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Hathras News: डायबिटीज-बीपी मरीजों का डेटा गायब, छह सीएचओ का वेतन रोका
Thu, 18 Jun 2026 01:56 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Thu, 18 Jun 2026 01:56 AM IST
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
गैर संचारी रोग (एनसीडी) पोर्टल पर स्क्रीनिंग का डेटा अपलोड न होने से अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि जिले में कैंसर, डायबिटीज और उच्च रक्तचाप के कितने मरीज हैं। सीएमओ को समीक्षा में छह ऐसे सीएचओ मिले हैं, जिन्होंने एक अप्रैल से स्क्रीनिंग कार्य शुरू ही नहीं किया था। लिहाजा इन सभी का वेतन रोकने के आदेश दिए गए हैं।
दरअसल, मंगलवार को सीएमओ डॉ. वेदप्रकाश ने सभी सीएचओ की समीक्षा बैठक बुलाई, जिसमें यह पता चला कि स्क्रीनिंग का डेटा अपलोड न होने से शासन स्तर पर हाथरस की रिपोर्ट शून्य दर्ज हो रही है। सीएमओ ने पाया कि कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) प्रभारियों (एमओआईसी) की पोर्टल आईडी अब तक जनरेट नहीं हुई है। वहीं हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर भी स्क्रीनिंग कार्य में ढिलाई बरती जा रही है।
नियमों के तहत प्रत्येक संभावित मरीज की एनसीडी स्क्रीनिंग कर उसका विवरण पोर्टल पर दर्ज किया जाना आवश्यक है, लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण यह प्रक्रिया प्रभावित है। विशेषज्ञों के अनुसार डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां ‘साइलेंट किलर’ मानी जाती हैं।
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स्क्रीनिंग और डेटा रिकॉर्डिंग न होने से मरीजों की समय पर पहचान नहीं हो पा रही, जिससे उपचार में देरी का खतरा बढ़ गया है। इसके अलावा मरीजों की वास्तविक संख्या दर्ज न होने से दवाओं और स्वास्थ्य संसाधनों के आवंटन पर भी असर पड़ सकता है। भविष्य की स्वास्थ्य योजनाओं और मुफ्त जांच अभियानों में भी जिले को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
एमओआईसी की आईडी जनरेट करने के लिए शासन स्तर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। चार एमओआईसी की आईडी जनरेट हो चुकी हैं। शेष तीन की आईडी भी जल्द जनरेट कर दी जाएंगी। रूट लेवल पर स्क्रीनिंग हमारी प्राथमिकता में है, जिस पर कार्य किया जा रहा है।
डाॅ. वेदप्रकाश, सीएमओ
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दरअसल, मंगलवार को सीएमओ डॉ. वेदप्रकाश ने सभी सीएचओ की समीक्षा बैठक बुलाई, जिसमें यह पता चला कि स्क्रीनिंग का डेटा अपलोड न होने से शासन स्तर पर हाथरस की रिपोर्ट शून्य दर्ज हो रही है। सीएमओ ने पाया कि कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) प्रभारियों (एमओआईसी) की पोर्टल आईडी अब तक जनरेट नहीं हुई है। वहीं हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर भी स्क्रीनिंग कार्य में ढिलाई बरती जा रही है।
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नियमों के तहत प्रत्येक संभावित मरीज की एनसीडी स्क्रीनिंग कर उसका विवरण पोर्टल पर दर्ज किया जाना आवश्यक है, लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण यह प्रक्रिया प्रभावित है। विशेषज्ञों के अनुसार डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां ‘साइलेंट किलर’ मानी जाती हैं।
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स्क्रीनिंग और डेटा रिकॉर्डिंग न होने से मरीजों की समय पर पहचान नहीं हो पा रही, जिससे उपचार में देरी का खतरा बढ़ गया है। इसके अलावा मरीजों की वास्तविक संख्या दर्ज न होने से दवाओं और स्वास्थ्य संसाधनों के आवंटन पर भी असर पड़ सकता है। भविष्य की स्वास्थ्य योजनाओं और मुफ्त जांच अभियानों में भी जिले को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
एमओआईसी की आईडी जनरेट करने के लिए शासन स्तर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। चार एमओआईसी की आईडी जनरेट हो चुकी हैं। शेष तीन की आईडी भी जल्द जनरेट कर दी जाएंगी। रूट लेवल पर स्क्रीनिंग हमारी प्राथमिकता में है, जिस पर कार्य किया जा रहा है।
डाॅ. वेदप्रकाश, सीएमओ