{"_id":"57f544324f1c1b9b0627004a","slug":"this-time-will-be-65-feet-of-the-effigy-of-ravana","type":"story","status":"publish","title_hn":"इस बार 65 फीट का होगा रावण का पुतला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इस बार 65 फीट का होगा रावण का पुतला
अमर उजाला, हाथ्ारस
Updated Wed, 05 Oct 2016 11:49 PM IST
विज्ञापन
एमजी पॉलीटेक्िनक के मैदान पर रावण का पुतला बनाते कारीगर।
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इस बार विजयादशमी पर लंकापति रावण दशानन का कद पहले से ऊंचा होगा। रामलाला कमेटी ने पुतला दहन के लिए 65 हजार की राशि कारीगरों को दी है।
कारीगरों का कहना है कि रावण का पुतला बनाते हुए उनकी सातवीं पीढ़ी चल रही है। हाथरस ही नहीं, दिल्ली, मुंबई के अलावा अन्य राज्यों में वह रावण का पुतला बनाने जाते हैं।
बता दें कि पिछली साल रावण का पुतला 62 फीट का था। इस बार इसकी ऊंचाई 65 फीट है। पुतले के अंदर 10 हजार से अधिक की आतिशबाजी लगाई जाएगी। पुतले का ढांचा भी लगभग पूर्ण हो चुका है। रावण का पुतला बनाने के लिए आधा दर्जन से अधिक कारीगर लगे हुए हैं। एमजी पालीटेक्निक के मैदान पर रावण के पुतले का नीचे का हिस्सा बनाया जा रहा है।
हमारे यहां रावण का पुतला बनाने का काम सात पीढ़ियाें से हो रहा है। इस बार रावण में अतिरिक्त आतिशबाजी लगाई जा रही है। दो-तीन दिन में रावण पूरा बन कर तैयार हो जाएगा। दिल्ली, मुंबई व अन्य राज्यों में रावण के पुतले बनाने जाते हैं।
विज्ञापन
- लाखन सिंह, कारीगर।
पिछली साल से इस साल बांस व आतिशबाजी काफी महंगी है, फिर भी रावण का पुतला 65 फीट का बनवाया जा रहा है। पुतला बनाने में आधा दर्जन से अधिक कारीगर काम कर रहे हैं। रावण वध लीला इस बार ऐतिहासिक रूप से सम्पन्न कराए जाने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।
- आशीष पचौरी, अध्यक्ष, रामलीला महोत्सव।
वहीं रामलीला महोत्सव के दौरान बुधवार की रात रामलीला में लंकापति के मायावी राक्षस मारीच द्वारा चित्रकूट वन में माया मृग बन कर राम-सीता के सामने आता है। मायावी मृग को देख कर सीता राम से उसे लाने का आग्रह करती हैं। काफी देर तक जब राम वापस नहीं लौटते हैं तो सीता लक्ष्मण से उन्हें खोजने का आग्रह करती हैं।
लक्ष्मण कुटिया के चारों तरफ लक्ष्मण रेखा खींच कर यह कह कर चले जाते हैं कि माता इस रेखा को पार कर बाहर मत आना। कुटिया में जब सीता अकेली होती है तभी लंकापति रावण साधु का वेष धारण कर भीक्षा मांगने आता है। रावण को जब सीता भीक्षा लक्ष्मण रेखा के अंदर खड़े होकर देती हैं तो रावण भीक्षा लेने से इंकार कर देता है।
सीता जब लक्ष्मण रेखा पार कर बाहर निकलती हैं तो रावण अपने असली रूप में आकर सीता कर हरण कर लेता है। राम-लक्ष्मण के वापस लौटने पर जब कुटिया में सीता नहीं दिखाई देती तो वह उन्हें खोजने के लिए निकल पड़ते हैं। इस दौरान हनुमान व सुग्रीव से उनका मिलन होता है।
व्यवस्था में आशीष पचौरी, राजीव बौहरे, पुनीतराज पचौरी, पुष्पराज पचौरी, पवन गौतम, बौ. विष्णु पचौरी, आकाश पचौरी, रामबहादुर यादव, संजीव शर्मा, बलराम यादव, बॉबी यादव आदि का सहयोग रहा।
विज्ञापन
कारीगरों का कहना है कि रावण का पुतला बनाते हुए उनकी सातवीं पीढ़ी चल रही है। हाथरस ही नहीं, दिल्ली, मुंबई के अलावा अन्य राज्यों में वह रावण का पुतला बनाने जाते हैं।
बता दें कि पिछली साल रावण का पुतला 62 फीट का था। इस बार इसकी ऊंचाई 65 फीट है। पुतले के अंदर 10 हजार से अधिक की आतिशबाजी लगाई जाएगी। पुतले का ढांचा भी लगभग पूर्ण हो चुका है। रावण का पुतला बनाने के लिए आधा दर्जन से अधिक कारीगर लगे हुए हैं। एमजी पालीटेक्निक के मैदान पर रावण के पुतले का नीचे का हिस्सा बनाया जा रहा है।
विज्ञापन
हमारे यहां रावण का पुतला बनाने का काम सात पीढ़ियाें से हो रहा है। इस बार रावण में अतिरिक्त आतिशबाजी लगाई जा रही है। दो-तीन दिन में रावण पूरा बन कर तैयार हो जाएगा। दिल्ली, मुंबई व अन्य राज्यों में रावण के पुतले बनाने जाते हैं।
विज्ञापन
- लाखन सिंह, कारीगर।
पिछली साल से इस साल बांस व आतिशबाजी काफी महंगी है, फिर भी रावण का पुतला 65 फीट का बनवाया जा रहा है। पुतला बनाने में आधा दर्जन से अधिक कारीगर काम कर रहे हैं। रावण वध लीला इस बार ऐतिहासिक रूप से सम्पन्न कराए जाने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।
- आशीष पचौरी, अध्यक्ष, रामलीला महोत्सव।
वहीं रामलीला महोत्सव के दौरान बुधवार की रात रामलीला में लंकापति के मायावी राक्षस मारीच द्वारा चित्रकूट वन में माया मृग बन कर राम-सीता के सामने आता है। मायावी मृग को देख कर सीता राम से उसे लाने का आग्रह करती हैं। काफी देर तक जब राम वापस नहीं लौटते हैं तो सीता लक्ष्मण से उन्हें खोजने का आग्रह करती हैं।
लक्ष्मण कुटिया के चारों तरफ लक्ष्मण रेखा खींच कर यह कह कर चले जाते हैं कि माता इस रेखा को पार कर बाहर मत आना। कुटिया में जब सीता अकेली होती है तभी लंकापति रावण साधु का वेष धारण कर भीक्षा मांगने आता है। रावण को जब सीता भीक्षा लक्ष्मण रेखा के अंदर खड़े होकर देती हैं तो रावण भीक्षा लेने से इंकार कर देता है।
सीता जब लक्ष्मण रेखा पार कर बाहर निकलती हैं तो रावण अपने असली रूप में आकर सीता कर हरण कर लेता है। राम-लक्ष्मण के वापस लौटने पर जब कुटिया में सीता नहीं दिखाई देती तो वह उन्हें खोजने के लिए निकल पड़ते हैं। इस दौरान हनुमान व सुग्रीव से उनका मिलन होता है।
व्यवस्था में आशीष पचौरी, राजीव बौहरे, पुनीतराज पचौरी, पुष्पराज पचौरी, पवन गौतम, बौ. विष्णु पचौरी, आकाश पचौरी, रामबहादुर यादव, संजीव शर्मा, बलराम यादव, बॉबी यादव आदि का सहयोग रहा।