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जिन्होंने दे दी देश के लिए जान, उनको भूल गए हुक्मरान

Sat, 25 Jul 2020 10:58 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2020 10:58 PM IST
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those who gave his life for nation, government forget them.
शहीद जहूर की पत्नी। - फोटो : HATHRAS
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
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शहीदों के परिवारों के जख्म भर पाना नामुमकिन है। 26 जुलाई आते ही उस हर परिवार के जख्म हरे हो जाते हैं, जिन्होंने इस युद्ध में अपने बेटे, भाई या पति, पिता को खोया है। कारगिल युद्ध के बाद ऑपरेशन रक्षक में शहीद हुए गांव मीतई के जहूर खां के परिजनों की 18 साल बाद भी कोई सुधि लेने वाला नहीं है। शहादत के इतने साल बाद भी शहीद जहूर खां के परिजनों को प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिली है। परिजनों को इस बात की टीस है।

कारगिल विजय दिवस पर हर साल शहीदों को याद किया जाता है। कारगिल दिवस के बाद जब ऑपरेशन रक्षक चला तो इसमें सेना चार ग्रेनेडियर में तैनात जहूर खां भी 17 अक्तूबर 2002 को शहीद हुए। वह मीतई गांव के रहने वाले थे, जबकि उनका परिवार वर्षों से मोहल्ला मधुगढ़ी इगलास अड्डा के निकट मोहल्ला नई दिल्ली में रह रहा है। जहूर अपने पीछे पत्नी हाजरा बेगम के साथ छह बच्चों को छोड़ गए। जहूर की शहादत के समय तमाम वादे किए गए, लेकिन अब तक उनके परिवार को कोई सरकारी मदद नहीं मिली है। इस कारण जहूर खां के बच्चे मुश्किल भरी जिंदगी जी रहे हैं। जहूर खां के बेटे जाहिद का कहना है कि आज तक प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिली है। स्मारक स्थल को भी अपने पैसों से पक्का कराया है।

शहीद जहूर खान।

शहीद जहूर खान। - फोटो : HATHRAS

शहीद जहूर का समाधिस्थल।

शहीद जहूर का समाधिस्थल। - फोटो : HATHRAS

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