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नोटबंदी ने बिगाड़ा हींग उद्योग का जायका
अमर उजाला, हाथरस
Updated Wed, 23 Nov 2016 11:22 PM IST
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हींग तैयार होने के बाद बिक्री करने के लिए पॉलीथीन में पैक करते हुए (फाइल फोटो)।
- फोटो : अमर उजाला
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विकास शर्मा
नोटबंदी ने हाथरस के नामचीन हींग उद्योग का जायका बिगाड़ दिया है। मोदी सरकार के इस फैसले के बाद शहर का यह लघु उद्योग फिलहाल ठप होने के कगार पर पहुंच गया है। इस उद्योग से प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से जुड़े तकरीबन ढाई से तीन हजार मजदूर भी बेकार हो चुके हैं। शहर में हींग की करीब 60-70 छोटी-बड़ी फैक्ट्रियां हैं और इतने ही ट्रेडर्स हैं।
शहर के गली-मोह्ल्लों और कालोनियों तक यह कारोबार कई वर्षों से चल रहा है। नोटबंदी के बाद हर दिन इस उद्योग की हालत खराब होती जा रही है। ज्यादातर मजदूरों को नकद भुगतान किया जाता है। नोट बंदी के कारण भुगतान में दिक्कत आ रही है। नोट बंदी संकट का असर हींद निर्माताओं को मिलने वाले आर्डर पर भी पड़ रहा है।
हींग निर्माताओं को दूसरे शहरों और राज्यों से दूर, अपने शहर के भी आर्डर नहीं मिल रहे। ऐसे में हींग का और उत्पादन करके वह अपनी पूंजी फंसाने का जोखिम कैसे ले सकते हैं। हींग उद्योग में नोटबंदी के बाद हर दिन लगभग 15 से 20 लाख रुपये का नुकसान कारोबारी को उठाना पड़ रहा है। जिन फैक्ट्रियों से आम दिनों में हींग की तेज महक उठती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है।
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फैक्ट्री मालिक आर्डर के इंतजार में हैं, तो ट्रेडर्स की आंखें भी ग्राहकों की आस में पथरा रही हैं। कारोबारियों की मानें कारोबारी महीने-दो महीने यही हालात रहे, तो इस लघु उद्योग की कमर पूरी तरह टूट जाएगी। लेबर ही नहीं, बल्कि इससे जुड़े निर्माताओं और कारोबारियों के सामने भी गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा और वह बेरोजगार होने के कगार पर पहुंच जाएंगे।
हाथरस की मशहूर हींग के कद्रदान यूपी, राजस्थान और दिल्ली में सबसे ज्यादा हैं। इसके अलावा उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के अलावा नेपाल तक भी हाथरस की हींग सप्लाई होती है।
नोटबंदी का कारोबार पर बुरा असर पड़ा है। काम पूरी तरह ठप है। लेबर बेकार हो गई है। बाहर से मांग ही नहीं है तो उत्पादन करके क्या करेंगे। जब खरीदार ही नहीं हैं तो माल की डिमांड कैसे आएगी।
- राकेश बंसल, हींग निर्माता
नोटबंदी का कारोबार पर असर तो है, लेकिन यह दीर्घकालिक नहीं है। बड़े लेन-देन बंद होने से कारोबार में गिरावट भी आई है। उम्मीद है कि जल्द मुद्रा का प्रवाह बढ़ेगा तो हालात सुधर जाएंगे।
- मनोज अग्रवाल, हींग निर्माता
मुद्रा विनियमन के चलते कुछ दिन की मंदी है। जैसे ही नई करेंसी पर्याप्त मात्रा में बाजार में आएगी तो उम्मीद है कि हालत सुधरेगी। वैसे कारोबार पर नोटबंदी का असर तो है।
- रामबिहारी अग्रवाल, हींग निर्माता
बाजार में जब खरीदार ही नहीं होंगे तो माल की बिक्री पर असर तो पड़ेगा ही। फिलहाल कारोबार पूरी तरह प्रभावित है। 80 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की जा रही है।
- राधेलाल, हींग कारोबारी
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नोटबंदी ने हाथरस के नामचीन हींग उद्योग का जायका बिगाड़ दिया है। मोदी सरकार के इस फैसले के बाद शहर का यह लघु उद्योग फिलहाल ठप होने के कगार पर पहुंच गया है। इस उद्योग से प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से जुड़े तकरीबन ढाई से तीन हजार मजदूर भी बेकार हो चुके हैं। शहर में हींग की करीब 60-70 छोटी-बड़ी फैक्ट्रियां हैं और इतने ही ट्रेडर्स हैं।
शहर के गली-मोह्ल्लों और कालोनियों तक यह कारोबार कई वर्षों से चल रहा है। नोटबंदी के बाद हर दिन इस उद्योग की हालत खराब होती जा रही है। ज्यादातर मजदूरों को नकद भुगतान किया जाता है। नोट बंदी के कारण भुगतान में दिक्कत आ रही है। नोट बंदी संकट का असर हींद निर्माताओं को मिलने वाले आर्डर पर भी पड़ रहा है।
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हींग निर्माताओं को दूसरे शहरों और राज्यों से दूर, अपने शहर के भी आर्डर नहीं मिल रहे। ऐसे में हींग का और उत्पादन करके वह अपनी पूंजी फंसाने का जोखिम कैसे ले सकते हैं। हींग उद्योग में नोटबंदी के बाद हर दिन लगभग 15 से 20 लाख रुपये का नुकसान कारोबारी को उठाना पड़ रहा है। जिन फैक्ट्रियों से आम दिनों में हींग की तेज महक उठती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है।
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फैक्ट्री मालिक आर्डर के इंतजार में हैं, तो ट्रेडर्स की आंखें भी ग्राहकों की आस में पथरा रही हैं। कारोबारियों की मानें कारोबारी महीने-दो महीने यही हालात रहे, तो इस लघु उद्योग की कमर पूरी तरह टूट जाएगी। लेबर ही नहीं, बल्कि इससे जुड़े निर्माताओं और कारोबारियों के सामने भी गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा और वह बेरोजगार होने के कगार पर पहुंच जाएंगे।
हाथरस की मशहूर हींग के कद्रदान यूपी, राजस्थान और दिल्ली में सबसे ज्यादा हैं। इसके अलावा उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के अलावा नेपाल तक भी हाथरस की हींग सप्लाई होती है।
नोटबंदी का कारोबार पर बुरा असर पड़ा है। काम पूरी तरह ठप है। लेबर बेकार हो गई है। बाहर से मांग ही नहीं है तो उत्पादन करके क्या करेंगे। जब खरीदार ही नहीं हैं तो माल की डिमांड कैसे आएगी।
- राकेश बंसल, हींग निर्माता
नोटबंदी का कारोबार पर असर तो है, लेकिन यह दीर्घकालिक नहीं है। बड़े लेन-देन बंद होने से कारोबार में गिरावट भी आई है। उम्मीद है कि जल्द मुद्रा का प्रवाह बढ़ेगा तो हालात सुधर जाएंगे।
- मनोज अग्रवाल, हींग निर्माता
मुद्रा विनियमन के चलते कुछ दिन की मंदी है। जैसे ही नई करेंसी पर्याप्त मात्रा में बाजार में आएगी तो उम्मीद है कि हालत सुधरेगी। वैसे कारोबार पर नोटबंदी का असर तो है।
- रामबिहारी अग्रवाल, हींग निर्माता
बाजार में जब खरीदार ही नहीं होंगे तो माल की बिक्री पर असर तो पड़ेगा ही। फिलहाल कारोबार पूरी तरह प्रभावित है। 80 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की जा रही है।
- राधेलाल, हींग कारोबारी