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एक्शन में आया प्रशासन बाजार से हटवाए अवैध कब्जे
अमर उजाला, हाथ्ारस
Updated Sun, 02 Apr 2017 12:41 AM IST
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मुरसान में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाते पुलिस अधिकारी।
- फोटो : amar ujala
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सत्ता का निजाम बदलते ही प्रशासन व पुलिस दोनों को ही मजबूरन एक्शन में आने को विवश होना पड़ रहा है। क्योंकि प्रशासन ने पिछले दस से अधिक वर्षों से भी सादाबाद में नगर में संक्रामक रोंगो की तरह पैर पसार चुके अतिक्रमण को कभी हटवाने तक की जहमत नहीं उठाई थी। शनिवार को चलाए गए अभियान के बावजूद भी मुख्य बाजार में कई दुकानदारों ने अभी भी सरकारी कार्यालयों के दरवाजों पर अवैध कब्जा कर रखा है।
शासन के कड़े निर्देशों के चलते प्रशासन को आखिर नींद से जागना ही पड़ा। नगर पंचायत द्वारा कस्बे में शनिवार की सुबह स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने की मुनादी कराई गई थी। दोपहर बाद उपजिलाधिकारी अभिषेक सिंह, पुलिस क्षेत्राधिकारी मनीषा सिंह, थानाध्यक्ष केपी सिंह ने मय पुलिसबल व नगर पंचायतकर्मियों के साथ कस्बे के जवाहर बाजार में नाले-नालियों पर स्थायी रूप से जमे तख्तों व ऊपर पडे़ टिनशेडों को हटवाया।
वहीं जवाहर बाजार में व्यापारी नेता बालकिशन गोयल व बीके वर्मा ने अधिकारियों से कहा कि अतिक्रमण हटाओ अभियान की शुरूआत विनोबा नगर चौराहे से करनी थी और यह अभियान विनोबा नगर चौराहे से शुरू न करके बीच बाजार से शुरू क्यों किया गया। इस पर अधिकारियों ने व्यापारी नेताओं को आश्वस्त किया कि कहीं भी कोई अतिक्रमण छोड़ा नहीं जाएगा। वहीं हाथरस के मुरसान में अतिक्रमण हटाओ अभियान की कमान खुद इंस्पेक्टर रमाकांत पचौरी ने संभाल रखी थी।
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क्या सरकारी जमीनों और सड़कों के कब्जों को हटवा पाएगा प्रशासन ?
सादाबाद। पिछले 14 वर्षों से प्रदेश में सपा-बसपा की सरकारों के चलते प्रशासन के निष्क्रिय बने रहने का लोगों ने जमकर फायदा उठाया। लोगों ने कई सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा करके बिल्डिंगें खड़ी कर दी, तो कईयों ने सरकारी जमीनों को बाकायदा बैनामा करके बेच डाला। यहीं नहीं कि मथुरा, एटा, राया, मुरसान मार्गों के किनारे पहले लोकनिर्माण विभाग के बोर्ड लगे हुए होते थे। जिन पर लिखा रहता था कि सड़क के मध्य से 120 फुट की दूरी तक किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं किया जा सकता है। लेकिन अब इस तरह के साइन बोर्ड कहीं दिखाई नहीं देते और न लोकनिर्माण विभाग के अधिकारियों ने कभी इन मार्गों के किनारे अवैध रूप से स्थायी अतिक्रमण करने वाले लोगों को नोटिस तक देने की जहमत नहीं उठाई। मथुरा, एटा, मुरसान व राया मार्गों के दोनो ओर अनेक लोगों द्वारा दस से लेकर 20-20 फुट तक अपनी बिल्डिगों को बढ़ाकर पक्का निर्माण करके लोकनिर्माण विभाग की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा किया गया है। जिसके कारण इन मार्गों पर दिन भर जाम की स्थिति बनी रहती है। क्या प्रशासन अवैध रूप से कब्जाई गई सड़क की भूमि को मुक्त करा पाएगा।
जीटी रोड से हटाए गए अतिक्रमण
सिकंदराराऊ मीट की दुकानों के बाद पुलिस प्रशासन ने जीटी रोड स्थित अतिक्रमण पर अपना ध्यान फोकस कर दिया है। शनिवार की दोपहर में कोतवाली पुलिस ने पहले दिन पंत चौराहे पर अवैध अतिक्रमण करने वाले ठेल ढकेल तथा सड़क पर सामान रखने वालों को चेतावनी दी। बता दें कि नगर का जीटी रोड चार लेन का है, लेकिन अवैध अतिक्रमण करने के चलते यह सिकुड़कर एक लेन का रह गया है।
जिसने जहां चाहा मर्जी से अतिक्रमण कर लिया। यदा कदा दिखावे के लिए पुलिस इसे हटाने का उपक्रम करती रही है। मीट शराब के साथ पुलिस ने अब अतिक्रमण हटाने की प्राथमिक प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। पहले चरण में ठेल ढकेल वाले हटाए गए तथा चेतावनी दी गई कि स्वयं अतिक्रमण हटा लें। अन्यथा अतिक्रमण को ध्वस्त कर दिया जाएगा।
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शासन के कड़े निर्देशों के चलते प्रशासन को आखिर नींद से जागना ही पड़ा। नगर पंचायत द्वारा कस्बे में शनिवार की सुबह स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने की मुनादी कराई गई थी। दोपहर बाद उपजिलाधिकारी अभिषेक सिंह, पुलिस क्षेत्राधिकारी मनीषा सिंह, थानाध्यक्ष केपी सिंह ने मय पुलिसबल व नगर पंचायतकर्मियों के साथ कस्बे के जवाहर बाजार में नाले-नालियों पर स्थायी रूप से जमे तख्तों व ऊपर पडे़ टिनशेडों को हटवाया।
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वहीं जवाहर बाजार में व्यापारी नेता बालकिशन गोयल व बीके वर्मा ने अधिकारियों से कहा कि अतिक्रमण हटाओ अभियान की शुरूआत विनोबा नगर चौराहे से करनी थी और यह अभियान विनोबा नगर चौराहे से शुरू न करके बीच बाजार से शुरू क्यों किया गया। इस पर अधिकारियों ने व्यापारी नेताओं को आश्वस्त किया कि कहीं भी कोई अतिक्रमण छोड़ा नहीं जाएगा। वहीं हाथरस के मुरसान में अतिक्रमण हटाओ अभियान की कमान खुद इंस्पेक्टर रमाकांत पचौरी ने संभाल रखी थी।
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क्या सरकारी जमीनों और सड़कों के कब्जों को हटवा पाएगा प्रशासन ?
सादाबाद। पिछले 14 वर्षों से प्रदेश में सपा-बसपा की सरकारों के चलते प्रशासन के निष्क्रिय बने रहने का लोगों ने जमकर फायदा उठाया। लोगों ने कई सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा करके बिल्डिंगें खड़ी कर दी, तो कईयों ने सरकारी जमीनों को बाकायदा बैनामा करके बेच डाला। यहीं नहीं कि मथुरा, एटा, राया, मुरसान मार्गों के किनारे पहले लोकनिर्माण विभाग के बोर्ड लगे हुए होते थे। जिन पर लिखा रहता था कि सड़क के मध्य से 120 फुट की दूरी तक किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं किया जा सकता है। लेकिन अब इस तरह के साइन बोर्ड कहीं दिखाई नहीं देते और न लोकनिर्माण विभाग के अधिकारियों ने कभी इन मार्गों के किनारे अवैध रूप से स्थायी अतिक्रमण करने वाले लोगों को नोटिस तक देने की जहमत नहीं उठाई। मथुरा, एटा, मुरसान व राया मार्गों के दोनो ओर अनेक लोगों द्वारा दस से लेकर 20-20 फुट तक अपनी बिल्डिगों को बढ़ाकर पक्का निर्माण करके लोकनिर्माण विभाग की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा किया गया है। जिसके कारण इन मार्गों पर दिन भर जाम की स्थिति बनी रहती है। क्या प्रशासन अवैध रूप से कब्जाई गई सड़क की भूमि को मुक्त करा पाएगा।
जीटी रोड से हटाए गए अतिक्रमण
सिकंदराराऊ मीट की दुकानों के बाद पुलिस प्रशासन ने जीटी रोड स्थित अतिक्रमण पर अपना ध्यान फोकस कर दिया है। शनिवार की दोपहर में कोतवाली पुलिस ने पहले दिन पंत चौराहे पर अवैध अतिक्रमण करने वाले ठेल ढकेल तथा सड़क पर सामान रखने वालों को चेतावनी दी। बता दें कि नगर का जीटी रोड चार लेन का है, लेकिन अवैध अतिक्रमण करने के चलते यह सिकुड़कर एक लेन का रह गया है।
जिसने जहां चाहा मर्जी से अतिक्रमण कर लिया। यदा कदा दिखावे के लिए पुलिस इसे हटाने का उपक्रम करती रही है। मीट शराब के साथ पुलिस ने अब अतिक्रमण हटाने की प्राथमिक प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। पहले चरण में ठेल ढकेल वाले हटाए गए तथा चेतावनी दी गई कि स्वयं अतिक्रमण हटा लें। अन्यथा अतिक्रमण को ध्वस्त कर दिया जाएगा।