखभाल और साफ सफाई पर ध्यान दे सकें, लेकिन आठ संविदा नर्स की नियुक्ति तो हो गई, लेकिन महकमे को आज तक बाल रोग विशेषज्ञ नहीं मिल पाया है, जिस कारण बच्चों को इस यूनिट का लाभ आज तक नहीं मिल सका है।
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