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Hathras News: कौड़ियों के दाम बेच दिए थे मेडल, पर सम्मान की निशानी को सहेज रखा है शैलेंद्र सर्राफ ने

Thu, 26 Jan 2023 07:00 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो गौरव भारद्वाज
गौरव भारद्वाज Published by: अलीगढ़ ब्यूरो Updated Thu, 26 Jan 2023 07:00 AM IST
सार

दुर्लभ मेडल को प्राप्तकर्ताओं के परिजनों ने धातु के तौर पर बाजार में बेच दिया था। धातु विक्रेताओं से शैलेंद्र सर्राफ ने ये मेडल खरीद लिए। यदि ऐसा नहीं करते, तो उन्हें गला दिया जाता।

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Shailendra Saraf of the city has saved the sign of respect
शैलेंद्र सर्राफ के संग्रालय में एकत्रित पदक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश की सेवा के लिए जब किसी को सम्मानित किया जाता है, तो उनका ही नहीं, उनके परिजनों का भी सिर फक्र से ऊंचा हो जाता है। सम्मान के उस खास क्षण को कोई भूलना नहीं चाहता है। मगर, कुछ मेडल प्राप्तकर्ताओं के परिजनों ने इस सम्मान की अहमियत नहीं समझी और उन्हें बाजार में कौड़ियों के दाम पर बेच दिया। जानकारी होने पर शहर के शैलेंद्र सर्राफ ने इन निशानियों को खरीदकर अपने संग्रहालय में संग्रहीत कर लिया है।

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पुरानी वस्तुओं का संग्रह करने वाले शैलेंद्र सर्राफ के पास चौदह मेडल हैं। ये मेडल सौ साल से भी पुराने हैं। इनमें स्वतंत्रता, स्वर्ण जयंती मेडल, संग्राम मेडल, राष्ट्रीय कैडेट कोर आदि के मेडल शामिल हैं। किसी पर भारत देश का नक्शा छपा हुआ है, तो किसी पर देश का तिरंगा झंडा, अशोक चक्र, लाल किला छपे हुए हैं। एक मेडल पर जॉर्ज पंचम, मैरी का चित्र छपा हुआ है, जो कि अंग्रेजों के जमाने में किसी को दिया गया है।
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शैलेंद्र सर्राफ ने बताया कि इन दुर्लभ मेडल को प्राप्तकर्ताओं के परिजनों ने धातु के तौर पर बाजार में बेच दिया था। धातु विक्रेताओं से उन्होंने ये मेडल खरीद लिए। यदि ऐसा नहीं करते, तो उन्हें गला दिया जाता। अब इन सभी मेडल को उन्होंने अपने संग्रहालय में सहेज लिया है। उनका कहना है कि अगर उत्तर प्रदेश और भारत सरकार चाहे, तो वह इन मेडलों को उनको सुपुर्द कर देंगे। अफसोस की बात यह है कि देश की खातिर योगदान के बदले मिले इस सम्मान की अहमियत प्राप्तकर्ताओं के परिजनों ने नहीं समझी।

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