10 साल से कटा हुआ है स्कूल का विद्युत कनेक्शन: लड़ाई बिजली विभाग और कॉलेज प्रबंधन की, सजा भुगत रहे विद्यार्थी
गर्मी अधिक होने की स्थिति में कॉलेज में जेनरेटर चलाया जाता है। यह जेनरेटर चौथे व पांचवें घंटे पर ही चलता है। सुबह से लेकर लगभग दस बजे तक कॉलेज में पढ़ने वाली विद्यार्थियों को गर्मी में ही पढ़ना पड़ता है। इस कारण विद्यार्थी अपने साथ छोटे-छोटे पंखे लेकर आते हैं। कुछ विद्यार्थी कॉपियों से हवा करने लगते हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हाथरस में कस्बा सहपऊ स्थित एमएल इण्टर कॉलेज का बिजली का कनेक्शन पिछले 10 से कटा हुआ है। इसको लेकर विवाद न्यायालय तक पहुंच गया, लेकिन कनेक्शन नहीं जुड़ पाया है। ऐसे में भीषण गर्मी में 720 विद्यार्थी परेशान है। कॉलेज में वैसे तो जेनरेटर भी है, लेकिन वह भी बामुश्किल दो घंटे ही चलता है। गर्मी से परेशान छात्र शिक्षकों से पूछते हैं कि उनका क्या कसूर है, बहुत गर्मी लगती है, शिक्षक भी उन्हें कुछ जवाब नहीं दे पाते।
यह सहपऊ क्षेत्र में एक मात्र वित्त विपोषित विज्ञान वर्ग का इंटर कॉलेज है। बताया जा रहा है कि वर्ष 2013 में बिल अधिक होने और बिजली चोरी के आरोप में विभाग ने कॉलेज का कनेक्शन काट दिया है। इस मामले में कॉलेज प्रबंधन न्यायालय में चला गया था। बिजली विभाग का कहना है कि जब टीम यहां चेकिंग करने गई थी तो विद्युत मीटर से बिजली नहीं चल रही थी। कॉलेज प्रबंधन का कहना है जब बिजली विभाग ने कनेक्शन काटा तो उस समय मीटर रीडिंग शून्य थी। बिजली विभाग ने ही जानबूझकर कनेक्शन मीटर से नहीं जोड़ा था। यदि उनके द्वारा बिजली मीटर से कनेक्शन किया जाता तो कुछ न कुछ रीडिंग जरूर बताता। उस समय कॉलेज पर बिजली विभाग का लगभग 75 हजार रुपये बकाया था, जो अब बढ़कर लगभग दो लाख रुपये हो गया है।
अपने घर से हाथ के पंखे लेकर आते हैं विद्यार्थी
गर्मी अधिक होने की स्थिति में कॉलेज में जेनरेटर चलाया जाता है। यह जेनरेटर चौथे व पांचवें घंटे पर ही चलता है। सुबह से लेकर लगभग दस बजे तक कॉलेज में पढ़ने वाली विद्यार्थियों को गर्मी में ही पढ़ना पड़ता है। इस कारण विद्यार्थी अपने साथ छोटे-छोटे पंखे लेकर आते हैं। कुछ विद्यार्थी कॉपियों से हवा करने लगते हैं। जब कभी जेनरेटर खराब हो जाता है तो विद्यार्थियों को पूरे दिन ही गर्मी में बैठना पड़ता है। कॉलेज में जब बोर्ड की परीक्षाएं होती हैं तो उनके लिए अस्थायी रूप से कनेक्शन लिया जाता है और बोर्ड परीक्षाएं समाप्त होने के बाद उसे कटवा दिया जाता है।
दूसरा जेनरेटर पड़ा है खराब
इस कॉलेज में सन 1993 में सरकार की ओर से व्यावसायिक शिक्षा पर जोर दिया गया और इस योजना के तहत ही कॉलेज को पेट्रोल व गैस से चलने वाला जेनरेटर उपलब्ध कराया था। 2008 में कॉलेज में कम्प्यूटर शिक्षा सत्र चलना प्रारम्भ हुआ था। अब वह खराब पड़ा हुआ है। उसे ठीक ही नहीं कराया गया।
हमारे कॉलेज में केवल दो घंटे के लिए जेनरेटर चलाया जाता है, बाकी पूरे दिन गर्मी में ही पढ़ना पड़ता है। पढ़ाने वाले अध्यापक की नजर बचाकर हम लोग कापी से जब कभी हवा करके समय निकालते हैं।-नितिन पचौरी, कक्षा 12
गर्मी में मेरे साथ मेरे साथ पढ़ने वाले अन्य विद्यार्थियों का तो हाल ही बुरा है। गर्मी सुबह से ही पड़ना शुरू होती है लेकिन हमारे कक्षा में लगे पंखे कभी दस बजे तो कभी 11 बजे से पहले चलना शुरू नहीं होते ।-विकास कुमार, कक्षा 11
हमारे कॉलेज में पढ़ाई तो अच्छी होती है परन्तु गर्मी के कारण हम लोग पढ़ नहीं पाते। पंखे दस बजे से चलते है और पांचवे घंटे में फिर बंद हो जाते है। गर्मी में हाथ के पंखे अथवा कॉपी से हवा करने में एकाग्रता भंग होती है।-कुमारी उन्नति, कक्षा 10
हमारी कक्षा में कम से कम 65 से लेकर 70 विद्यार्थी पढ़ते हैं गर्मी के कारण काफी हालत पतली हो जाती है ,हमारी कोई सुनता भी नहीं है।-यतेंद्र कुमार, कक्षा 9
विद्यालय का बिजली कनेक्शन सन 2013 से कटा हुआ है। बच्चों से पंखा शुल्क एक रुपया निर्धारित है । जेनरेटर चलाने में 500 रुपये का डीजल मुश्किल से दो दिन चल पाता है।-सूरजपाल सिंह, प्रधानाचार्य, एमएल इण्टर कॉलेज।
एमएल इण्टर कॉलेज का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। इस मामले की पूरी जांच पड़ताल करवा कर ही कुछ बता सकता हूं।-अमित कुमार अधिशासी अभियंता विद्युत विभाग
विद्युत विभाग के साथ बिजली कनेक्शन काटने को लेकर स्कूल और विद्युत विभाग के बीच न्यायालय में मामला चल रहा है। इस कारण बिजली का कनेक्शन नहीं है। मैंने प्रधानाचार्य को दूसरे कनेक्शन के लिए बोला है। इसके साथ ही कॉलेज में जेनरेटर सुविधा उपलब्ध है। बीच में वह जेनरेटर दो दिन के लिए खराब हो गया था, अब वह ठीक हो गया है।-संतोष गुप्ता, प्रबंधक, एमएल इंटर कॉलेज सहपऊ।