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Hathras News: हिसाब की पक्की ‘गृह-लक्ष्मी’ से समझिए महंगाई का असर रसोई का बजट बढ़ा तो अपनी इच्छाएं हुईं छोटी

Mon, 24 Aug 2026 02:08 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस Updated Mon, 24 Aug 2026 02:08 AM IST
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When the kitchen budget increased, our desires became smaller.
रसोई में खाना तैयार करतीं शहर के हरिओम एन्क्लेव निवासी प्रतिभा शर्मा। संवाद - फोटो : Samvad
विनीत चौरसिया
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हाथरस। पिछले साल तक महीने का राशन 9,500 रुपये में आ जाता था। अब वही सामान खरीदने में 12,800 रुपये खर्च हो रहे हैं। हरिओम एंक्लेव निवासी प्रतिभा शर्मा की यह बात बढ़ती महंगाई के बीच मध्यमवर्गीय परिवारों की रसोई का बदलता हिसाब बता रही है। एक साल में राशन पर 3,300 रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ा तो प्रतिभा ने बच्चों की गैर-जरूरी खरीदारी और परिवार के दूसरे खर्चों में कटौती शुरू कर दी। उनका कहना है कि महंगाई पर उनका जोर नहीं है, लेकिन घर के अंदर उसका प्रभाव कम से कम करना उनके वश में है। इसलिए वे पहले बाहर खाने या अपनी जरूरत की चीजों पर खुलकर खर्च कर लेते थे। अब अपनी इच्छाओं और सुविधाओं पर खर्च सबसे पहले रोक रहे हैं। त्योहारों से पहले रसोई की खपत बढ़ने वाली है, ऐसे में महीने का बजट संभालना और चुनौती बन गया है।
इसी तरह गुड़हाई बाजार निवासी डिंपल वार्ष्णेय ने बताया कि साल भर में उनके यहां रसोई का खर्च 11 हजार से बढ़कर 14,200 रुपये तक पहुंच गया है। इसमें चीनी, रिफाइंड तेल, तीन तरह की दाल, मसाले और चायपत्ती शामिल नहीं है। उनके परिवार में कुल आठ सदस्य हैं जो आमतौर पर घूमने फिरने या बाहरी खानपान से बचते हैं लेकिन कई बार फिल्म देखने या कपड़ों के लिए अलीगढ़ और आगरा जरूर जाते हैं। अब पिछले नौ महीने से यह परिवार बाहर नहीं गया है। घर पर वाईफाई भी हटा दिया है और ओटीटी सब्सक्रिप्शन भी बंद कर दिए। इससे इन्हें प्रति माह चार हजार रुपये की बचत हो रही है। संवाद
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रसोई का बढ़ा खर्च, दूसरे बजट पर कैंची
पिछले कुछ महीनों में खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने से रसोई का खर्च बढ़ा है। हाथरस के थोक कारोबारियों के मुताबिक, चीनी 45 से बढ़कर 65 रुपये किलो, बासमती चावल 85 से 115 रुपये और धनिया साबुत 140 से 240 रुपये किलो पहुंच गया है। समा के चावल 160 से 240 रुपये किलो हो गए हैं। आटा, तेल, दाल, मसाले और चायपत्ती के दाम भी बढ़े हैं।
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इनमें चीनी की कीमत करीब 44 प्रतिशत, धनिया साबुत की 71 प्रतिशत, समा के चावल की 50 प्रतिशत और बासमती चावल की करीब 35 प्रतिशत बढ़ी है। मसूर दाल का भाव 80 रुपये किलो पर स्थिर है। कारोबारियों के अनुसार, खाद्य वस्तुओं की कीमत बढ़ने के मुकाबले परिवारों की आय में बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। ऐसे में लोग दूसरे खर्चों में कटौती कर बढ़े राशन खर्च को संभाल रहे हैं।

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प्रतिभा, डिंपल ऐसे निकाल रहीं अतिरिक्त खर्च : बच्चों की ऐच्छिक खरीदारी में कटौती। बाहर खाने/मनोरंजन में कटौती। अधिकांश खाद्य पदार्थों की मात्रा और कंपनी बदली। घर में ओटीटी सब्सक्रिप्शन और वाईफाई को हटा दिया।
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