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Hathras News: ग्राहकों की जेब पर फिट, हर माल 10 रुपये का गणित
Sun, 20 Sep 2026 02:40 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Sun, 20 Sep 2026 02:40 AM IST
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दाऊजी मेले में हर माल 10 रुपये की दुकान पर खरीदारी करते ग्राहक। संवाद
- फोटो : Samvad
मेला श्रीदाऊजी महाराज के मीना बाजार और मुख्य मार्गों पर सजीं हर माल 10 रुपये की दुकानें इन दिनों मेले में आने वाली महिलाओं और बच्चों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। देखने में बेहद सामान्य लगने वाले इस 10 रुपये के कारोबार के पीछे दुकानदारों का एक जटिल और सधा हुआ गणित काम करता है, जो ग्राहकों की जेब पर फिट बैठ रहा है।
एक ही छत के नीचे दर्जनों वैरायटी उपलब्ध कराने के लिए व्यापारी थोक मंडियों से 50 से 60 तरह के दैनिक उपयोग के सामान जुटाते हैं, जिसमें किसी उत्पाद पर महज 50 पैसे तो किसी पर पांच रुपये तक का मुनाफा कमाया जाता है। मेला परिसर में इस वर्ष हर माल 10 रुपये की कुल पांच दुकानें संचालित हो रही हैं।
इन काउंटरों पर सुबह से लेकर देर रात तक ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। दुकानों पर रसोई में काम आने वाले चाकू, छलनी, चम्मच, छोटे डिब्बे से लेकर महिलाओं के लिए हेयर बैंड, सेफ्टी पिन, रबर बैंड, क्लिप और बच्चों के लिए पेंसिल, रबर, कटर, छोटी गाड़ियां व खिलौने सजाए गए हैं।
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10 रुपये का एकमुश्त दाम होने के कारण ग्राहकों को मोलभाव करने की जरूरत नहीं पड़ती और वे बिना सोचे-समझे एक साथ आठ-10 आइटम खरीद लेते हैं। दुकानदारों के अनुसार इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत उत्पाद का चयन है। वे दिल्ली के सदर बाजार या आगरा की थोक मंडियों से ऐसे उत्पाद छांटते हैं, जिनकी थोक लागत पांच रुपये से लेकर 9.50 रुपये के बीच बैठती है। 9.50 रुपये में आने वाले सामान पर दुकान का किराया, बिजली और भाड़ा मिलाकर लगभग शून्य या महज 50 पैसे की बचत होती है।
हालांकि, इस घाटे या कम मुनाफे की भरपाई उन हल्के उत्पादों से की जाती है जो थोक में पांच या छह रुपये में मिल जाते हैं। जब ग्राहक मिला-जुला सामान खरीदते हैं, तो दुकानदार को प्रति आइटम औसतन दो से तीन रुपये का शुद्ध मुनाफा मिल जाता है।
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बातचीत,,,,,,,,,
हम मेले के लिए 10 रुपये वाले करीब 60 तरह के आइटम लेकर आए हैं। इसमें सारा खेल वॉल्यूम यानी बिक्री की मात्रा का है। अगर हम सिर्फ पांच रुपये लागत वाली हल्की चीजें रखेंगे तो ग्राहक आकर्षित नहीं होगा, इसलिए स्टील की चम्मच, चाकू या फैंसी रबर बैंड जैसी भारी और आकर्षक चीजें भी रखनी पड़ती हैं।
-कुंवरपाल सिंह निवासी हाथरस
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मेले में हर माल 10 रुपये का बोर्ड अपने आप में एक बड़ा चुंबक है। मेले में घूमने आने वाली महिलाएं और बच्चे इस बोर्ड को देखकर खिंचे चले आते हैं। 10 रुपये आज के दौर में इतनी छोटी रकम है कि कोई भी ग्राहक जेब टटोलने में झिझकता नहीं। हमारे यहां दिनभर में सैकड़ों की संख्या में पीस बिक जाते हैं।
-मनोज कुमार निवासी तोछीगढ़
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एक ही छत के नीचे दर्जनों वैरायटी उपलब्ध कराने के लिए व्यापारी थोक मंडियों से 50 से 60 तरह के दैनिक उपयोग के सामान जुटाते हैं, जिसमें किसी उत्पाद पर महज 50 पैसे तो किसी पर पांच रुपये तक का मुनाफा कमाया जाता है। मेला परिसर में इस वर्ष हर माल 10 रुपये की कुल पांच दुकानें संचालित हो रही हैं।
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इन काउंटरों पर सुबह से लेकर देर रात तक ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। दुकानों पर रसोई में काम आने वाले चाकू, छलनी, चम्मच, छोटे डिब्बे से लेकर महिलाओं के लिए हेयर बैंड, सेफ्टी पिन, रबर बैंड, क्लिप और बच्चों के लिए पेंसिल, रबर, कटर, छोटी गाड़ियां व खिलौने सजाए गए हैं।
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10 रुपये का एकमुश्त दाम होने के कारण ग्राहकों को मोलभाव करने की जरूरत नहीं पड़ती और वे बिना सोचे-समझे एक साथ आठ-10 आइटम खरीद लेते हैं। दुकानदारों के अनुसार इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत उत्पाद का चयन है। वे दिल्ली के सदर बाजार या आगरा की थोक मंडियों से ऐसे उत्पाद छांटते हैं, जिनकी थोक लागत पांच रुपये से लेकर 9.50 रुपये के बीच बैठती है। 9.50 रुपये में आने वाले सामान पर दुकान का किराया, बिजली और भाड़ा मिलाकर लगभग शून्य या महज 50 पैसे की बचत होती है।
हालांकि, इस घाटे या कम मुनाफे की भरपाई उन हल्के उत्पादों से की जाती है जो थोक में पांच या छह रुपये में मिल जाते हैं। जब ग्राहक मिला-जुला सामान खरीदते हैं, तो दुकानदार को प्रति आइटम औसतन दो से तीन रुपये का शुद्ध मुनाफा मिल जाता है।
बातचीत,,,,,,,,,
हम मेले के लिए 10 रुपये वाले करीब 60 तरह के आइटम लेकर आए हैं। इसमें सारा खेल वॉल्यूम यानी बिक्री की मात्रा का है। अगर हम सिर्फ पांच रुपये लागत वाली हल्की चीजें रखेंगे तो ग्राहक आकर्षित नहीं होगा, इसलिए स्टील की चम्मच, चाकू या फैंसी रबर बैंड जैसी भारी और आकर्षक चीजें भी रखनी पड़ती हैं।
-कुंवरपाल सिंह निवासी हाथरस
मेले में हर माल 10 रुपये का बोर्ड अपने आप में एक बड़ा चुंबक है। मेले में घूमने आने वाली महिलाएं और बच्चे इस बोर्ड को देखकर खिंचे चले आते हैं। 10 रुपये आज के दौर में इतनी छोटी रकम है कि कोई भी ग्राहक जेब टटोलने में झिझकता नहीं। हमारे यहां दिनभर में सैकड़ों की संख्या में पीस बिक जाते हैं।
-मनोज कुमार निवासी तोछीगढ़