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अब नहीं चलेगी वार्डनों की मनमानी
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस।
Updated Sun, 10 Sep 2017 11:36 PM IST
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छात्राएं
- फोटो : File Photo
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कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों की वार्डनों की मनमानी अब नहीं चलेगी। वार्डनों को मिलने वाले आकस्मिक खर्च के खाते में 25 हजार रुपये में अब विद्यालय के एकाउंटेंट के साथ संयुक्त खाता होगा। इसके साथ ही अब विद्यालयों में छात्राओं की उपस्थिति के आधार पर खाद्यान का पैसा दिया जाएगा। अब तक पंजीकरण के हिसाब से पैसा खर्च कर रही थी वार्डन।
जिले में संचालित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों के मनमाने खर्चे पर अब लगाम लगेगी। अब तक इन विद्यालयों की वार्डनों को विभाग की ओर से 25 हजार रुपये एडवांस दिया जाता था। इस एडवांस के खाते का संचालन सिर्फ वार्डन के नाम से होता था। जिससे वार्डनों द्वारा इस पैसे का उपयोग मनमाने तरीके से किया जा रहा था। इन स्कूलों में छात्राओं के खाद्यान की आपूर्ति के लिए विभाग एजेंसियों का चयन वर्ष भर के लिए करता हैं। जिससे उक्त फर्म संचालक द्वारा पूर्व में भेजी गई डिमांड के आधार पर आपूर्ति कराई जाती है।
लेकिन वार्डन पहले से आवश्यकता न बताकर इस धनराशि का उपयोग मनमाने तरीके से करने के लिए ऐसे समय में आवश्यकता बताती है।
जब विभाग की ओर से सामान की आपूर्ति न हो सके और उक्त धनराशि में से वह अपनी मनमाने तरीके से सामाधन की खरीद के नाम पर उपयोग कर सके। जिससे अधिकारियों को मजबूरी में छात्राओं की परेशानियों को देखते हुए उक्त सामान को खरीदने की अनुमति देनी पड़ती थी। अधिकारियों की इस कमजोरी का वार्डन लगातार लाभ उठा रही थी। जबकि देखा जा रहा था कि वार्डन लगातार छात्राओं की उपस्थिति के आधार पर विद्यालयों की खाद्यान आपूर्ति का उपयोग दिखाकर इसका लगातार दुरुपयोग कर रही थी।
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इससे निपटने के लिए एसएसए के एओ रामवीर सिंह ने इस पर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए अब इन छात्राओं की उपस्थिति प्रतिदिन डीसी बालिका शिक्षा को भेजने एवं इस उपस्थिति के आधार पर ही खाद्यान की आपूर्ति करने का निर्णय लिया है। जिससे इस पैसे का दुरुपयोग रोका जा सके।
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जिले में संचालित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों के मनमाने खर्चे पर अब लगाम लगेगी। अब तक इन विद्यालयों की वार्डनों को विभाग की ओर से 25 हजार रुपये एडवांस दिया जाता था। इस एडवांस के खाते का संचालन सिर्फ वार्डन के नाम से होता था। जिससे वार्डनों द्वारा इस पैसे का उपयोग मनमाने तरीके से किया जा रहा था। इन स्कूलों में छात्राओं के खाद्यान की आपूर्ति के लिए विभाग एजेंसियों का चयन वर्ष भर के लिए करता हैं। जिससे उक्त फर्म संचालक द्वारा पूर्व में भेजी गई डिमांड के आधार पर आपूर्ति कराई जाती है।
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लेकिन वार्डन पहले से आवश्यकता न बताकर इस धनराशि का उपयोग मनमाने तरीके से करने के लिए ऐसे समय में आवश्यकता बताती है।
जब विभाग की ओर से सामान की आपूर्ति न हो सके और उक्त धनराशि में से वह अपनी मनमाने तरीके से सामाधन की खरीद के नाम पर उपयोग कर सके। जिससे अधिकारियों को मजबूरी में छात्राओं की परेशानियों को देखते हुए उक्त सामान को खरीदने की अनुमति देनी पड़ती थी। अधिकारियों की इस कमजोरी का वार्डन लगातार लाभ उठा रही थी। जबकि देखा जा रहा था कि वार्डन लगातार छात्राओं की उपस्थिति के आधार पर विद्यालयों की खाद्यान आपूर्ति का उपयोग दिखाकर इसका लगातार दुरुपयोग कर रही थी।
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इससे निपटने के लिए एसएसए के एओ रामवीर सिंह ने इस पर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए अब इन छात्राओं की उपस्थिति प्रतिदिन डीसी बालिका शिक्षा को भेजने एवं इस उपस्थिति के आधार पर ही खाद्यान की आपूर्ति करने का निर्णय लिया है। जिससे इस पैसे का दुरुपयोग रोका जा सके।