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नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को उम्रकैद
अमर उजाला, हाथ्ारस
Updated Tue, 21 Mar 2017 12:11 AM IST
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court shimla
अपर सत्र एसएन त्रिपाठी के न्यायालय ने दुष्कर्म, गाली-गलौज, धमकी एवं पॉक्सो एक्ट के आरोपी को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने उसे सश्रम आजीवन कारावास और 40 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में 10 माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक वादी की ओर से पिछले साल 26 जून को पुलिस अधीक्षक को शिकायत दी गई थी, जिसमें कोतवाली हाथरस जंक्शन क्षेत्र के एक गांव में नाबालिग लड़की को एक युवक द्वारा लगातार छह माह तक दुष्कर्म का शिकार बनाए जाने का आरोप लगाया गया था।
शिकायत के बाद पुलिस ने जब किशोरी का बयान दर्ज किया तो किशोरी ने युवक द्वारा उसकी बदनामी करने एवं जान से मारने की धमकी देने की भी जानकारी दी। पीड़िता के पिता ने एसपी को यह भी बताया कि उसने दो बार पुलिस को हिम्मत कर इस संबंध में तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज करते हुए कार्रवाई करने की मांग भी की, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की।
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पीड़िता ने पुलिस को यह भी बताया कि अंतिम बार उसके साथ 26 अगस्त 2015 को सुबह आरोपी रंजीत ने उसकी पुत्री के साथ रक्षाबंधन से तीन दिन पहले दुष्कर्म किया। पीड़ित पक्ष ने इस मामले में उच्च न्यायालय में भी गुहार लगाई थी। वहां से जिला एवं सत्र न्यायालय को एक साल के भीतर मुकदमे का निस्तारण का आदेश दिया गया।
एफआईआर नहीं करने पर एसओ से जवाब तलब
प्रभारी जनपद न्यायाधीश एसएन त्रिपाठी के न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना करने के आरोप में कोतवाली हाथरस गेट के प्रभारी निरीक्षक रजनेश तिवारी का जवाब तलब किया है। उन्होंने कोतवाल को पांच दिन में जबाव दाखिल करने के निर्देश जारी किए हैं और कहा है कि क्यों नहीं उनके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवमानता के आरोप में कार्रवाई की जाए। दरअसल, राजकुमार निवासी गली पैठ चामड़ गेट हाथरस ने न्यायालय में एक आवेदन देकर कोतवाली हाथरस गेट पुलिस द्वारा उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं करने के आरोप लगाए थे, जिसे न्यायालय ने काफी गंभीरता से लिया। उन्होंने कोतवाल का जबाव तलब करने के साथ ही मामले की रिपोर्ट धारा 156 (3) के तहत दर्ज करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने अपने आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के ललिता कुमारी बनाम गवर्नमेंट ऑफ यूपी एआईआर 2014 सुपरिम कोर्ट अपील संख्या 187 का हवाला दिया है, जिसमें साफ कहा गया है कि किसी भी गंभीर मामले का कोई पीड़ित आता है तो पहले उसकी रिपोर्ट दर्ज की जाए। इसके बाद उसकी सच्चाई की जांच कर विधिवत रूप से कार्रवाई की जाए। हाथरस गेट कोतवाल रजनेश तिवारी का कहना है कि अभी उन्हें इस संबंध में कोई आदेश नहीं मिला है। कोर्ट के आदेश का अक्षरश: पालन होगा।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक वादी की ओर से पिछले साल 26 जून को पुलिस अधीक्षक को शिकायत दी गई थी, जिसमें कोतवाली हाथरस जंक्शन क्षेत्र के एक गांव में नाबालिग लड़की को एक युवक द्वारा लगातार छह माह तक दुष्कर्म का शिकार बनाए जाने का आरोप लगाया गया था।
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शिकायत के बाद पुलिस ने जब किशोरी का बयान दर्ज किया तो किशोरी ने युवक द्वारा उसकी बदनामी करने एवं जान से मारने की धमकी देने की भी जानकारी दी। पीड़िता के पिता ने एसपी को यह भी बताया कि उसने दो बार पुलिस को हिम्मत कर इस संबंध में तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज करते हुए कार्रवाई करने की मांग भी की, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की।
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पीड़िता ने पुलिस को यह भी बताया कि अंतिम बार उसके साथ 26 अगस्त 2015 को सुबह आरोपी रंजीत ने उसकी पुत्री के साथ रक्षाबंधन से तीन दिन पहले दुष्कर्म किया। पीड़ित पक्ष ने इस मामले में उच्च न्यायालय में भी गुहार लगाई थी। वहां से जिला एवं सत्र न्यायालय को एक साल के भीतर मुकदमे का निस्तारण का आदेश दिया गया।
एफआईआर नहीं करने पर एसओ से जवाब तलब
प्रभारी जनपद न्यायाधीश एसएन त्रिपाठी के न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना करने के आरोप में कोतवाली हाथरस गेट के प्रभारी निरीक्षक रजनेश तिवारी का जवाब तलब किया है। उन्होंने कोतवाल को पांच दिन में जबाव दाखिल करने के निर्देश जारी किए हैं और कहा है कि क्यों नहीं उनके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवमानता के आरोप में कार्रवाई की जाए। दरअसल, राजकुमार निवासी गली पैठ चामड़ गेट हाथरस ने न्यायालय में एक आवेदन देकर कोतवाली हाथरस गेट पुलिस द्वारा उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं करने के आरोप लगाए थे, जिसे न्यायालय ने काफी गंभीरता से लिया। उन्होंने कोतवाल का जबाव तलब करने के साथ ही मामले की रिपोर्ट धारा 156 (3) के तहत दर्ज करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने अपने आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के ललिता कुमारी बनाम गवर्नमेंट ऑफ यूपी एआईआर 2014 सुपरिम कोर्ट अपील संख्या 187 का हवाला दिया है, जिसमें साफ कहा गया है कि किसी भी गंभीर मामले का कोई पीड़ित आता है तो पहले उसकी रिपोर्ट दर्ज की जाए। इसके बाद उसकी सच्चाई की जांच कर विधिवत रूप से कार्रवाई की जाए। हाथरस गेट कोतवाल रजनेश तिवारी का कहना है कि अभी उन्हें इस संबंध में कोई आदेश नहीं मिला है। कोर्ट के आदेश का अक्षरश: पालन होगा।