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विधायक और समर्थकों पर धमकाने का आरोप
अमर उजाला, हाथरस
Updated Thu, 23 Feb 2017 11:39 PM IST
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एसपी से मिलकर आते पुष्पेंद्र के पिता रामहरी और जिपं अध्यक्ष विनोद उपाध्याय।
- फोटो : अमर उजाला
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सहपऊ के गांव मानिकपुर में चुनावी हिंसा में मृत पुष्पेंद्र के पिता रामहरी शर्मा निवासी सलेमपुर रोड सादाबाद ने पुलिस अधीक्षक से मिलकर उन्हें तहरीर सौंपी है। इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष विनोद उपाध्याय और अन्य लोग भी उनके साथ थे। इससे पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के नेतृत्व में इन सभी ने इस सिलसिले में डीआईजी अलीगढ़ से भी मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा।
एसपी के नाम दी गई तहरीर में रामहरि शर्मा ने कहा है कि 23 फरवरी की सुबह वह सादाबाद में अपने सलेमपुर रोड स्थित आवास के चबूतरे पर बैठे थे। उनके साथ जुगेंद्र सिंह पुत्र नरपति सिंह व हरिओम निवासी नगला ब्राह्मण और रामेश्वर दयाल आदि लोग भी बैठे हुए थे। तभी सादाबाद विधायक देवेंद्र अग्रवाल अपनी चार-पांच अन्य गाड़ियों के साथ हूटर बजाते हुए आए। गाड़ी में सवार व्यक्तियों के पास असलहे थे।
आरोप है कि अन्य गाड़ियों में सवार सात नामजद और इनके आठ-दस अन्य साथी उनके चबूतरे पर आकर बोले कि विधायक के विरुद्ध ज्यादा पैरवी मत करो, अन्यथा तुम्हें और तुम्हारे अन्य पुत्रों को भी पुष्पेंद्र की तरह जान से मार दिया जाएगा। यह कहकर यह लोग गाड़ियों में बैठकर सलेमपुर की तरफ चले गए। रामहरी ने कहा है कि वह विधायक और उनके साथियों से बेहद आतंकित हैं। यह लोग उनके और उनके अन्य बेटों की भी हत्या करा सकते हैं।
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इससे पूर्व इन लोगों ने डीआईजी अलीगढ़ से मिलकर इस मामले की विवेचना ट्रांसफर कराने पर सवाल उठाए और कहा कि अभियुक्तों को जांच को स्थानांतरित कराने का कोई अधिकार नहीं है। यदि ऐसा किया जाता है तो जांच को प्रभावित करना ही माना जाएगा। केवल वादी ही जांच से असंतुष्ट होकर जांच को अन्यंत्र स्थानांतरित कराने की प्रार्थना कर सकता है। रामहरी ने कहा कि जब से विवेचना ट्रांसफर हुई है, तब से अभियुक्त मुझे और मेरे गवाहों को डरा-धमका रहे हैं। उन्होंने जांच स्थानांतरण के आदेश को वापस लेकर दोबारा सहपऊ पुलिस से इसकी जांच कराने और अभियुक्तों को शीघ्र गिरफ्तार कराने की मांग की। रामहरी ने अपने और गवाहों के लिए सुरक्षा भी मांगी।
न मैं रामहरी के घर गया, न किसी को धमकाया
सादाबाद के सपा विधायक और प्रत्याशी देवेंद्र अग्रवाल का कहना है कि न तो मैने रामहरी शर्मा का घर देखा है और न हीं मैं और न हीं मेरे समर्थक कभी उनके घर गए हैं। हमारा इनसे कोई मतलब नहीं है। मैं खुद इस मामले में झूठा आरोपी बनाया गया हूं। मेरी क्या हैसियत है कि मैं किसी को धमकाऊं। मेरे विरोधियों और उपाध्याय परिवार के इशारे पर मेरे खिलाफ अनर्गल शिकायतें की जा रही हैं। मेरी तो पुलिस-प्रशासन से यही मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। अगर मैं दोषी हूं तो मेरे खिलाफ कार्रवाई हो, अन्यथा जिन लोगों ने मुझ पर, मेरे परिवार के लोगों और समर्थकों के खिलाफ झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। विधायक का कहना है कि असलियत में तो हत्या मेरे विरोधियों ने ही की है और झूठा आरोप हमारे परिवार और समर्थकों पर लगा दिया है। झूठा आरोप लगाना इन लोगों की आदत हो गई है। अब ये नई शिकायत भी केवल इनकी नाटकबाजी है। विवेचना कहां और किससे कराई जाए, यह पुलिस का अधिकार है। हम इसमें कैसे दखल दे सकते हैं।
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एसपी के नाम दी गई तहरीर में रामहरि शर्मा ने कहा है कि 23 फरवरी की सुबह वह सादाबाद में अपने सलेमपुर रोड स्थित आवास के चबूतरे पर बैठे थे। उनके साथ जुगेंद्र सिंह पुत्र नरपति सिंह व हरिओम निवासी नगला ब्राह्मण और रामेश्वर दयाल आदि लोग भी बैठे हुए थे। तभी सादाबाद विधायक देवेंद्र अग्रवाल अपनी चार-पांच अन्य गाड़ियों के साथ हूटर बजाते हुए आए। गाड़ी में सवार व्यक्तियों के पास असलहे थे।
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आरोप है कि अन्य गाड़ियों में सवार सात नामजद और इनके आठ-दस अन्य साथी उनके चबूतरे पर आकर बोले कि विधायक के विरुद्ध ज्यादा पैरवी मत करो, अन्यथा तुम्हें और तुम्हारे अन्य पुत्रों को भी पुष्पेंद्र की तरह जान से मार दिया जाएगा। यह कहकर यह लोग गाड़ियों में बैठकर सलेमपुर की तरफ चले गए। रामहरी ने कहा है कि वह विधायक और उनके साथियों से बेहद आतंकित हैं। यह लोग उनके और उनके अन्य बेटों की भी हत्या करा सकते हैं।
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इससे पूर्व इन लोगों ने डीआईजी अलीगढ़ से मिलकर इस मामले की विवेचना ट्रांसफर कराने पर सवाल उठाए और कहा कि अभियुक्तों को जांच को स्थानांतरित कराने का कोई अधिकार नहीं है। यदि ऐसा किया जाता है तो जांच को प्रभावित करना ही माना जाएगा। केवल वादी ही जांच से असंतुष्ट होकर जांच को अन्यंत्र स्थानांतरित कराने की प्रार्थना कर सकता है। रामहरी ने कहा कि जब से विवेचना ट्रांसफर हुई है, तब से अभियुक्त मुझे और मेरे गवाहों को डरा-धमका रहे हैं। उन्होंने जांच स्थानांतरण के आदेश को वापस लेकर दोबारा सहपऊ पुलिस से इसकी जांच कराने और अभियुक्तों को शीघ्र गिरफ्तार कराने की मांग की। रामहरी ने अपने और गवाहों के लिए सुरक्षा भी मांगी।
न मैं रामहरी के घर गया, न किसी को धमकाया
सादाबाद के सपा विधायक और प्रत्याशी देवेंद्र अग्रवाल का कहना है कि न तो मैने रामहरी शर्मा का घर देखा है और न हीं मैं और न हीं मेरे समर्थक कभी उनके घर गए हैं। हमारा इनसे कोई मतलब नहीं है। मैं खुद इस मामले में झूठा आरोपी बनाया गया हूं। मेरी क्या हैसियत है कि मैं किसी को धमकाऊं। मेरे विरोधियों और उपाध्याय परिवार के इशारे पर मेरे खिलाफ अनर्गल शिकायतें की जा रही हैं। मेरी तो पुलिस-प्रशासन से यही मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। अगर मैं दोषी हूं तो मेरे खिलाफ कार्रवाई हो, अन्यथा जिन लोगों ने मुझ पर, मेरे परिवार के लोगों और समर्थकों के खिलाफ झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। विधायक का कहना है कि असलियत में तो हत्या मेरे विरोधियों ने ही की है और झूठा आरोप हमारे परिवार और समर्थकों पर लगा दिया है। झूठा आरोप लगाना इन लोगों की आदत हो गई है। अब ये नई शिकायत भी केवल इनकी नाटकबाजी है। विवेचना कहां और किससे कराई जाए, यह पुलिस का अधिकार है। हम इसमें कैसे दखल दे सकते हैं।