Hathras News: 2000 के नोट बंदी पर बोले व्यापारी, जल्दबाजी में लिया गया फैसला, बढ़ाएगा परेशानी
भारतीय रिजर्व बैंक आठ नवंबर 2016 को रात्रि 12 बजे से पुराने नोट बंद करने के बाद 2000 का नोट प्रचलन में लाया था। साढ़े छह साल में ही भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को फिर से 2000 के नोट की छपाई बंद कर इसे वापस लेना शुरू कर दिया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारतीय रिजर्व बैंक के 2000 के नोटों की छपाई बंद करने और इन्हें वापस लिए जाने पर बहस छिड़ गई है। व्यापारियों ने जल्दबाजी में लिया गया फैसला बताया है और कहा है कि इससे परेशानियां बढ़ेंगी।
भारतीय रिजर्व बैंक आठ नवंबर 2016 को रात्रि 12 बजे से पुराने नोट बंद करने के बाद 2000 का नोट प्रचलन में लाया था। साढ़े छह साल में ही भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को फिर से 2000 के नोट की छपाई बंद कर इसे वापस लेना शुरू कर दिया है। हालांकि अभी 30 सितंबर तक 2000 के नोट वैध रहेंगे। इसके बाद फिर से बहस छिड़ गई। व्यापारियों और कारोबारियों में चिंता बढ़ गई है।
रिजर्व बैंक ने फैसला जल्दबाजी में लिया है। पहले भी व्यापारी 2016 में नोट बंदी के बाद व्यापार करने में बहुत परेशान रहा था।-राधेश्याम अग्रवाल, व्यापारी
विज्ञापन विज्ञापन
रिजर्व बैंक ने जो फैसला लिया है वह मध्यम वर्गीय व्यापारी के हित में नहीं है। बहुत कम समय में दो बार नोट बंद करना व्यापार को प्रभावित करेगा।-रूपेश गर्ग, व्यापारी
कुछ हद तक रिजर्व बैंक ने जो फैसला लिया है वह ठीक है लेकिन एक बार में 20000 रुपए परिवर्तित करने की जो सुविधा दी है, वह कम है। इससे व्यापार प्रभावित होगा। -मोहनलाल अग्रवाल, व्यापारी
2016 की नोटबंदी के बाद अब अचानक 2000 रुपए के नोट को बंद करना व्यापार के हित में नहीं है। नोट बंदी के बाद भी व्यापारी वर्ग परेशानियां झेलता रहा था। अब यह फैसला दोबारा व्यापारियों को परेशान करेगा। -अनुभव अग्रवाल, व्यापारी