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बैंकों में आज रहेगी हड़ताल, कर्मियों ने किया प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस।
Updated Mon, 21 Aug 2017 11:36 PM IST
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प्रदर्शन
- फोटो : Amar Ujala
अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मंगलवार को बैंक कर्मचारी व अफसर हड़ताल पर रहेंगे। हड़ताल को सफल बनाने और सरकार की बैंकिंग विरोधी नीतियों के विरोध में सोमवार को जिले के बैंक कर्मियों व अफसरों ने सरक्यूलर रोड स्थित केनरा बैंक की शाखा पर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर जनविरोधी बैंकिंग सुधारों को रोकने, कॉर्पोरेट खराब ऋणों को वसूल करने एवं कॉर्पोरेट अनार्जक आस्तियों का भार बैंकों के ग्राहकों पर सेवा शुल्क बढ़ाकर न डालने सहित कई मांगों को लेकर आंदोलन का आह्वान किया है। इसके तहत मंगलवार को बैंक कर्मी व अधिकारी हड़ताल पर रहेंगे। यूपी बैंक यूनियन के प्रांतीय सहायक महामंत्री एवं फोरम के जिला संयोजक बीएस जैन ने कहा कि केंद्र सरकार जनविरोधी बैंकिंग सुधार करने पर आमादा हैं। यह सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को विखंडित करना चाहती है और निजी क्षेत्र के बैंकों को प्रोत्साहित कर रही है, जो किसी तरह देश के हित में नहीं है। बैंकों को राष्ट्रीयकृत कराने के लिए बैंक कर्मचारियों ने काफी संघर्ष किया था। राष्ट्रीयकरण के बाद बैंकों की उपलब्धियां और योगदान देश के लिए अभूतपूर्व और बेजोड़ रहा है। विशाल शाखा नेटवर्क, जमा संवर्धन क्षमता और ऋण वितरण क्षमताओं के माध्यम से लोगों तक उनकी पहुंच वास्तव में अद्वितीय है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वर्ग बैंकिंग को सार्वजनिक बैंकिंग में बदल दिया है। इसलिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बचाया जाना चाहिए।
एसबीआईएसए के जोनल सेक्रेटरी अशोक यादव ने कहा कि 22 अगस्त की हड़ताल को टालने के लिए आईबीए ने फोरम के पदाधिकारियों को वार्ता के लिए 16 अगस्त को बंबई बुलाया था, लेकिन वार्ता विफल रही। उसके बाद केंद्रीय मुख्य श्रम आयुक्त ने फोरम के पदाधिकारियों को 18 अगस्त को दिल्ली बुलाया था, जिसमें आईबीए तथा वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने भाग लिया, लेकिन उस दिन भी कोई हल हड़ताल को टालने के लिए नहीं निकल सका। इसलिए बैंक कर्मचारियों को मजबूरन हड़ताल पर जाना पड़ रहा हैं। उन्होंने हड़ताल को सफल बनाने का आह्वान किया। सुरेश सिंह ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ते हुए खराब ऋण चिंता का विषय है, परंतु राजनीतिक गठजोड़ के कारण केंद्र सरकार इन खराब ऋणों को वसूल करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही हैं। बैंक राष्ट्र निर्माण संस्थाएं हैं। यूपीबीईयू के जिलाध्यक्ष वीके शर्मा ने केंद्र सरकार की बैंकिंग क्षेत्र में जनविरोधी सुधारों एवं बैंकों को निजीकरण करने की नीतियों की कटु शब्दों में निंदा की।
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प्रदर्शन में राकेश वर्मा, डीसी गुप्ता, अजय कुमार, ओमप्रकाश, यतीश गर्ग, पीएस रावत, रवि कुमार, प्रदीप अग्रवाल, हिमांशु श्रीवास्तव, लक्ष्मीनारायण, प्रवीन कुमार, नन्नूमल, अशोक कुमार शर्मा, विवेक यादव, उमाशंकर जैन, इतवारीलाल, हरीशचंद्र राठौर, संतोष कुमार सिंह, विवेक अग्रवाल, लोकेश गौतम, ओमप्रकाश, लालाराम, रवि राकेश, गया प्रसाद, धर्मेंद्र कुमार, शोभित वर्मा, राजवीर सिंह, जगवीर सिंह, रमेश सैनी, लालाराम, सतेंद्र, सोनवीर सिंह, शैलेंद्र तोमर, भानु कुमार, राहुल आदि ने सक्रिय भूमिका अदा की।
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यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर जनविरोधी बैंकिंग सुधारों को रोकने, कॉर्पोरेट खराब ऋणों को वसूल करने एवं कॉर्पोरेट अनार्जक आस्तियों का भार बैंकों के ग्राहकों पर सेवा शुल्क बढ़ाकर न डालने सहित कई मांगों को लेकर आंदोलन का आह्वान किया है। इसके तहत मंगलवार को बैंक कर्मी व अधिकारी हड़ताल पर रहेंगे। यूपी बैंक यूनियन के प्रांतीय सहायक महामंत्री एवं फोरम के जिला संयोजक बीएस जैन ने कहा कि केंद्र सरकार जनविरोधी बैंकिंग सुधार करने पर आमादा हैं। यह सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को विखंडित करना चाहती है और निजी क्षेत्र के बैंकों को प्रोत्साहित कर रही है, जो किसी तरह देश के हित में नहीं है। बैंकों को राष्ट्रीयकृत कराने के लिए बैंक कर्मचारियों ने काफी संघर्ष किया था। राष्ट्रीयकरण के बाद बैंकों की उपलब्धियां और योगदान देश के लिए अभूतपूर्व और बेजोड़ रहा है। विशाल शाखा नेटवर्क, जमा संवर्धन क्षमता और ऋण वितरण क्षमताओं के माध्यम से लोगों तक उनकी पहुंच वास्तव में अद्वितीय है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वर्ग बैंकिंग को सार्वजनिक बैंकिंग में बदल दिया है। इसलिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बचाया जाना चाहिए।
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एसबीआईएसए के जोनल सेक्रेटरी अशोक यादव ने कहा कि 22 अगस्त की हड़ताल को टालने के लिए आईबीए ने फोरम के पदाधिकारियों को वार्ता के लिए 16 अगस्त को बंबई बुलाया था, लेकिन वार्ता विफल रही। उसके बाद केंद्रीय मुख्य श्रम आयुक्त ने फोरम के पदाधिकारियों को 18 अगस्त को दिल्ली बुलाया था, जिसमें आईबीए तथा वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने भाग लिया, लेकिन उस दिन भी कोई हल हड़ताल को टालने के लिए नहीं निकल सका। इसलिए बैंक कर्मचारियों को मजबूरन हड़ताल पर जाना पड़ रहा हैं। उन्होंने हड़ताल को सफल बनाने का आह्वान किया। सुरेश सिंह ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ते हुए खराब ऋण चिंता का विषय है, परंतु राजनीतिक गठजोड़ के कारण केंद्र सरकार इन खराब ऋणों को वसूल करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही हैं। बैंक राष्ट्र निर्माण संस्थाएं हैं। यूपीबीईयू के जिलाध्यक्ष वीके शर्मा ने केंद्र सरकार की बैंकिंग क्षेत्र में जनविरोधी सुधारों एवं बैंकों को निजीकरण करने की नीतियों की कटु शब्दों में निंदा की।
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प्रदर्शन में राकेश वर्मा, डीसी गुप्ता, अजय कुमार, ओमप्रकाश, यतीश गर्ग, पीएस रावत, रवि कुमार, प्रदीप अग्रवाल, हिमांशु श्रीवास्तव, लक्ष्मीनारायण, प्रवीन कुमार, नन्नूमल, अशोक कुमार शर्मा, विवेक यादव, उमाशंकर जैन, इतवारीलाल, हरीशचंद्र राठौर, संतोष कुमार सिंह, विवेक अग्रवाल, लोकेश गौतम, ओमप्रकाश, लालाराम, रवि राकेश, गया प्रसाद, धर्मेंद्र कुमार, शोभित वर्मा, राजवीर सिंह, जगवीर सिंह, रमेश सैनी, लालाराम, सतेंद्र, सोनवीर सिंह, शैलेंद्र तोमर, भानु कुमार, राहुल आदि ने सक्रिय भूमिका अदा की।