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विभागों में सामंजस्य की कमी से पर्यटन का सपना रह गया अधूरा

Tue, 27 Sep 2022 12:01 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 27 Sep 2022 12:01 AM IST
सार

गौरव भारद्वाज, हाथरस।मंदिर श्री दाऊजी महाराज व किला राजा दयाराम को पर्यटन स्थल बनाने की योजना आज तक मूर्त रूप नहीं ले सकी है। अंग्रेजों से जंग के साक्षी मंदिर श्री दाऊजी महाराज और किला राजा दयाराम के पुरातन स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना तो कई बार बनी लेकिन इस योजना को अभी तक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। तब केंद्रीय मंत्री के निर्देश पर इस प्राचीन स्थल के सौंदर्यीकरण के लिए पचास लाख रुपये पुरातत्व विभाग ने स्वीकृत किए थे।

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The dream of tourism remained incomplete due to lack of cohesion in the departments

विस्तार

गौरव भारद्वाज, हाथरस।
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मंदिर श्री दाऊजी महाराज व किला राजा दयाराम को पर्यटन स्थल बनाने की योजना आज तक मूर्त रूप नहीं ले सकी है। पर्यटन विभाग पुरातत्व विभाग व जिला प्रशासन ने संयुक्त कार्य योजना बनाई थी। केंद्र सरकार की ओर से किस्त भी जारी की गई। इसके बाद भी अभी तक इस स्थल के दिन नहीं बहुरे हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि इस स्थल पर अवैध कब्जों व अतिक्रमण की भरमार है।
पुरातत्व विभाग ने इस स्थल पर अवैध कब्जे चिन्हित भी कर दिए लेकिन स्थानीय प्रशासन ने इन कब्जों को अभी तक नहीं हटवाया है। वहीं सदर विधायक ने यह घोषणा की थी कि वह अपनी पहली निधि दाऊजी मंदिर के सौंदर्यीकरण में खर्च करेंगी लेकिन इसमें भी पुरातत्व विभाग की अड़चन सामने आ रही है।
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अंग्रेजों से जंग के साक्षी मंदिर श्री दाऊजी महाराज और किला राजा दयाराम के पुरातन स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना तो कई बार बनी लेकिन इस योजना को अभी तक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। यह स्थल वर्ष 1817 की जंग का साक्षी है। तब अंग्रेजों ने इस पर धावा बोला था।
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मंदिर के गुंबद पर गोले के निशान भी हैं। राजा दयाराम से तीन दिन तक अंग्रेजों का युद्ध हुआ था। इसके बाद तोपखाने में आग लग गई थी। डेढ़ दशक पहले पुरातत्व विभाग के साथ-साथ उत्तर प्रदेश पर्यटन निगम और स्थानीय प्रशासन ने इस स्थल के सौंदर्यीकरण के लिए योजना भी बनाई थी। योजना यह थी कि इस स्थल का सौंदर्यीकरण कर इसे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाए। लेकिन यह योजना अभी मूर्त रूप नहीं ले सकी है।
पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान यहां केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल आए थे। उनके समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश कुमार शर्मा ने इस किले को सौंदर्यीकरण का मसला उठाया था। तब केंद्रीय मंत्री के निर्देश पर इस प्राचीन स्थल के सौंदर्यीकरण के लिए पचास लाख रुपये पुरातत्व विभाग ने स्वीकृत किए थे। बजट सैंक्शन भी हो गया। इस दौरान थोड़ा काम भी हुआ लेकिन इसी बीच मेला श्री दाऊजी महाराज आ गया और यह काम रुक गया।
पर्यटन योजना के तहत नहीं आई दूसरी किश्त
प्रदेश सरकार ने पुरानी धरोहरों को संवारने के लिए मुख्यमंत्री पर्यटन योजना का क्रियान्वयन लागू की है। योजना के तहत सदर विधायक हरीशंकर माहौर ने पहली किस्त में मिले 24 लाख से मंदिर के पीछे इंटरलॉकिंग का कार्य कराया था। उसके बाद दूसरी किस्त नहीं मिली है। इस धनराशि से यहां बच्चो के लिए झूला, बैंच लगने थे। भगवान श्रीकृष्ण बलराम की लीलाओं का चित्रण होना था।
- इस प्राचीन स्थल के विकास के लिए डेढ़ करोड़ रुपये मेला श्री दाऊजी महाराज के फंड में है। इस पैसे का योजना बनाकर सदुपयोग होना चाहिए। जिन राजनेताओं ने समय-समय पर इस क्षेत्र में धनराशि लगाकर विकास कराने की घोषणा की है। वह आगे आएं। अवैध कब्जे हटवाए जाएं। हालांकि पिछले दिनों यहां पुरातत्व विभाग ने कुछ काम कराया है लेकिन यह स्थल तभी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है, जब सभी साथ मिलकर तालमेल बनाकर काम करें। - हरीश कुमार शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता।

- पहली विधायक निधि से गोशाला के पास वाली सड़क व गेट आदि बनवाने की योजना तैयार की थी। इसके लिए सीडीओ से कहा गया लेकिन यह पुरातत्व विभाग का कार्य क्षेत्र होने के कारण वहां इस निधि से विकास कार्य नहीं हो सकता। इसलिए विधायक निधि से राशि वहां खर्च नहीं हो सकी है। - अंजुला माहौर, सदर विधायक।
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