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किराने की दुकान से प्रतिबंधित जीवों के अंग, मांस बरामद
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, हाथरस।
Updated Mon, 05 Mar 2018 11:47 PM IST
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सदर कोतवाली में प्रतिबंधित जीवों के अंग बेचने वाले आरोपी दुकानदारों से पूछताछ करती पुलिस।
- फोटो : Amar Ujala
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वन विभाग की टीम ने सोमवार को शहर के बजरिया स्थित एक किराने की दुकान पर छापा मारकर प्रतिबंधित और विलुप्तप्राय जीवों के अंग और मांस बरामद किया। इसकी कीमत बाजार में लाखों रुपये की आंकी जा रही है। प्रभागीय वन अधिकारी ने आरोपी दुकानदार पिता-पुत्र को मौके से गिरफ्तार करते हुए उनके विरुद्ध वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। इस दौरान पीपुल्स फॉर एनीमल्स संस्था के कार्यकर्ता भी वनविभाग की टीम के साथ रहे।
डीएफओ मुकेश शर्मा ने बताया कि मेनका गांधी की संस्था पीपुल फॉर एनीमल्स के कार्यकर्ता दीपक ने लखनऊ स्थित वन विभाग के अधिकारियों को हाथरस में किराने की दुकानों पर प्रतिबंधित जीवों के अंग आदि बेचे जाने की जानकारी दी थी। इसके बाद लखनऊ के अधिकारियों ने डीएफओ को दुकानों पर छापेमारी के लिए कहा। सोमवार को संस्था के कार्यकर्ताओं और विभागीय अधिकारियों ने दुकान पर छापा मारने से पहले सुबह एक व्यक्ति को ग्राहक बनाकर दुकान पर प्रतिबंधित सामग्री खरीदने के लिए भेजा। दुकानदार टालमटोल के बाद प्रतिबंधित अंग देने को तैयार हो गया।
हालांकि उसने काफी इंतजार के बाद शाम करीब चार बजे छिपकली की प्रतिबंधित प्रजाति मोनीटर लिजार्ड का लिंग (हत्था-जोड़ी) डमी ग्राहक को 1600 रुपये में दिया और इस खरीद की पर्ची भी अपने हाथ से बनाकर दी। दुकानदार के प्रतिबंधित सामग्री दिए जाने के कुछ देर बाद ही वन विभाग की टीम ने दुकान पर छापा मार दिया। टीम ने दुकान के अंदर से छह किलोग्राम वजन के हत्था-जोड़ी , सियार सिंघी (सियार के सींगों के अंदर का मांस) और नागर मोथा (समुद्री जीव सी फैन के अंग)बरामद किया। इसकी बाजार में कीमत लाखों में है।
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डीएफओ ने मौके से आरोपी दुकानदार राजकुमार और उनके बेटे अनुराग को गिरफ्तार किया है। मुरसान गेट निवासी आरोपियों का कहना है कि वह बीते दो दशकों से यह सामान बेच रहे हैं। देर शाम आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज होने के बाद वन विभाग के अधिकारी, सीओ सिटी सुमन कनौजिया आरोपियों से पूछताछ में जुटे थे। अधिकारियों ने आरोपियों से सामग्री के सप्लायर और शहर में कितनी दुकानों पर इस तरह की सामग्री बेची जा रही है आदि के बारे में जानकारी जुटाई है ताकि दूसरे दुकानदारों के खिलाफ भी इस तरह की कार्रवाई की जा सके।
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डीएफओ मुकेश शर्मा ने बताया कि मेनका गांधी की संस्था पीपुल फॉर एनीमल्स के कार्यकर्ता दीपक ने लखनऊ स्थित वन विभाग के अधिकारियों को हाथरस में किराने की दुकानों पर प्रतिबंधित जीवों के अंग आदि बेचे जाने की जानकारी दी थी। इसके बाद लखनऊ के अधिकारियों ने डीएफओ को दुकानों पर छापेमारी के लिए कहा। सोमवार को संस्था के कार्यकर्ताओं और विभागीय अधिकारियों ने दुकान पर छापा मारने से पहले सुबह एक व्यक्ति को ग्राहक बनाकर दुकान पर प्रतिबंधित सामग्री खरीदने के लिए भेजा। दुकानदार टालमटोल के बाद प्रतिबंधित अंग देने को तैयार हो गया।
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हालांकि उसने काफी इंतजार के बाद शाम करीब चार बजे छिपकली की प्रतिबंधित प्रजाति मोनीटर लिजार्ड का लिंग (हत्था-जोड़ी) डमी ग्राहक को 1600 रुपये में दिया और इस खरीद की पर्ची भी अपने हाथ से बनाकर दी। दुकानदार के प्रतिबंधित सामग्री दिए जाने के कुछ देर बाद ही वन विभाग की टीम ने दुकान पर छापा मार दिया। टीम ने दुकान के अंदर से छह किलोग्राम वजन के हत्था-जोड़ी , सियार सिंघी (सियार के सींगों के अंदर का मांस) और नागर मोथा (समुद्री जीव सी फैन के अंग)बरामद किया। इसकी बाजार में कीमत लाखों में है।
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डीएफओ ने मौके से आरोपी दुकानदार राजकुमार और उनके बेटे अनुराग को गिरफ्तार किया है। मुरसान गेट निवासी आरोपियों का कहना है कि वह बीते दो दशकों से यह सामान बेच रहे हैं। देर शाम आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज होने के बाद वन विभाग के अधिकारी, सीओ सिटी सुमन कनौजिया आरोपियों से पूछताछ में जुटे थे। अधिकारियों ने आरोपियों से सामग्री के सप्लायर और शहर में कितनी दुकानों पर इस तरह की सामग्री बेची जा रही है आदि के बारे में जानकारी जुटाई है ताकि दूसरे दुकानदारों के खिलाफ भी इस तरह की कार्रवाई की जा सके।