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रात भर छाया कोहरा, सुबह गलन ने छुड़ाए छक्के 

Sat, 06 Jan 2018 11:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस। 
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस।  Updated Sat, 06 Jan 2018 11:18 PM IST
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Overnight shadow fog, Trouble in morning
कोहरे में लाइट जला कर निकलते वाहन। - फोटो : Amar Ujala
जनजीवन पर शीतलहर का कहर थम नहीं रहा है। शुक्रवार को भी पूरी रात शहर घने कोहरे की आगोश में रहा। कोहरे की धुंध के बीच ही शनिवार की सुबह शहरवासियों ने आंखें खोलीं। हालांकि दोपहर के वक्त सूरज ठंड से ठिठुरते लोगों पर कुछ मेहरबान हुआ।
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सूर्य की किरणें बिखरने के साथ निकली धूप ने ठिठुरते-कांपते लोगों में मानो नई जान फूंक दी। लोगों ने पूरी दोपहरी धूप का पूरा लुत्फ उठाया, लेकिन शाम होते ही गलन ने फिर कंपकंपी छुड़ा दी। ठंड से मुकाबले के लिए जगह-जगह अलाव सुलग उठे। खुली सड़कों पर घूमते लोग भी घरों में घुसने की जल्दी में दिखाई दिए। घरों के अंदर और दुकानों पर अलाव, अंगीठी और हीटर जल उठे और सर्दी से राहत पाने को लोग इनसे चिपक गए। 
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पिछले 10 दिनों से लोग कोहरे और शीतलहर की मार से बेहाल हैं। शाम ढलते ही कोहरे का जो कहर शुरू होता है, वह अगले दिन दोपहर तक चलता है। पिछले दो दिनों से इतनी गनीमत है कि दोपहर के वक्त धूप खिल रही है, वरना तो शीतलहर अब तक लोगों को संभलने का भी मौका नहीं दे रही थी। शुक्रवार को शाम ढलने तक गहराए कोहरे ने शनिवार की सुबह तक पूरे जिले को अपनी गिरफ्त में रखा। कोहरे की धुंध में ट्रैफिक की रफ्तार पूरी रात सुस्त पड़ी रही।
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वाहनों का कारवां रेंग-रेंगकर आगे बढ़ रहा था या फिर धुंध के आगे वाहन चालकों की हिम्मत जवाब दे गई और उन्होंने अपने वाहन तब तक के लिए सड़क किनारे खड़े कर दिए, जब तक कोहरा नहीं छंट जाए। पूरी रात वाहन एक-दूसरे के पीछे चलते रहे। खुले में रहने वालों ने पूरी रात अलावों के सहारे काटी। इन अलावों से इंसान ही नहीं, बल्कि जानवर भी सर्दी से जंग लड़ते नजर आए। सड़कों पर रहने वाले बाकी लोग भी दुकानों, प्रतिष्ठानों और मंदिरों के बरामदों में शरण लिए रहे। शीतलहर और कोहरे के प्रकोप से फिलहाल राहत मिलने के आसार नहीं दिख रहे। कृषि विभाग की मानें तो अभी कम से कम एक हफ्ते और लोगों को सर्दी का यह रूप देखने को मिल सकता है।

बेसहाराओं के लिए सरकारी इंतजाम नाकाफी

खुले में जिंदगी बसर करने वालों के लिए प्रशासन की तरफ से अलाव और रैन बसेरों का जो इंतजाम किया गया है, वह नाकाफी साबित हो रहा है। शहर में कई ऐसे प्रमुख स्थान भी हैं, जहां सरकारी अलाव दिखाई ही नहीं दे रहे। यहां लोगों को इधर-उधर से लकड़ियों या फिर घास-फूस का इंतजाम करके अलाव सुलगाने पड़ रहे हैं। पूरे शहर में सिर्फ एक ही रैन बसेरे का इंतजाम नगर पालिका प्रशासन ने किया है। वह भी नगर पालिका परिसर में, जबकि शहर के हर कोने से बेसहाराओं के लिए यहां तक पहुुंच पाना आसान नहीं है।


जिला प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं की तरफ से रैन बसेरे का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। यही नहीं बागला जिला अस्पताल में बना रैन बसेरा भी फिलहाल बंद पड़ा है। यह न तो मरीजों के काम आ रहा है और न ही आम लोगों के, जबकि सर्दी में इस तरह के ज्यादा से ज्यादा रैन बसेरों की जरूरत है। जानकारों की मानें तो सरकारी तंत्र की तरफ से अलाव जलवाने में भी खानापूरी की जा रही है। प्रशासन के कंबल भी अभी तक बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक जगहों पर रात बसर करने वालों की पहुंच से दूर हैं।
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