Hathras Mahotsav: 18 लाख के कूपन से विभागीय अफसर हैं परेशान, एडीएम हैं अंजान, 15 दिसंबर से है आयोजन
15 दिसंबर से शुरू होने वाले हाथरस महोत्सव को लेकर विभागीय अफसरों के माथे पर बल आ गया है। महोत्सव को लेकर पर्यटन विभाग व प्रशासन की ओर से कूपन छपवाए गए हैं। 200 रुपये व 500 रुपये के कूपन हैं। इन कूपनों को अब विभागीय अफसरों को वितरित कर दिए गए हैं। दोनों तरह के कूपन चर्चा में आ गए हैं।
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हाथरस महोत्सव को लेकर प्रशासन की ओर से तैयारियों को खींचा जा रहा है। 15 दिसंबर से शुरू होने वाले हाथरस महोत्सव को लेकर प्रशासन व पर्यटन विभाग ने विभागीय अफसरों को 18 लाख रुपये के कूपन दे दिए हैं। इन कूपनों की बिक्री को लेकर अब विभागीय अफसर परेशान हैं।
विभागीय अफसरों ने यह कूपन अपने अधीनस्थों को दे दिए हैं। इससे अब अधीनस्थ परेशान हैं। हालांकि हाथरस महोत्सव को लेकर विगत में ही प्रदेश सरकार की ओर से 30 लाख रुपये की धनराशि जारी की जा चुकी है। वहीं केंद्र सरकार ने भी 25 लाख रुपये की धनराशि दिए जाने की स्वीकृति दे दी है। हाल यह है कि महोत्सव में 75 दुकानें भी बुक हो चुकी है, इन दुकानों से भी धनराशि ली जा रही है। इसके बावजूद कूपन को लेकर कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
15 दिसंबर से शुरू होने वाले सात दिवसीय हाथरस महोत्सव को लेकर विभागीय अफसरों के माथे पर बल आ गया है। इस महोत्सव को भव्यता देने के लिए विभागीय अफसर भी अपनी अपनी तरफ से हर संभव प्रयास कर रहे थे। अब इस महोत्सव को लेकर पर्यटन विभाग व प्रशासन की ओर से कूपन छपवाए गए हैं। इनमें दो तरह के कूपन हैं। 200 रुपये व 500 रुपये के कूपन हैं। इन कूपनों को अब विभागीय अफसरों को वितरित कर दिए गए हैं। इन कूपनों की विभागीय अफसर अपने माध्यम से बिक्री कराएं और प्रशासन को धनराशि एकत्रित कर देंगे।
हैरानी की बात यह है कि विभागों को लाखों रुपये के कूपन दे दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से 18 लाख रुपये के कूपन वितरित किए गए हैं। अफसरों ने कूपन तो उच्चाधिकारियों के भय के चलते ले लिए हैं, लेकिन इनको अधीनस्थों को दे दिए हैं। प्रशासन को दावा हैं कि इन कूपनों के माध्यम से कूपन लेने वाले को झूलों व स्टॉलों पर छूट दी जाएगी, लेकिन कितनी छूट मिलेगी, इसे लेकर अभी कोई स्थिति स्पष्ट नहीं की है। वहीं कूपन के जरिये ड्रा निकालने का हवाला भी दिया जा रहा है, लेकिन अभी तक ड्रा कैसे और ड्रा में क्या निकलेगा यह भी सवालों में ही छिपा हुआ है।
सरकारी धन खर्च की तो होगी ऑडिट, कूपन का कैसे बनेगा हिसाब
सरकार से मिलने वाली धनराशि की तो ऑडिट के माध्यम से खर्च की जानकारी ले ली जाएगी, लेकिन प्रशासन की ओर से छपवाए गए कूपन का किस मद व किस तरह से पारदर्शिता के साथ खर्च हो सकेगा। इसे लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। कूपन को प्रशासन किस सरकारी खर्च में दर्शाकर ऑडिट कराएगा, यह भी सवाल खड़ा हो गया है।
सात दिवसीय कार्यक्रम को भव्य बनाए जाने के लिए अधिक धनराशि की आवश्यकता पड़ रही है। इसके चलते कूपन वितरित किए गए हैं। किसी पर कोई दबाव नहीं है, अपनी इच्छा से बिक्री कर सकते हैं। कूपन का लकी ड्रा भी निकाला जाएगा। - विशाल श्रीवास्तव, जिला पर्यटन सूचना अधिकारी।
कूपन को लेकर एक बैठक के दौरान कुछ विचार-विमर्श हुआ था, लेकिन पूरी तरह से मामला संज्ञान में नहीं है। इस संबंध में पर्यटन सूचना अधिकारी ही पूरी जानकारी दे सकेंगे। - डॉ. बसंत अग्रवाल, एडीएम वित्त एवं राजस्व।