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Hathras News: हाथरस वालों के लिए ठहरा वक्त, छह माह से बंद घंटाघर की घड़ी
Sat, 26 Jul 2025 01:16 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Sat, 26 Jul 2025 01:16 AM IST
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शहर के घंटाघर की बंद पड़ी घड़ी। संवाद
- फोटो : samvad
हाथरस वालों के लिए वक्त मानो ठहर गया है। करीब चार साल पहले शहर के घंटाघर का 88 लाख रुपये से जीर्णोद्धार किया गया था। राजस्थान और गुजरात के विशेष पत्थर से इसे सजाया गया, लेकिन पिछले छह महीनों से बंद पड़ी घड़ी इस खूबसूरत इमारत की शान को बट्टा लगा रही है।
घंटाघर की नई इमारत में रात में चमकने वाली आधुनिक घड़ी लगवाई गई थी। शुरुआत में इस घड़ी में हर एक घंटे बाद घंटा बजता था और घंटाघर पर लगे लाउडस्पीकर के जरिये शहरवासियों को समय बताया जाता था। शहरवासियों को नगर पालिका का यह कदम खूब भाया था। महीनों तक इसकी चर्चा भी रही थी, लेकिन पिछले करीब छह महीने से यह घड़ी शांत पड़ी है।
समय चाहे कोई भी हो, यह घड़ी एक बजे का ही समय दर्शाती है। हर घंटे बजने वाले घंटे की आवाज भी अब सुनाई नहीं दे रही। स्थानीय लोगों की ओर से घड़ी को सही कराने के लिए कई बार नगर पालिका प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
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खास मौकों पर सजता है घंटाघर नगर पालिका की ओर से 15 अगस्त, 26 जनवरी और दिवाली जैसे खास मौकों पर घंटाघर की इमारत की सजावट कराई जाती है, लेकिन इसकी घड़ियों को चालू कराने की अभी तक नगर पालिका प्रशासन ने जरूरत नहीं समझी है।
भजनों की आवाज भी हुई शांत
घंटाघर का जीर्णोद्धार होने के बाद यहां सुबह-शाम भजन सुनाई देते थे। सुबह पांच बजे से मंगला आरती, सात बजे सुंदरकांड और हनुमान चालीसा सुनाई देती थी। शाम के समय भजन गूंजते थे। इनकी आवाज शहर में करीब दो किमी तक सुनाई देती थी, लेकिन पिछले करीब दो साल से यह सिलसिला भी बंद है।
पहले कई वर्षों में खराब होती थी घंटाघर की घड़ी
घंटाघर की नई इमारत में लगी घड़ी तो साढ़े तीन साल में ही खराब हो गई, जबकि पहले जो घड़ी लगी थी, वह कई वर्षों में खराब होती थी। आज भी याद है कि हलवाई खाना में सियारामजी घड़ी साज थे, वह इस घड़ी को सही कर देते थे। पुरानी घड़ी में तांबे व पीतल के बड़े-बड़े पुर्जे थे। घंटाघर की इमारत में लगी घड़ी को जल्द चालू कराया जाना चाहिए।
-मदनमोहन अपना वाले, व्यापारी।
अशुभ होता है घड़ी बंद होना
घड़ी का बंद होना निश्चित रूप से अशुभ होता है। सामान्य तौर पर बंद घड़ी को घर में नहीं रखते। अगर रखना भी हो तो उसे उल्टा कर रखते हैं तो उसका प्रभाव नहीं होता। अगर दीवार पर या घंटाघर पर घड़ी बंद है तो वह शहर के लिए हानिकारक है। अगर घड़ी में पैंडूलम है तो वह हिलते रहना चाहिए। शहर के व्यापार और यहां के लोगों के स्वास्थ्य के लिए घंटाघर की घड़ी चालू होनी चाहिए।
-सीपूजी महाराज, धर्माचार्य।
घंटाघर की खास बातें
1947 में तत्कालीन चेयरमैन हीरालाल बर्मन ने कराया था घंटाघर की पुरानी इमारत का निर्माण।
06 रास्तों वाला है हाथरस का घंटाघर।
04 किलोमीटर तक दिखाई देती है घंटाघर की इमारत।
88 लाख रुपये से चार साल पहले हुआ था जीर्णोद्धार।
04 वेदों प्रतीक को घंटाघर के कोनों पर किया गया स्थापित।
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घंटाघर की नई इमारत में रात में चमकने वाली आधुनिक घड़ी लगवाई गई थी। शुरुआत में इस घड़ी में हर एक घंटे बाद घंटा बजता था और घंटाघर पर लगे लाउडस्पीकर के जरिये शहरवासियों को समय बताया जाता था। शहरवासियों को नगर पालिका का यह कदम खूब भाया था। महीनों तक इसकी चर्चा भी रही थी, लेकिन पिछले करीब छह महीने से यह घड़ी शांत पड़ी है।
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समय चाहे कोई भी हो, यह घड़ी एक बजे का ही समय दर्शाती है। हर घंटे बजने वाले घंटे की आवाज भी अब सुनाई नहीं दे रही। स्थानीय लोगों की ओर से घड़ी को सही कराने के लिए कई बार नगर पालिका प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
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खास मौकों पर सजता है घंटाघर नगर पालिका की ओर से 15 अगस्त, 26 जनवरी और दिवाली जैसे खास मौकों पर घंटाघर की इमारत की सजावट कराई जाती है, लेकिन इसकी घड़ियों को चालू कराने की अभी तक नगर पालिका प्रशासन ने जरूरत नहीं समझी है।
भजनों की आवाज भी हुई शांत
घंटाघर का जीर्णोद्धार होने के बाद यहां सुबह-शाम भजन सुनाई देते थे। सुबह पांच बजे से मंगला आरती, सात बजे सुंदरकांड और हनुमान चालीसा सुनाई देती थी। शाम के समय भजन गूंजते थे। इनकी आवाज शहर में करीब दो किमी तक सुनाई देती थी, लेकिन पिछले करीब दो साल से यह सिलसिला भी बंद है।
पहले कई वर्षों में खराब होती थी घंटाघर की घड़ी
घंटाघर की नई इमारत में लगी घड़ी तो साढ़े तीन साल में ही खराब हो गई, जबकि पहले जो घड़ी लगी थी, वह कई वर्षों में खराब होती थी। आज भी याद है कि हलवाई खाना में सियारामजी घड़ी साज थे, वह इस घड़ी को सही कर देते थे। पुरानी घड़ी में तांबे व पीतल के बड़े-बड़े पुर्जे थे। घंटाघर की इमारत में लगी घड़ी को जल्द चालू कराया जाना चाहिए।
-मदनमोहन अपना वाले, व्यापारी।
अशुभ होता है घड़ी बंद होना
घड़ी का बंद होना निश्चित रूप से अशुभ होता है। सामान्य तौर पर बंद घड़ी को घर में नहीं रखते। अगर रखना भी हो तो उसे उल्टा कर रखते हैं तो उसका प्रभाव नहीं होता। अगर दीवार पर या घंटाघर पर घड़ी बंद है तो वह शहर के लिए हानिकारक है। अगर घड़ी में पैंडूलम है तो वह हिलते रहना चाहिए। शहर के व्यापार और यहां के लोगों के स्वास्थ्य के लिए घंटाघर की घड़ी चालू होनी चाहिए।
-सीपूजी महाराज, धर्माचार्य।
घंटाघर की खास बातें
1947 में तत्कालीन चेयरमैन हीरालाल बर्मन ने कराया था घंटाघर की पुरानी इमारत का निर्माण।
06 रास्तों वाला है हाथरस का घंटाघर।
04 किलोमीटर तक दिखाई देती है घंटाघर की इमारत।
88 लाख रुपये से चार साल पहले हुआ था जीर्णोद्धार।
04 वेदों प्रतीक को घंटाघर के कोनों पर किया गया स्थापित।