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Hathras News: अधूरी रह गई गंगा स्नान करने की आस
Sat, 02 May 2026 02:02 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Sat, 02 May 2026 02:02 AM IST
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बस की टक्कर से बाइक सवार विजेंद्र की मौत के बाद मौके पर मौजूद परिजन। संवाद
- फोटो : Samvad
एनएच-34 पर बृहस्पतिवार की रात बिलार गांव के पास हुआ रोडवेज बस हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक हंसते-खेलते आर्थिक रूप से कमजोर परिवार को तबाह कर गया है। दंपती गंगा स्नान की आस लेकर खुशी-खुशी घर से निकले थे, लेकिन शायद नियती को उनका गंगा तट तक पहुंचना मंजूर नहीं था।
हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू है दंपती अच्छी सेहत और आर्थिक स्थिति में सुधार की कामना लेकर घर से निकला था। गांव बसई के मृतक विजेंद्र पिछले कई महीनों से गंभीर बीमारी से जूझ रहा था।
मजदूरी पेशा होने के कारण घर की आर्थिक स्थिति पहले ही डगमगा चुकी थी। लंबे समय से काम पर न जा पाने के कारण परिवार ने मन बनाया कि गंगा स्नान करने से शायद ग्रहों की दशा सुधरेगी और वह स्वस्थ हो जाएगा। इसी आस में वह पत्नी के साथ गंगा स्नान के लिए जा रहा था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। कासगंज रोड पर बस ने उनकी बाइक में टक्कर मार दी।
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हादसे ने इस परिवार को इस कदर तोड़ा है कि सुनने वालों की रूह कांप जाए। बस की टक्कर से विजेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी नीरज इस वक्त अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही हैं। उन्हें यह भी नहीं पता कि जिनके स्वास्थ्य की कामना के लिए वह निकली थीं, वह अब इस दुनिया में नहीं रहे।
इधर, घर के आंगन में दो मासूम बच्चे अपने माता-पिता की वापसी का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें क्या पता कि जिस पिता की उंगली पकड़कर वो बड़े हो रहे थे, उनका साया हमेशा के लिए उठ चुका है और मां अस्पताल के बिस्तर पर बेसुध पड़ी है। पूरे गांव और रिश्तेदारों में कोहराम मचा हुआ है। परिवार के लोगों को रोता देख दोनों बच्चे माता पिता को याद कर बिलख रहे हैं।
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हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू है दंपती अच्छी सेहत और आर्थिक स्थिति में सुधार की कामना लेकर घर से निकला था। गांव बसई के मृतक विजेंद्र पिछले कई महीनों से गंभीर बीमारी से जूझ रहा था।
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मजदूरी पेशा होने के कारण घर की आर्थिक स्थिति पहले ही डगमगा चुकी थी। लंबे समय से काम पर न जा पाने के कारण परिवार ने मन बनाया कि गंगा स्नान करने से शायद ग्रहों की दशा सुधरेगी और वह स्वस्थ हो जाएगा। इसी आस में वह पत्नी के साथ गंगा स्नान के लिए जा रहा था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। कासगंज रोड पर बस ने उनकी बाइक में टक्कर मार दी।
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हादसे ने इस परिवार को इस कदर तोड़ा है कि सुनने वालों की रूह कांप जाए। बस की टक्कर से विजेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी नीरज इस वक्त अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही हैं। उन्हें यह भी नहीं पता कि जिनके स्वास्थ्य की कामना के लिए वह निकली थीं, वह अब इस दुनिया में नहीं रहे।
इधर, घर के आंगन में दो मासूम बच्चे अपने माता-पिता की वापसी का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें क्या पता कि जिस पिता की उंगली पकड़कर वो बड़े हो रहे थे, उनका साया हमेशा के लिए उठ चुका है और मां अस्पताल के बिस्तर पर बेसुध पड़ी है। पूरे गांव और रिश्तेदारों में कोहराम मचा हुआ है। परिवार के लोगों को रोता देख दोनों बच्चे माता पिता को याद कर बिलख रहे हैं।