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शहीद मदनपाल 10 दिन पहले ही अवकाश से वापस गए थे ड्यूटी पर
Sat, 29 Jun 2019 12:28 AM IST
Mohd Rafeek
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
Published by: Mohd Rafeek
Updated Sat, 29 Jun 2019 12:28 AM IST
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गांव तमनागढ़ी निवासी सीआरपीएफ जवान की मौत के बाद विलाप करते परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
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हाथरस। छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में स्थानीय तमन्ना की गढ़ी निवासी सीआरपीएफ में तैनात एसआई मदनपाल सिंह शहीद हुए हैं। उनकी शहादत की खबर जैसे ही उनके परिजनों को हुई, वैसे ही उनके घर पर कोहराम मच गया। वहां भीड़ लग गई। शहीद मदनपाल सिंह ने अपने पीछे बूढी मां, पत्नी और चार संतानों को छोड़ा है। उनके परिजन सीआरपीएफ के आला अधिकारियों से संपर्क बनाए हुए थे और संभवाना है कि उनका शव शनिवार की शाम तक यहां आ जाएगा।
छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों से हुई मुठभेड़ में स्थानीय तमन्ना की गढ़ी निवासी एसआई मदनपाल सिंह भी शहीद हुए हैं। मूल रूप से हाथरस जंक्शन क्षेत्र के गांव लाखनू के निवासी मदनपाल सिंह करीब दो दशक के अपने निजी मकान में परिवार के साथ यहां तमना गढ़ी रह रहे थे। करीब दस दिन पहले ही वह अवकाश से वापस गए थे। उनकी शहादत की खबर शुक्रवार की दोपहर डेढ़ बजे के लगभग उनके घर पर आई तो वहां कोहराम मच गया।
उनकी मां, दोनोें बेटे व दोनों बेटियों व पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था। उनकी एक बेटी पिंकी की शादी हो चुकी है, जबकि दोनोें बेटे राहुल और मनीष के अलावा छोटी बेटी निशा भी इस समय पढ़ रहे हैं। उनकी शहादत की खबर पाकर उनके पड़ोसियों की भीड़ घर पर एकत्रित हो गई। सभी शहीद के परिजनों को ढांढ़स बंधाने लग रहे। अन्य रिश्तेदार व नातेदार भी एकत्रित हो गए। परिजनों सीआरपीएफ के अधिकारियों से संपर्क कर रहे थे और यह जानकारी कर रहे थे कि आखिर शहीद मदनपाल का शव यहां कब तक आ जाएगा।
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छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों से हुई मुठभेड़ में स्थानीय तमन्ना की गढ़ी निवासी एसआई मदनपाल सिंह भी शहीद हुए हैं। मूल रूप से हाथरस जंक्शन क्षेत्र के गांव लाखनू के निवासी मदनपाल सिंह करीब दो दशक के अपने निजी मकान में परिवार के साथ यहां तमना गढ़ी रह रहे थे। करीब दस दिन पहले ही वह अवकाश से वापस गए थे। उनकी शहादत की खबर शुक्रवार की दोपहर डेढ़ बजे के लगभग उनके घर पर आई तो वहां कोहराम मच गया।
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उनकी मां, दोनोें बेटे व दोनों बेटियों व पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था। उनकी एक बेटी पिंकी की शादी हो चुकी है, जबकि दोनोें बेटे राहुल और मनीष के अलावा छोटी बेटी निशा भी इस समय पढ़ रहे हैं। उनकी शहादत की खबर पाकर उनके पड़ोसियों की भीड़ घर पर एकत्रित हो गई। सभी शहीद के परिजनों को ढांढ़स बंधाने लग रहे। अन्य रिश्तेदार व नातेदार भी एकत्रित हो गए। परिजनों सीआरपीएफ के अधिकारियों से संपर्क कर रहे थे और यह जानकारी कर रहे थे कि आखिर शहीद मदनपाल का शव यहां कब तक आ जाएगा।
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