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Hathras News: मर्ज कान का, पर्चा बना दिया दंत रोग विभाग का

Sun, 21 Jun 2026 01:44 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस Updated Sun, 21 Jun 2026 01:44 AM IST
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The ailment was of the ear, but the prescription slip was issued for the dental department.
जिला अस्पताल में काउंटर पर पर्चा बनवाते मरीज। संवाद - फोटो : Samvad
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल करने और मरीजों को लंबी कतारों से निजात दिलाने का सपना अभी अधूरा है। बागला संयुक्त जिला चिकित्सालय में एबीडीएम से संबंधित स्लोगन व बार कोड ओपीडी काउंटर पर चस्पा कर दिए हैं, लेकिन लोगों को जानकारी देने वाला कोई नहीं है। पर्चा काउंटर पर बैठा स्टाफ भी इससे अनभिज्ञ है। शनिवार सुबह संवाद न्यूज एजेंसी ने इसकी पड़ताल की तो पता चला कि केवल पर्चा बनवाने में इससे मदद मिलती है, इसके बाद नहीं।
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पर्चा बनवाने में लगे तीन मिनट

सामान्य पर्चा काउंटरों पर मरीजों की लंबी कतारें लगी थीं, जबकि एबीडीएम के लिए बनाए गए डेडिकेटेड काउंटर पर सन्नाटा था। जब काउंटर पर मौजूद एक कर्मचारी से एबीडीएम के बारे में सवाल किया, तो वह इसका अर्थ तक नहीं समझ सकीं। इसके बाद खुद मोबाइल से बार कोड स्कैन किया। सुबह 9:27 बजे एबीडीएम डेडिकेटेड काउंटर पर अपना टोकन नंबर साझा किया। काउंटर खाली होने के बावजूद टोकन नंबर-3 का पर्चा सिस्टम से बाहर आने में पूरे तीन मिनट का समय लग गया। इतना ही नहीं, बिना जानकारी लिए पर्चे पर ओपीडी नंबर-2 यानी दंत रोग विभाग स्वत: ही अंकित होकर आ गया, जबकि दिखाना ईएनटी में था।
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रजिस्टर पर ही सिमटा डिजिटल मिशन

दंत ओपीडी में एबीडीएम से जुड़ा कोई भी डिजिटल उपकरण या कंप्यूटर नजर नहीं आया। ओपीडी में तैनात डॉ. अनुज तेवतिया मौजूद नहीं थे। वहां उपस्थित उनके सहयोगी ने पर्चे से नाम देखकर हाथ से रजिस्टर पर दर्ज किया और दवा लिखकर थमा दी। ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने के बाद भी सिस्टम पर टोकन नंबर-3 दिखाता रहा और अंतत: 60 मिनट बाद खुद-ब-खुद निरस्त हो गया।
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केवल पर्चे तक सीमित राहत

बार कोड स्कैन करने और डिजिटल टोकन लेने का फायदा केवल डेडिकेटेड काउंटर से पर्चा बनवाने तक ही सीमित रह गया है। इसके बाद की पूरी प्रक्रिया पुरानी है। मरीज को ओपीडी से लेकर दवा काउंटर और लैब में टेस्ट कराने के लिए थका देने वाली लंबी लाइनों में ही खड़ा होना पड़ रहा है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि जिला अस्पताल में तैनात 12 चिकित्सकों में से केवल एक डाॅ. केके शर्मा ही इस योजना में रुचि ले रहे हैं। उनके कक्ष में ही कंप्यूटर उपलब्ध है,बाकी जगह नहीं। शनिवार को इमरजेंसी ड्यूटी के चलते वे ओपीडी में मौजूद नहीं रहे।



एबीडीएम के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। रोजाना 200 से 300 लोग डिजिटल माध्यम से ईएनटी व डेंटल ओपीडी तक पहुंच रहे। तीन महीने में इसको पूरी तरह संचालित कर दिया जाएगा। इसका प्रशिक्षण दिया जा रहा है। लोग वेबसाइट ओआरएस.जीओवी.इन के जरिए भी टोकन ले सकते हैं, जिसमें ओपीडी चयन की सुविधा है।

डॉ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस।
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