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Hathras News: सफाई कर्मियों के दोहरे भुगतान में फंसीं पालिकाध्यक्ष व तत्कालीन ईओ

Tue, 01 Sep 2026 01:36 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस Updated Tue, 01 Sep 2026 01:36 AM IST
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Chairman and then-EO embroiled in double payment issue concerning sanitation workers.
प्रलीकात्मक चित्र। - फोटो : Archive
नगर पालिका परिषद हाथरस में 12 सफाई कर्मचारियों के नाम पर हर माह दो बार भुगतान किए जाने के मामले में अध्यक्ष और तत्कालीन अधिशासी अधिकारी समेत छह लोग जांच के घेरे में आ गए हैं। नगर निकाय निदेशालय के निर्देश पर कराई गई प्रशासनिक जांच के बाद जिलाधिकारी ने जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
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अब मामले में संबंधित लोगों के खिलाफ शासन स्तर से कार्रवाई होने की संभावना है। मामला फरवरी 2025 में सामने आया था। अमर उजाला के 10 फरवरी 2025 के अंक में इस संबंध में संवाद न्यूज एजेंसी की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था, जिस पर प्रशासन ने जांच शुरू कराई थी।
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यह था पूरा मामला
नगर पालिका की 19 अगस्त 2023 को संपन्न हुई बोर्ड बैठक में प्रस्ताव संख्या-07 के तहत स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत निर्मित एमआरएफ सेंटर के संचालन के लिए आउटसोर्सिंग के माध्यम से 12 सफाई मजदूरों की आपूर्ति का प्रस्ताव पारित किया गया था। आरोप है कि इसके लिए बिना उचित निविदा प्रक्रिया (जेम पोर्टल नियमों की अनदेखी) अपनाए ब्लैक इंफ्राटेक संस्था को कार्य सौंप दिया गया।
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हद तो तब हो गई जब ईपीएफ चालान और अभिलेखों के मिलान में यह सामने आया कि जो 12 सफाई मजदूर एमआरएफ सेंटर पर तैनात दिखाए गए थे, उन्हीं समान नामों के मजदूरों को पालिका के डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन कार्य में भी तैनात दिखाकर दोनों जगह से भुगतान उठाया जा रहा था। प्रत्येक सफाई कर्मी पर करीब 12 हजार रुपये के हिसाब से पालिका को हर महीने लगभग डेढ़ लाख रुपये की अतिरिक्त चपत लगाई जा रही थी। पालिका के सभासद मनीष अग्रवाल, दिनेश कुमार, धर्मेंद्र कुमार, सुंदरम शर्मा, सुनील अग्निहोत्री आदि ने इसकी शिकायत आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज कराई थी।

एक साल से लंबित थी कार्रवाई
जांच टीम ने जुलाई 2025 में सौंपी गई जांच आख्या में इस प्रक्रिया को पूरी तरह दोषपूर्ण पाया था। शासन ने दोषी कार्मिकों को चिह्नित करने के निर्देश दिए थे। करीब एक साल से शासन द्वारा दोषियों के नाम मांगे जा रहे थे। कई रिमाइंडर बाद तीन महीने पहले नाम नगर पालिका से जांच टीम को भेजे गए।

शासन को भेजी रिपोर्ट
जांच कमेटी में शामिल प्रभारी अधिकारी तृतीय कलक्ट्रेट और वरिष्ठ कोषाधिकारी ने आउटसोर्सिंग फर्म के चयन में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने के लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रकरण जिलाधिकारी को भेजा था। जिलाधिकारी ने जांच समिति की रिपोर्ट और नगर पालिका की आख्या नगर विकास अनुभाग के विशेष सचिव को अग्रिम कार्रवाई के लिए भेज दी है।


जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। नगर पालिका अध्यक्ष व तत्कालीन ईओ सहित छह लोगों के नाम सामने आए हैं। शासन के निर्देशों के क्रम में अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
-अतुल वत्स, डीएम
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