{"_id":"5d3f59768ebc3e6c9a25d1a0","slug":"ramveer-has-play-vital-role-in-jila-panchayat-president-election-hathras-news-ali2096520121","type":"story","status":"publish","title_hn":"रामवीर ही रहे जिला पंचायत में तख्तापलट के मास्टरमाइंड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रामवीर ही रहे जिला पंचायत में तख्तापलट के मास्टरमाइंड
विज्ञापन
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में विनोद उपाध्याय को काबिज करने की रणनीति के मास्टरमाइंड रामवीर उपाध्याय ही रहे। पहले अविश्वास प्रस्ताव पारित कराने से लेकर फिर बहुमत को अपने खेमे में एकजुट रखने में वह कामयाब रहे और इसी का नतीजा रहा कि जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी फिर रामवीर परिवार के सदस्य को मिली।
जिला पंचायत का जब से इस जिले में सजृन हुआ है तो दो बार तो सीमा उपाध्याय जिला पंचायत अध्यक्ष रही हैं। इसके अलावा रामवीर उपाध्याय के समर्थक ही इस कुर्सी पर बैठे हैं। दो साल पहले जरूर सपा जिलाध्यक्ष ओमवती यादव ने उपाध्याय परिवार से यह कुर्सी छीन ली थी। तब से ही रामवीर उपाध्याय इस प्रयास में लगे थे कि इस कुर्सी पर फिर उनके ही परिवार का सदस्य काबिज हो। वैसे जिला पंचायत में उनके परिवार के चार लोग सदस्य हैं। अब जब लोकसभा चुनाव हो गया तो उपाध्याय की ओर से इसकी रणनीति तैयारी की जाती रही। सूत्रों की मानें तो उपाध्याय द्वारा लोकसभा चुनाव में भाजपा का समर्थन करना इसी रणनीति का हिस्सा रही। लोकसभा चुनाव के तत्काल बाद रामवीर ने अपनी इस रणनीति को अमलीजामा पहनाया। उन्होंने सबसे पहले ओमवती यादव के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित कराया। अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद उनकी रणनीति का पार्ट नंबर टू विनोद को फिर से कुर्सी पर काबिज कराना था। ऐसे में रामवीर इसमें सफल रहे। पर्दे पर भले ही विनोद उपाध्याय दिखे हों और वह जिला पंचायत अध्यक्ष बने हों लेकिन इस पूरे राजनीतिक खेल के मास्टरमाइंड रामवीर ही रहे। ऐसे में दो साल बाद फिर यह कुर्सी रामवीर के परिवार को मिल गई।
विज्ञापन
जिला पंचायत का जब से इस जिले में सजृन हुआ है तो दो बार तो सीमा उपाध्याय जिला पंचायत अध्यक्ष रही हैं। इसके अलावा रामवीर उपाध्याय के समर्थक ही इस कुर्सी पर बैठे हैं। दो साल पहले जरूर सपा जिलाध्यक्ष ओमवती यादव ने उपाध्याय परिवार से यह कुर्सी छीन ली थी। तब से ही रामवीर उपाध्याय इस प्रयास में लगे थे कि इस कुर्सी पर फिर उनके ही परिवार का सदस्य काबिज हो। वैसे जिला पंचायत में उनके परिवार के चार लोग सदस्य हैं। अब जब लोकसभा चुनाव हो गया तो उपाध्याय की ओर से इसकी रणनीति तैयारी की जाती रही। सूत्रों की मानें तो उपाध्याय द्वारा लोकसभा चुनाव में भाजपा का समर्थन करना इसी रणनीति का हिस्सा रही। लोकसभा चुनाव के तत्काल बाद रामवीर ने अपनी इस रणनीति को अमलीजामा पहनाया। उन्होंने सबसे पहले ओमवती यादव के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित कराया। अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद उनकी रणनीति का पार्ट नंबर टू विनोद को फिर से कुर्सी पर काबिज कराना था। ऐसे में रामवीर इसमें सफल रहे। पर्दे पर भले ही विनोद उपाध्याय दिखे हों और वह जिला पंचायत अध्यक्ष बने हों लेकिन इस पूरे राजनीतिक खेल के मास्टरमाइंड रामवीर ही रहे। ऐसे में दो साल बाद फिर यह कुर्सी रामवीर के परिवार को मिल गई।
विज्ञापन