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मारपीट में तीन को चार साल की कैद
अमर उजाला, हाथरस
Updated Wed, 07 Dec 2016 11:39 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय एसएन त्रिपाठी ने मारपीट एवं एससी/एसटी एक्ट के आठ में से चार आरोपियों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने इनमें से तीन आरोपियों को चार-चार वर्ष के कारावास एवं आठ-आठ हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
वहीं, एक आरोपी की अधिक उम्र होने के कारण उसे परवीक्षा पर छोड़ने का निर्णय लिया है। न्यायालय ने दूसरे पक्ष की तरफ से कराई गई क्रॉस रिपोर्ट के तीनों आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया है। करीब 19 साल बाद इस मामले में न्यायालय का फैसला आया है।
कोतवाली सासनी पुलिस को चरन सिंह निवासी लढ़ौटा ने एक तहरीर दी, जिसमें कहा गया कि 19 सितंबर 1997 को सुबह करीब 10 बजे वह अपने मकान पर बैठा हुआ था। उसी समय उसके विरोधी पक्ष की रामवती पत्नी कीरतराम ने अपने पशुओं का गोबर मकान के सामने डाल दिया।
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इसके लिए उसने मना किया। इस पर पहले से झगड़ा करने की तैयारी में बैठे हरप्रसाद, विनोद, अनिल, कीरतराम, संजू, राजू, रामवती, छीतरमल सभी निवासीगण लढ़ौटा अपने हाथों में लाठी-डंडा, फरसा और फांवड़ा लेकर आ गए।
इन लोगों ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए मारपीट कर उसे बुरी तरह से घायल कर दिया। इसके बाद इन लोगों ने उसके घर में घुसकर उसकी पत्नी माया देवी और लड़की शशीवाला और बीना आदि को खींच-खींचकर बुरी तरह से मारपीट कर घायल कर दिया।
न्यायालय ने सुनवाई के बाद संजू, राजू, छीतरमल और कीरतराम को दोषी माना है। इनमें से तीन आरोपियों को चार-चार साल के कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, कीरतराम की उम्र 80 वर्ष होने के कारण दो वर्ष की उसे सदाचार की परवीक्षा पर छोड़ने का निर्णय दिया, जबकि रामवती, अनिल, विनोद और हरप्रसाद को घटना की परिस्थितियों को देखते हुए दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुनने के बाद सभी धाराओं में दोषमुक्त कर दिया गया।
इस मामले में दूसरे पक्ष की ओर से वादी कुंवरपाल ने न्यायालय के आदेश पर भूरा, माया देवी और सोमवीर पर घर में घुसकर गाली-गलौज करते हुए मारपीट करने का आरोप लगाते हुए सासनी कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने इस मामले में भी जांच के बाद तीनों अभियुक्तों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। अब न्यायालय ने इस मामले में भी सुनवाई करते हुए आरोपों की पुष्टि में साक्ष्य नहीं मिलने तीनों अभियुक्तों को बरी कर दिया है।
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वहीं, एक आरोपी की अधिक उम्र होने के कारण उसे परवीक्षा पर छोड़ने का निर्णय लिया है। न्यायालय ने दूसरे पक्ष की तरफ से कराई गई क्रॉस रिपोर्ट के तीनों आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया है। करीब 19 साल बाद इस मामले में न्यायालय का फैसला आया है।
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कोतवाली सासनी पुलिस को चरन सिंह निवासी लढ़ौटा ने एक तहरीर दी, जिसमें कहा गया कि 19 सितंबर 1997 को सुबह करीब 10 बजे वह अपने मकान पर बैठा हुआ था। उसी समय उसके विरोधी पक्ष की रामवती पत्नी कीरतराम ने अपने पशुओं का गोबर मकान के सामने डाल दिया।
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इसके लिए उसने मना किया। इस पर पहले से झगड़ा करने की तैयारी में बैठे हरप्रसाद, विनोद, अनिल, कीरतराम, संजू, राजू, रामवती, छीतरमल सभी निवासीगण लढ़ौटा अपने हाथों में लाठी-डंडा, फरसा और फांवड़ा लेकर आ गए।
इन लोगों ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए मारपीट कर उसे बुरी तरह से घायल कर दिया। इसके बाद इन लोगों ने उसके घर में घुसकर उसकी पत्नी माया देवी और लड़की शशीवाला और बीना आदि को खींच-खींचकर बुरी तरह से मारपीट कर घायल कर दिया।
न्यायालय ने सुनवाई के बाद संजू, राजू, छीतरमल और कीरतराम को दोषी माना है। इनमें से तीन आरोपियों को चार-चार साल के कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, कीरतराम की उम्र 80 वर्ष होने के कारण दो वर्ष की उसे सदाचार की परवीक्षा पर छोड़ने का निर्णय दिया, जबकि रामवती, अनिल, विनोद और हरप्रसाद को घटना की परिस्थितियों को देखते हुए दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुनने के बाद सभी धाराओं में दोषमुक्त कर दिया गया।
इस मामले में दूसरे पक्ष की ओर से वादी कुंवरपाल ने न्यायालय के आदेश पर भूरा, माया देवी और सोमवीर पर घर में घुसकर गाली-गलौज करते हुए मारपीट करने का आरोप लगाते हुए सासनी कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने इस मामले में भी जांच के बाद तीनों अभियुक्तों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। अब न्यायालय ने इस मामले में भी सुनवाई करते हुए आरोपों की पुष्टि में साक्ष्य नहीं मिलने तीनों अभियुक्तों को बरी कर दिया है।