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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hathras News ›   License will be given to license holders before the election

चुनाव से पहले लाइसेंस धारकों को देना होगा कारतूसों का हिसाब

Fri, 03 Nov 2017 12:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस। 
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस।  Updated Fri, 03 Nov 2017 12:21 AM IST
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License will be given to license holders before the election
d - फोटो : Reuters
निकाय चुनाव से पहले शस्त्र लाइसेंस जमा कराने के दौरान अगर आप खर्च किए गए कारतूसों का हिसाब नहीं दे पाए तो मुश्किल में पड़ सकते हैं। पुलिस को इस बार एक-एक कारतूस का हिसाब रखने के निर्देश मिले हैं। हिसाब न दे पाने वाले लाइसेंस धारक का शस्त्र लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। 
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निकाय चुनाव की तैयारियों में जुटी पुलिस ने शस्त्र लाइसेंस जमा कराने के लिए थाना और चौकी इंचार्जों को निर्देशित कर दिया गया है। शहर में दस किलोमीटर सीमा क्षेत्र में मौजूद लाइसेंस धारकों के शस्त्र जमा कराए जाने हैं। इनके साथ कारतूस भी जमा कराए जाएंगे। खास बात यह है कि इस बार भी शस्त्र लाइसेंसों का सत्यापन किया जाएगा। लाइसेंस में दिया गया आधार कार्ड नंबर सही है या नहीं, इसका पता किया जाएगा। इसे भी पता किया जाएगा कि शस्त्र लाइसेंसधारक के पास न होकर किसी दूसरे के पास तो नहीं है? अहम बात यह कि इस बार कारतूसों का हिसाब भी पुलिस रखेगी। निकाय चुनाव से पहले त्योहार और समारोहों में हर्ष फायरिंग में क ई लोगों ने अपने कारतूस जाया कर दिए थे। त्योहार पर खुशी में फायरिंग वाली तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी वायरल हुई थीं।
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 पुलिस ने अब ऐसे लोगों पर शिकंजा कसते हुए कहा है कि अगर रिकॉर्ड में दर्ज कारतूस लाइसेंसधारक पर नहीं मिले तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। हालांकि पुराने कारतूसों के खोखे जमा करने पर ही आर्म्स स्टोर से नए कारतूस मिलने का नियम काफी पुराना है। फिर भी लोग हर्ष फायरिंग में कारतूस जाया कर रहे हैं और स्टोरों से नए कारतूस ले भी रहे हैं। एएसपी अरविंद कुमार का कहना है कि लाइसेंसी शस्त्र सख्ती के साथ जमा कराए जा रहे हैं। जिन लोगों ने हर्ष फायरिंग में कारतूस खर्र्च कर दिए हैं, उनके लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे। 
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सोशल मीडिया पर भी रहेगी पैनी नजर ः निर्वाचन आयोग ने पुलिस और प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि मीडिया सेल को सक्रिय कर सोशल मीडिया पर पैनी नजर रखी जाए। निकाय चुनाव की आचार संहिता लागू होने के बाद लोग एक-दूसरे को चुनाव से संबंधित एमएमएस, मैसेज, वीडियो, फोटो आदि भेज रहे हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर विशेष निगरानी की आवश्यकता है। एएसपी अरविंद कुमार का कहना है कि अक्सर सोशल मीडिया के जरिए सनसनीखेज सूचनाएं वायरल हो जाती हैं। कोई भी गलत, भ्रामक और सनसनी फैलाने वाले मैसेज, फोटो, वीडियो आदि के मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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