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जिला अस्पताल में हंगामा, पुलिस से धक्का मुक्की
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस।
Updated Sat, 07 Oct 2017 11:32 PM IST
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जिला अस्पताल का भवन
- फोटो : अमर उजाला
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कोतवाली हाथरस गेट क्षेत्र में शनिवार शाम को गांव बाद अठवरिया के निकट बाईपास पर किसी वाहन ने एक बाइक को रौंद दिया। हादसे के बाद बाइक पर सवार ठेेकेदार की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया और जिला अस्पताल ले आई। देर रात मृतक के परिजन भी जिला अस्पताल पहुंच गए। अस्पताल में उस समय अच्छा-खासा हंगामा खड़ा हो गया, जब परिजनों और साथ आए कुछ लोगों ने कहा कि युवक की सांसें चल रही हैं। वह जिंदा है तो भी डॉक्टर ने उसे मृत कैसे घोषित कर दिया? यह लोग जबरन शव को बिना कागजी कार्यवाही के ले जाने लगे तो अस्पताल में पुलिस बुला ली गई।
पुलिस के मुताबिक बाइक सवार 35 वर्षीय मनोज पुत्र नवरत्न अतरौली थाना क्षेत्र के गांव मढ़ौली के रहने वाले थे। वह चंदपा क्षेत्र में एक धार्मिक स्थल के निर्माण कार्य की देखरेख करने के अलावा ठेके पर मिस्त्रियों और बेलदारों से काम कराते थे। शनिवार शाम को बाइक से वह अपने घर जा रहे थे। तभी पीछे से किसी वाहन ने उन्हें रौंद दिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेने के बाद परिजनों को सूचित कर दिया है।
बताते हैं कि पुलिस कर्मियों ने जब इन लोगों को बिना किसी कागजी औपचारिकता के शव ले जाने से रोका तो यह लोग पुलिस वालों से ही भिड़ गए और उन्हें धक्का देकर शव को अपने साथ ले गए। कुछ देर बाद यह लोग फिर लौटे और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर से कहा कि युवक अभी जिंदा है, इसलिए उसे रेफर कर दिया जाए। लेकिन डॉक्टर का कहना था कि वह मृत व्यक्ति को कैसे रेफर कर सकते हैं? इन लोगों ने वहां पर हंगामा शुरू कर दिया। इनकी वहां मौजूद पुलिस कर्मियों से तीखी नोक-झोंक भी हुई। नौबत हाथापाई तक आ पहुंची। बताते हैं कि इस बीच इन लोगों ने पुलिस अधिकारी की अलीगढ़ के एक जनप्रतिनिधि से फोन पर बात करा दी, जिसके बाद उपनिरीक्षक ने अपर पुलिस अधीक्षक से फोन पर बात की। एएसपी ने उनसे कहा कि वह इन लोगों से लिखवाकर ले लें कि वह स्वेच्छा से शव को ले जा रहे हैं, और उन्हें कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करनी है। इन लोगों ने वहां पुलिस को यह लिखकर दिया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें शव को वहां से ले जाने दिया।
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पुलिस के मुताबिक बाइक सवार 35 वर्षीय मनोज पुत्र नवरत्न अतरौली थाना क्षेत्र के गांव मढ़ौली के रहने वाले थे। वह चंदपा क्षेत्र में एक धार्मिक स्थल के निर्माण कार्य की देखरेख करने के अलावा ठेके पर मिस्त्रियों और बेलदारों से काम कराते थे। शनिवार शाम को बाइक से वह अपने घर जा रहे थे। तभी पीछे से किसी वाहन ने उन्हें रौंद दिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेने के बाद परिजनों को सूचित कर दिया है।
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बताते हैं कि पुलिस कर्मियों ने जब इन लोगों को बिना किसी कागजी औपचारिकता के शव ले जाने से रोका तो यह लोग पुलिस वालों से ही भिड़ गए और उन्हें धक्का देकर शव को अपने साथ ले गए। कुछ देर बाद यह लोग फिर लौटे और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर से कहा कि युवक अभी जिंदा है, इसलिए उसे रेफर कर दिया जाए। लेकिन डॉक्टर का कहना था कि वह मृत व्यक्ति को कैसे रेफर कर सकते हैं? इन लोगों ने वहां पर हंगामा शुरू कर दिया। इनकी वहां मौजूद पुलिस कर्मियों से तीखी नोक-झोंक भी हुई। नौबत हाथापाई तक आ पहुंची। बताते हैं कि इस बीच इन लोगों ने पुलिस अधिकारी की अलीगढ़ के एक जनप्रतिनिधि से फोन पर बात करा दी, जिसके बाद उपनिरीक्षक ने अपर पुलिस अधीक्षक से फोन पर बात की। एएसपी ने उनसे कहा कि वह इन लोगों से लिखवाकर ले लें कि वह स्वेच्छा से शव को ले जा रहे हैं, और उन्हें कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करनी है। इन लोगों ने वहां पुलिस को यह लिखकर दिया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें शव को वहां से ले जाने दिया।
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