{"_id":"6505d799cc14fc1fc306d6d8","slug":"money-was-withdrawn-by-using-fake-thumbprints-2023-09-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"इलाहाबाद हाईकोर्ट: तत्कालीन प्रधान को दी जमानत, फर्जी अंगूठे लगा कर निकाले थे रुपये, यह है मामला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इलाहाबाद हाईकोर्ट: तत्कालीन प्रधान को दी जमानत, फर्जी अंगूठे लगा कर निकाले थे रुपये, यह है मामला
Sat, 16 Sep 2023 09:58 PM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: चमन शर्मा
Updated Sat, 16 Sep 2023 09:58 PM IST
सार
15 साल पहले हुए मनरेगा घोटाले में तत्कालीन प्रधान कांता देवी समेत दस लोगों के खिलाफ विजलेंस जांच के बाद सिकंदराराऊ थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। मामले में हाथरस के तत्कालीन जिला पंचायत अधिकारी जगदीश प्रसाद अहिरवार सहित 10 को आरोपी बनाया गया था।
विज्ञापन
इलाहबाद हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाथरस जिले के पीपलगंवा गांव में 15 साल पहले मनरेगा के तहत नाली नालों के निर्माण में सरकारी धन के गबन मामले में गांव की तत्कालीन प्रधान कांता देवी की जमानत मंजूर कर ली है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजबीर सिंह की अदालत ने दिया।
विज्ञापन
कांता देवी 25 जुलाई से जेल में है। 15 साल पहले हुए मनरेगा घोटाले में तत्कालीन प्रधान कांता देवी समेत दस लोगों के खिलाफ विजलेंस जांच के बाद सिकंदराराऊ थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। मामले में हाथरस के तत्कालीन जिला पंचायत अधिकारी जगदीश प्रसाद अहिरवार, ग्राम पंचायत अधिकारी प्रकाश वीर सिंह, ग्राम विकास अधिकारी सूरजपाल सिंह, ईश्वर चन्द, लघु सिंचाई विभाग के तत्कालीन अवर अभियंता सौदान सिंह, ग्राम अगसौली की तत्कालीन प्रधान विमलेश कुमारी, सेवानिवृत हो चुके सहायक विकास अधिकारी भगवत सिंह और सिकंदराराउ ब्लॉक के तत्कालीन खंड विकास अधिकारी को आरोपी बनाया गया था।
विज्ञापन
विजलेंस के निरीक्षक कंचन लाल वर्मा की ओर से दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने मनरेगा के तहत नाले के निर्माण के लिए शासन द्वारा अवमुक्त लगभग साढ़े तीन लाख रुपये का दुरुपयोग किया। बिना नाले का काम कराए भुगतान किया। काम में लगे जिन श्रमिकों का अंगूठा लगा कर रुपये निकाले गए, वो वास्तव में पढ़े लिखे थे और उन्होंने काम करने और मजदूरी पाने की बात से इन्कार कर दिया था।
विज्ञापन