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हाथरस जिला अस्पताल: विशेषज्ञ ही नहीं...किस काम के ओटी-आईसीयू व वेंटिलेटर

Sun, 09 Nov 2025 04:52 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: चमन शर्मा Updated Sun, 09 Nov 2025 04:52 PM IST
सार

वेंटिलेटर के संचालन के लिए न तो चिकित्सक हैं, न ही प्रशिक्षित स्टाफ। यहां ओटी टेक्नीशियन का पद खाली पड़ा है। 14 वार्ड आया, 20 वार्ड बॉय व 12 चपरासी के पद खाली पड़े हैं। वार्ड बॉय भी तीन शेष हैं। यहां 25 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, जिनके सापेक्ष 12 ही तैनात हैं।

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Modular Operation Theatre at Hathras District Hospital
हाथरस का बागला जिला अस्पताल - फोटो : संवाद

विस्तार

हाथरस जिला अस्पताल में हाल ही में बनकर तैयार हुआ मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर (ओटी), यहां रखे वेंटिलेटर व आईसीयू वार्ड किसी काम के नहीं हैं। इनके संचालन के लिए न तो चिकित्सक हैं और न ही स्टाफ। यही कारण है कि सासनी के हादसे में घायल हुए लोगों को यहां से रेफर करना पड़ा। प्रभारी मंत्री बेबीरानी मौर्य स्टाफ की कमी दूर कराने का आश्वासन तो देकर गई हैं, लेकिन तैनाती कब तक होगी, कुछ पता नहीं।

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अपनी क्षमता के अनुरूप जिला अस्पताल में संसाधनों की कमी नहीं है, लेकिन इनका गरीब जनता को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा। यहां की सुविधाएं केवल ओपीडी, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सीटी व पैथोलॉजी तक ही सीमित हैं।
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हाल ही में लगभग 50 लाख रुपये से अस्पताल की ऊपरी मंजिल पर ऑपरेशन थियेटर बनकर तैयार हुआ है। इसमें आधुनिक उपकरण रखे गए हैं। साथ ही इसकी दीवारें एंटीबेक्टेरियल हैं। अस्पताल में चार बेड का आईसीयू वार्ड भी है और छह वेंटिलेटर भी रखे हैं, जो काफी समय से एक कमरे में बंद हैं। एक मशीन की कीमत एक लाख रुपये है।

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सड़क हादसों की दृष्टि से हाथरस संवेदनशील जिला है। शहर में ट्राॅमा सेंटर संचालित होना आवश्यक है। इस हफ्ते स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक व अस्पताल का निरीक्षण कर स्थिति का अवलोकन किया जाएगा। इसके बाद शासन में समय लेकर इस समस्या को प्राथमिकता पर रखकर दूर कराया जाएगा।-अतुल वत्स, डीएम

नहीं है प्रशिक्षित स्टाफ

वेंटिलेटर के संचालन के लिए न तो चिकित्सक हैं, न ही प्रशिक्षित स्टाफ। यहां ओटी टेक्नीशियन का पद खाली पड़ा है। 14 वार्ड आया, 20 वार्ड बॉय व 12 चपरासी के पद खाली पड़े हैं। वार्ड बॉय भी तीन शेष हैं। यहां 25 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, जिनके सापेक्ष 12 ही तैनात हैं।

जनरल सर्जन के दोनों पद खाली हैं। ऑर्थो सर्जन का दो में से एक पद खाली है। एनेस्थिसियोलॉजिस्ट के दोनों पद खाली पड़े हैं, ऑपरेशन के लिए मरीज को बेहोश करने वाला कोई नहीं। कॉर्डियोलॉजिस्ट, चेस्ट फिजीशियन, पैथोलॉजिस्ट के पद भी खाली हैं। मन कक्ष के लिए चिकित्सक नहीं हैं, ब्लड बैंक में एक ही चिकित्सक तैनात हैं, जबकि तीन शिफ्ट में कम से कम तीन तो होने ही चाहिए।

रेफर करने पड़े मरीज
सासनी के गांव समामई पर हुए हादसे में चार लोगों की मौत हुई और 21 घायल हुए। घायल महाराज सिंह को बचाया जा सकता था, लेकिन सिर की चोट में समय से उपचार नहीं मिला। यही नहीं जिला अस्पताल लाए गए आठ लोगों को यहां से रेफर करना पड़ा। सीटी स्केन, एक्स-रे व ब्लड बैंक की व्यवस्था होने के बावजूद इन्हें हेड इंजरी की वजह से रेफर करना पड़ा। सर्जन व प्रशिक्षित स्टाफ होता तो यहां उपचार संभव था।

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