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मजदूरी करके गुजारा करता है सियाराम का परिवार
अमर उजाला, हाथरस
Updated Thu, 17 Nov 2016 11:56 PM IST
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सियाराम की मौत के बाद विलाप करते परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
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नोट बदलने के लिए लाइन में लगकर मृत हुए 70 वर्षीय सियाराम का परिवार बेहद गरीब है। परिजनों की मानें तो पूरा परिवार ही मजदूरी करके अपना गुजारा करता है। हालांकि सियाराम बुर्ज वाला कुआं पर हवेली में फुल टाइम नौकरी करते थे, फिर भी परिवार का मुखिया होने के नाते उनकी मौत से परिजनों को गहरा धक्का लगा है। माली हालत ठीक नहीं है, इसलिए परिवार सरकार से मदद की आस लगाए हुए है।
सियाराम के परिवार में तीन बेटे और तीन बेटियां हैं। इन सबकी शादी हो चुकी है। उनके छोटे बेटे कन्हैयालाल की मानें तो उनकी पत्नी की कई साल पूर्व मृत्यु हो चुकी है। तब से बेटे-बेटियां ही उनका सहारा थे। खुद सियाराम की पगार भी ज्यादा नहीं थी, जिससे उनकी खराब माली हालत का अंदाजा अच्छी तरह लगाया जा सकता है।
मौत के बाद सियाराम के घर शोक संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लगा हुआ है। कई राजनीतिक लोग भी उनके यहां पहुंचे और पूरी मदद का भरोसा दिलाया। ऐसे में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस मामले को लेकर जिले की सियासत गर्माने के पूरे आसार हैं। पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय ने तो सियाराम के लिए मुआवजे की मांग उठाकर इसकी शुरुआत भी कर दी है।
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मेरे पिताजी तीन दिन से पैसे बदलने के लिए लाइन में लग रहे थे। आज भी लाइन में लगे हुए थे। तभी वह बेहोश हो गए। उन्हें नजदीक के ही एक निजी चिकित्सक के यहां ले जाया गया। जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। परिवार में मेरे अलावा दो भाई और तीन बहनें हैं। सबकी शादी हो चुकी है। हम सब बेहद गरीब हैं और मजदूरी करके गुजारा करते हैं। हम कल शव का पोस्टमार्टम कराएंगे और सरकार से मुआवजे की मांग करेंगे।
-कन्हैयालाल, सियाराम के सबसे छोटे पुत्र
बुजुर्ग हमारे मोहल्ले की ही एक हवेली में ही बतौर केयर टेकर पिछले 15 साल से कार्यरत थे। जिस समय वह अचेत होकर गिरे थे, उस समय उनके पास से बैंक की पासबुक, आधार कार्ड और चार हजार रुपये का भरा हुआ नोट एक्सचेंज फॉर्म और चार हजार रुपये नकद मिले हैं। इससे स्पष्ट है कि वह रुपये बदलने के लिए लाइन में लगे थे।
यह पैसे, पासबुक और फॉर्म हमने उनके परिजनों के हवाले कर दिए हैं। आस-पड़ोसियों ने भी उन्हें पिछले दो दिन से लाइन में लगे हुए देखा था। बुधवार को भी उनकी तबियत लाइन में लगे हुए खराब हुई थी।
प्रशांत शर्मा, मनोनीत सभासद
इधर, यूपी विधानसभा की लोक लेखा समिति के सभापति (दर्जा प्राप्त कैबिनेट मंत्री) रामवीर उपाध्याय ने नोट बदलने की लाइन में लगे बुजुर्ग सियाराम की मौत पर अफसोस जताया है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मृतक के परिजनों को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने और यह व्यवस्था सुनिश्चित कराने की मांग की है कि दोबारा ऐसी घटना नहीं हो सके।
वह इस संबंध में सीएम और मुख्य सचिव को पत्र भी लिख रहे हैं। उन्होंने बताया कि सादाबाद के गांव मंस्या में गरीबी के चलते एक व्यक्ति की मौत हो गई। वह अपने परिवार में अकेला कमाने वाला था और नोटबंदी के बाद से तंगी से जूझ रहा था। उन्होंने उसकी आर्थिक मदद भी की।
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सियाराम के परिवार में तीन बेटे और तीन बेटियां हैं। इन सबकी शादी हो चुकी है। उनके छोटे बेटे कन्हैयालाल की मानें तो उनकी पत्नी की कई साल पूर्व मृत्यु हो चुकी है। तब से बेटे-बेटियां ही उनका सहारा थे। खुद सियाराम की पगार भी ज्यादा नहीं थी, जिससे उनकी खराब माली हालत का अंदाजा अच्छी तरह लगाया जा सकता है।
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मौत के बाद सियाराम के घर शोक संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लगा हुआ है। कई राजनीतिक लोग भी उनके यहां पहुंचे और पूरी मदद का भरोसा दिलाया। ऐसे में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस मामले को लेकर जिले की सियासत गर्माने के पूरे आसार हैं। पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय ने तो सियाराम के लिए मुआवजे की मांग उठाकर इसकी शुरुआत भी कर दी है।
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मेरे पिताजी तीन दिन से पैसे बदलने के लिए लाइन में लग रहे थे। आज भी लाइन में लगे हुए थे। तभी वह बेहोश हो गए। उन्हें नजदीक के ही एक निजी चिकित्सक के यहां ले जाया गया। जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। परिवार में मेरे अलावा दो भाई और तीन बहनें हैं। सबकी शादी हो चुकी है। हम सब बेहद गरीब हैं और मजदूरी करके गुजारा करते हैं। हम कल शव का पोस्टमार्टम कराएंगे और सरकार से मुआवजे की मांग करेंगे।
-कन्हैयालाल, सियाराम के सबसे छोटे पुत्र
बुजुर्ग हमारे मोहल्ले की ही एक हवेली में ही बतौर केयर टेकर पिछले 15 साल से कार्यरत थे। जिस समय वह अचेत होकर गिरे थे, उस समय उनके पास से बैंक की पासबुक, आधार कार्ड और चार हजार रुपये का भरा हुआ नोट एक्सचेंज फॉर्म और चार हजार रुपये नकद मिले हैं। इससे स्पष्ट है कि वह रुपये बदलने के लिए लाइन में लगे थे।
यह पैसे, पासबुक और फॉर्म हमने उनके परिजनों के हवाले कर दिए हैं। आस-पड़ोसियों ने भी उन्हें पिछले दो दिन से लाइन में लगे हुए देखा था। बुधवार को भी उनकी तबियत लाइन में लगे हुए खराब हुई थी।
प्रशांत शर्मा, मनोनीत सभासद
इधर, यूपी विधानसभा की लोक लेखा समिति के सभापति (दर्जा प्राप्त कैबिनेट मंत्री) रामवीर उपाध्याय ने नोट बदलने की लाइन में लगे बुजुर्ग सियाराम की मौत पर अफसोस जताया है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मृतक के परिजनों को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने और यह व्यवस्था सुनिश्चित कराने की मांग की है कि दोबारा ऐसी घटना नहीं हो सके।
वह इस संबंध में सीएम और मुख्य सचिव को पत्र भी लिख रहे हैं। उन्होंने बताया कि सादाबाद के गांव मंस्या में गरीबी के चलते एक व्यक्ति की मौत हो गई। वह अपने परिवार में अकेला कमाने वाला था और नोटबंदी के बाद से तंगी से जूझ रहा था। उन्होंने उसकी आर्थिक मदद भी की।