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Hathras News: चकाचौंध में उड़ी सिंदूर-कुमकुम के बाजार की रंगत
Wed, 23 Sep 2026 02:22 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Wed, 23 Sep 2026 02:22 AM IST
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महिला बाजार में फड़ पर बिकता सिंदूर व कुमकुम। संवाद
- फोटो : Samvad
मेला श्रीदाऊजी महाराज में महिलाओं के आकर्षण का केंद्र रहने वाले सिंदूर और कुमकुम के बाजार पर आधुनिकता की चकाचौंध हावी हो गई है।
महिला बाजार में एक समय सड़क के बीच बने फव्वारे के आसपास दो दर्जन से अधिक सिंदूर व कुमकुम की दुकानें कतार में सजती थीं, लेकिन इस बार केवल कुछ दुकानदार ही फड़ लगाकर इनकी बिक्री कर रहे हैं।
पुराने दुकानदार बताते हैं कि पहले सिंदूर बड़ी-बड़ी ढेरियों में सजाया जाता था और ग्राहकों को तौल के हिसाब से बेचा जाता था। दूर-दराज से आने वाली महिलाएं कुमकुम, सिंदूर और शृंगार सामग्री की खरीदारी के लिए विशेष रूप से इसी बाजार का रुख करती थीं। समय के साथ मेले का स्वरूप बदलने से यह पारंपरिक बाजार भी सिमटता गया।
हालांकि आज भी कुछ दुकानदार वर्षों पुरानी परंपरा को जीवित रखते हुए सिंदूर और कुमकुम की बिक्री कर रहे हैं, लेकिन पहले जैसी रौनक अब दिखाई नहीं देती। शहर के खातीखाना निवासी महिला हिना अग्रवाल ने बताया कि कुमकुम व सिंदूर की बिक्री अब मेले में दिखाई नहीं देती।
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अलीगढ़ रोड निवासी बीना देवी ने बताया कि एक समय में सिंदूर की कई क्वालिटी मेले में बिकती थीं। पूरे साल के लिए एक साथ महिलाएं इसकी खरीद करती थीं, लेकिन अब तो बाजार से ही लेना पड़ता है।
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महिला बाजार में एक समय सड़क के बीच बने फव्वारे के आसपास दो दर्जन से अधिक सिंदूर व कुमकुम की दुकानें कतार में सजती थीं, लेकिन इस बार केवल कुछ दुकानदार ही फड़ लगाकर इनकी बिक्री कर रहे हैं।
पुराने दुकानदार बताते हैं कि पहले सिंदूर बड़ी-बड़ी ढेरियों में सजाया जाता था और ग्राहकों को तौल के हिसाब से बेचा जाता था। दूर-दराज से आने वाली महिलाएं कुमकुम, सिंदूर और शृंगार सामग्री की खरीदारी के लिए विशेष रूप से इसी बाजार का रुख करती थीं। समय के साथ मेले का स्वरूप बदलने से यह पारंपरिक बाजार भी सिमटता गया।
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हालांकि आज भी कुछ दुकानदार वर्षों पुरानी परंपरा को जीवित रखते हुए सिंदूर और कुमकुम की बिक्री कर रहे हैं, लेकिन पहले जैसी रौनक अब दिखाई नहीं देती। शहर के खातीखाना निवासी महिला हिना अग्रवाल ने बताया कि कुमकुम व सिंदूर की बिक्री अब मेले में दिखाई नहीं देती।
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अलीगढ़ रोड निवासी बीना देवी ने बताया कि एक समय में सिंदूर की कई क्वालिटी मेले में बिकती थीं। पूरे साल के लिए एक साथ महिलाएं इसकी खरीद करती थीं, लेकिन अब तो बाजार से ही लेना पड़ता है।