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खूब हुआ धूम-धड़ाका जगमगाए घर-आंगन
अमर उजाला, हाथरस
Updated Mon, 31 Oct 2016 11:41 PM IST
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पुलिस लाइन में पुलिस कर्मियों के परिवार के साथ दिवाली मनाते एसपी।
- फोटो : अमर उजाला
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शहर में रविवार को दिवाली का पर्व धूमधाम से मनाया गया। घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर सुख, शांति और समृद्धि की कामना के साथ मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। अमावस का काला बादल रंग-बिरंगी छटाओं से जगमगाता रहा।
आतिशबाजी के धूम धड़ाके के बीच देर रात तक दीपक और रंगबिरंगी विद्युत झालरें अपनी झिलमिलाहट बिखेरते रहे। मिठाई और दक्षिणा के साथ त्योहार की खुशियां भी बांटी गईं।
महालक्ष्मी के स्वागत में दरवाजों और छतों की मुंडेरों पर दीपक व मोमबत्ती जलाई गईं।
दिवाली पर पूरा शहर दुल्हन की तरह सजा रहा। गली-मोहल्ले और बाजार विद्युत झालरों की सतरंगी रोशनी से झिलमिला रहे हैं। चारों दिशाएं रोशनी से जगमग हो रही हैं। व्यापारी और कारोबारियों ने भी अपने प्रतिष्ठानों पहुंच माता-लक्ष्मी की विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना की।
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शहर में रविवार की शाम से ही आतिशबाजी का धूम-धड़ाका शुरू हो गया। बच्चों ने चीन के पटाखे छोड़कर देसी स्टाइल में धमाके किए। लोहे की सरिया और पाइप से बनी नाल में गंधक-पोटाश मिलाकर धमाका किया। बच्चों और युवाओं की टोलियों ने घरों की छतों, गलियों और सड़कों में जमकर पटाखे चलाए।
कहीं अनार से फूटते शोले तो कहीं फुलझड़ियों से निकलती चिंगारी तो कहीं आसमान में धमाकों के साथ बिखरती संतरंगी रोशनी ने दिवाली को रंगीन अमलीजामा पहना दिया।
घर और दुकानों में दीपमालिकाएं सजाई गईं। दीपकों से कहीं स्वास्तिक तो कहीं ऊॅं तो कहीं शुभलाभ की आकृतियां बनाई गईं। मोमबत्तियां जलाकर भी कोने कोने को प्रकाशमय किया गया। मंदिरों में दीपदान के लिए देर रात तक श्रद्धालुओं की लाइन लगी रहीं। आधी रात तक शहर के मंदिर हजारों दीपकों की रोशनी से झिलमिलाते नजर आए।
दिवाली पर फूलों के दाम भी आसमान पर रहे। गेंदा के फूलों की बड़ी माला के लिए भी लोगों को 70 से 150 रुपए खर्च करने पड़े। बाजार में इस दिन फूलों की कीमतों में सुबह से शाम तक उतार चढ़ाव होता रहा। सुबह फूल 60 से 70 रुपए किलो में बिका और रात तक 90 से 100 रुपये किलो तक पहुंच गए। गुलाब का फूल इक्का-दुक्का दुकानों पर देखने को मिला। इधर, कमल के फूल की कीमत भी काफी रही।
इंटरनेट की सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर भी एक-दूसरे को बधाइयां देने का दौर जारी रहा। खासकर युवाओं में इन साइटों से बधाई देने का क्रेज अधिक दिखाई दिया।
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आतिशबाजी के धूम धड़ाके के बीच देर रात तक दीपक और रंगबिरंगी विद्युत झालरें अपनी झिलमिलाहट बिखेरते रहे। मिठाई और दक्षिणा के साथ त्योहार की खुशियां भी बांटी गईं।
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महालक्ष्मी के स्वागत में दरवाजों और छतों की मुंडेरों पर दीपक व मोमबत्ती जलाई गईं।
दिवाली पर पूरा शहर दुल्हन की तरह सजा रहा। गली-मोहल्ले और बाजार विद्युत झालरों की सतरंगी रोशनी से झिलमिला रहे हैं। चारों दिशाएं रोशनी से जगमग हो रही हैं। व्यापारी और कारोबारियों ने भी अपने प्रतिष्ठानों पहुंच माता-लक्ष्मी की विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना की।
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शहर में रविवार की शाम से ही आतिशबाजी का धूम-धड़ाका शुरू हो गया। बच्चों ने चीन के पटाखे छोड़कर देसी स्टाइल में धमाके किए। लोहे की सरिया और पाइप से बनी नाल में गंधक-पोटाश मिलाकर धमाका किया। बच्चों और युवाओं की टोलियों ने घरों की छतों, गलियों और सड़कों में जमकर पटाखे चलाए।
कहीं अनार से फूटते शोले तो कहीं फुलझड़ियों से निकलती चिंगारी तो कहीं आसमान में धमाकों के साथ बिखरती संतरंगी रोशनी ने दिवाली को रंगीन अमलीजामा पहना दिया।
घर और दुकानों में दीपमालिकाएं सजाई गईं। दीपकों से कहीं स्वास्तिक तो कहीं ऊॅं तो कहीं शुभलाभ की आकृतियां बनाई गईं। मोमबत्तियां जलाकर भी कोने कोने को प्रकाशमय किया गया। मंदिरों में दीपदान के लिए देर रात तक श्रद्धालुओं की लाइन लगी रहीं। आधी रात तक शहर के मंदिर हजारों दीपकों की रोशनी से झिलमिलाते नजर आए।
दिवाली पर फूलों के दाम भी आसमान पर रहे। गेंदा के फूलों की बड़ी माला के लिए भी लोगों को 70 से 150 रुपए खर्च करने पड़े। बाजार में इस दिन फूलों की कीमतों में सुबह से शाम तक उतार चढ़ाव होता रहा। सुबह फूल 60 से 70 रुपए किलो में बिका और रात तक 90 से 100 रुपये किलो तक पहुंच गए। गुलाब का फूल इक्का-दुक्का दुकानों पर देखने को मिला। इधर, कमल के फूल की कीमत भी काफी रही।
इंटरनेट की सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर भी एक-दूसरे को बधाइयां देने का दौर जारी रहा। खासकर युवाओं में इन साइटों से बधाई देने का क्रेज अधिक दिखाई दिया।