{"_id":"5f68f2238ebc3e8bae38ad2f","slug":"protest-against-government-hathras-news-ali244394990","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकार की नीतियों के खिलाफ आढ़तियों ने बंद रखीं दुकानें, प्रदर्शन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकार की नीतियों के खिलाफ आढ़तियों ने बंद रखीं दुकानें, प्रदर्शन
विज्ञापन
एसडीएम सदर को ज्ञापन देते आढ़तिया।
- फोटो : HATHRAS
आढ़तिया एसोसिएशन ने सरकार की नीतियों का विरोध करते हुए यहां अपनी फर्में बंद रखीं। इस वजह से मंडी परिसर में सन्नाटा पसरा रहा। आढ़तिया एसोसिएशन ने नारेबाजी के बीच प्रदर्शन किया। अपनी मांगों को लेकर एसडीएम सदर को ज्ञापन भी सौंपा।
तयशुदा कार्यक्रम के तहत सरकार की नीतियों के खिलाफ आढ़तियों ने यहां मंडी समिति को बंद रखा। इसकी वजह से पूरे दिन मंडी परिसर में सन्नाटा पसरा रहा। यह हड़ताल 26 सितंबर तक जारी रहेगी। किसान व बाहर के व्यापारी आए तो वह मायूस होकर लौट गए। इस दौरान सभी आढ़ती मंडी समिति स्थित हनुमान जी के मंदिर पर एकत्रित हुए। वहां इन आढ़तियों ने सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए तहसील में सभापति और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के दफ्तर पर पहुंचकर उन्हें ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आढ़तियों ने कहा है कि वह सरकार की व्यापारी और किसान विरोधी नीतियों का पुरजोर विरोध करते हैं, जिससे लाखों-करोड़ों परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं।
मंडी परिसर के अंदर 2.5 फीसदी मंडी शुल्क व विकास शुल्क है। मंडी परिसर के बाहर कोई भी कर नहीं है। ऐसी असमानता भरी नीतियों के कारण व्यापार खत्म होने की कगार पर है। मंडी परिसर में कार्यरत आढ़तिया हमेशा किसान हित में काम करता है। जिन आढ़तियों को मंडी समिति ने जीएसटी और अन्य विभागों ने लाइसेंस दे रखा है और जो आजादी के समय से व्यापार कर रहे हैं। आज सरकार उन आढ़तियों को बिचौलिया कहकर उनका अपमान कर रही है। सरकार इन व्यापारियों का व्यापार चौपट कर उनको बेरोजगार बना रही है। ज्ञापन में कहा गया है कि कोरोना संक्रमण काल में सभी प्रकार के व्यापार ठप पड़े हुए हैं।
विज्ञापन
ऐसे समय में लाखों-करोड़ों आढ़ती और व्यापारी परिवारों को बेरोजगार बनाकर सरकार देश में अराजकता का माहौल पैदा कर रही है। प्रदर्शन में उमाशंकर वार्ष्णेय, प्रवीण वार्ष्णेय, मुकेश बंसल, अनिल वार्ष्णेय, तरुण पंकज, विजय वार्ष्णेय, संजय कुमार, राजेश वार्ष्णेय, मदनलाल, भोलाशंकर शर्मा, अमित शर्मा, बौ. विनोद शर्मा, नरेंद्र बंसल, भानुप्रकाश, राकेश गुप्ता, विनोद कुमार शर्मा, अरुण अग्रवाल, दीपक अग्रवाल, हरीश वार्ष्णेय, अनिल गुप्ता, मनीष अग्रवाल, अमन बंसल, नवनीत वार्ष्णेय, विशन वार्ष्णेय, पवन कुमार, विष्णु अग्रवाल, राजकुमार अग्रवाल, कुंवरपाल सिंह, सौरभ वार्ष्णेय आदि थे।
विज्ञापन
तयशुदा कार्यक्रम के तहत सरकार की नीतियों के खिलाफ आढ़तियों ने यहां मंडी समिति को बंद रखा। इसकी वजह से पूरे दिन मंडी परिसर में सन्नाटा पसरा रहा। यह हड़ताल 26 सितंबर तक जारी रहेगी। किसान व बाहर के व्यापारी आए तो वह मायूस होकर लौट गए। इस दौरान सभी आढ़ती मंडी समिति स्थित हनुमान जी के मंदिर पर एकत्रित हुए। वहां इन आढ़तियों ने सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए तहसील में सभापति और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के दफ्तर पर पहुंचकर उन्हें ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आढ़तियों ने कहा है कि वह सरकार की व्यापारी और किसान विरोधी नीतियों का पुरजोर विरोध करते हैं, जिससे लाखों-करोड़ों परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं।
विज्ञापन
मंडी परिसर के अंदर 2.5 फीसदी मंडी शुल्क व विकास शुल्क है। मंडी परिसर के बाहर कोई भी कर नहीं है। ऐसी असमानता भरी नीतियों के कारण व्यापार खत्म होने की कगार पर है। मंडी परिसर में कार्यरत आढ़तिया हमेशा किसान हित में काम करता है। जिन आढ़तियों को मंडी समिति ने जीएसटी और अन्य विभागों ने लाइसेंस दे रखा है और जो आजादी के समय से व्यापार कर रहे हैं। आज सरकार उन आढ़तियों को बिचौलिया कहकर उनका अपमान कर रही है। सरकार इन व्यापारियों का व्यापार चौपट कर उनको बेरोजगार बना रही है। ज्ञापन में कहा गया है कि कोरोना संक्रमण काल में सभी प्रकार के व्यापार ठप पड़े हुए हैं।
विज्ञापन
ऐसे समय में लाखों-करोड़ों आढ़ती और व्यापारी परिवारों को बेरोजगार बनाकर सरकार देश में अराजकता का माहौल पैदा कर रही है। प्रदर्शन में उमाशंकर वार्ष्णेय, प्रवीण वार्ष्णेय, मुकेश बंसल, अनिल वार्ष्णेय, तरुण पंकज, विजय वार्ष्णेय, संजय कुमार, राजेश वार्ष्णेय, मदनलाल, भोलाशंकर शर्मा, अमित शर्मा, बौ. विनोद शर्मा, नरेंद्र बंसल, भानुप्रकाश, राकेश गुप्ता, विनोद कुमार शर्मा, अरुण अग्रवाल, दीपक अग्रवाल, हरीश वार्ष्णेय, अनिल गुप्ता, मनीष अग्रवाल, अमन बंसल, नवनीत वार्ष्णेय, विशन वार्ष्णेय, पवन कुमार, विष्णु अग्रवाल, राजकुमार अग्रवाल, कुंवरपाल सिंह, सौरभ वार्ष्णेय आदि थे।