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मरीजों काे रेफर करने पर भड़के राज्यमंत्री
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jun 2016 11:47 PM IST
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-जिला अस्पताल में मरीजों के तीमारदारों से बातचीत करते चिकित्सा स्वास्थ्य व परिवार कल्याण राज्यमंत्री शंखलाल मांझी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो हाथरस
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हाथरस। स्वास्थ्य राज्य मंत्री शंखलाल मांझी ने शुक्रवार सुबह जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान मामूली फ्रेक्चर पर मरीजों को रेफर किए जाने के पत्रकारों के सवाल पर पहले तो मांझी बुरी तरह भड़क गए, बाद में उन्होंने सीएमओ ओर सीएमएस की क्लास लगाते हुए रेफर के मामलों में कमी लाने को कहा। मालूम हो कि जिला अस्पताल की इमरजेंसी से हर साल बड़ी संख्या में मरीजों को आगरा और अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है। कई बार मामूली फ्रेक्चर और चोट होने पर भी डॉक्टर मरीजों को रेफर कर देते हैं।
मांझी ने जिला अस्पताल में ओपीडी, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, वार्ड, पैथोलॉजी, कुपोषित बच्चों के लिए बने वार्ड और महिला अस्पताल का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मरीजों से कर्मचारियों द्वारा सुविधा शुल्क लिए जाने के बारे में पूछा। बाहर से दवाएं मंगाए जाने की भी जानकारी की। मरीजों के जवाब से मांझी संतुष्ट नजर आए। महिला अस्पताल में वह नवजात बच्चों से खेलते भी नजर आए। प्रसूताओं का भी उन्हाेंने हालचाल लिया और डॉक्टरों के व्यवहार के बारे में भी पूछताछ की। जब उनसे मरीजों के रेफरल के बारे में पत्रकारों ने पूछा तो वह गुस्से में आ गए और केस स्टडी सामने लाने की बात कहने लगे। एक पत्रकार ने जब उनसे कहा कि अस्पताल में स्वीपर टांके लगाने और इंजेक्शन लगाने का काम करते हैं, अल्ट्रासाउंड और एक्सरे के नाम पर अवैध वसूली होती है तो उन्होंने कहा कि अगर ऐसा कोई पीड़ित सामने आएगा तो वह कार्रवाई करेंगे। राज्यमंत्री से विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियम के विरुद्ध देहात में तैनाती पर भी सवाल किया गया, जिसे उन्होंने यह कहकर टाल दिया कि मामला गंभीर है, वह इसे दिखवाएंगे। उन्होंने इतना जरूर कहा कि डॉक्टरों की कमी है। पांच से छह साल में एक डॉक्टर तैयार होता है। यह सरकार सेहत के क्षेत्र में जो कार्य कर रही है, उसका फायदा आने वाले दिनों में भविष्य की सरकारों को मिलेगा।
नौ महीने में नहीं मिली जेएसवाई की राशि
शंखलाल मांझी के निरीक्षण के दौरान ही एक युवक ने शिकायत करते हुए उन्हें बताया कि नौ महीने पहले उसकी पत्नी ने बच्चे को जन्म दिया था। जेएसवाई की राशि अभी तक उसके खाते में नहीं आई। इस पर मंत्री ने महिला अस्पताल की सीएमएस से पूछा। सीएमएस ने बताया कि चार महीने पहले ही युवक ने खाते का ब्योरा दिया है। जल्द ही यह राशि उसके खाते में पहुंच जाएगी।
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मांझी ने जिला अस्पताल में ओपीडी, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, वार्ड, पैथोलॉजी, कुपोषित बच्चों के लिए बने वार्ड और महिला अस्पताल का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मरीजों से कर्मचारियों द्वारा सुविधा शुल्क लिए जाने के बारे में पूछा। बाहर से दवाएं मंगाए जाने की भी जानकारी की। मरीजों के जवाब से मांझी संतुष्ट नजर आए। महिला अस्पताल में वह नवजात बच्चों से खेलते भी नजर आए। प्रसूताओं का भी उन्हाेंने हालचाल लिया और डॉक्टरों के व्यवहार के बारे में भी पूछताछ की। जब उनसे मरीजों के रेफरल के बारे में पत्रकारों ने पूछा तो वह गुस्से में आ गए और केस स्टडी सामने लाने की बात कहने लगे। एक पत्रकार ने जब उनसे कहा कि अस्पताल में स्वीपर टांके लगाने और इंजेक्शन लगाने का काम करते हैं, अल्ट्रासाउंड और एक्सरे के नाम पर अवैध वसूली होती है तो उन्होंने कहा कि अगर ऐसा कोई पीड़ित सामने आएगा तो वह कार्रवाई करेंगे। राज्यमंत्री से विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियम के विरुद्ध देहात में तैनाती पर भी सवाल किया गया, जिसे उन्होंने यह कहकर टाल दिया कि मामला गंभीर है, वह इसे दिखवाएंगे। उन्होंने इतना जरूर कहा कि डॉक्टरों की कमी है। पांच से छह साल में एक डॉक्टर तैयार होता है। यह सरकार सेहत के क्षेत्र में जो कार्य कर रही है, उसका फायदा आने वाले दिनों में भविष्य की सरकारों को मिलेगा।
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नौ महीने में नहीं मिली जेएसवाई की राशि
शंखलाल मांझी के निरीक्षण के दौरान ही एक युवक ने शिकायत करते हुए उन्हें बताया कि नौ महीने पहले उसकी पत्नी ने बच्चे को जन्म दिया था। जेएसवाई की राशि अभी तक उसके खाते में नहीं आई। इस पर मंत्री ने महिला अस्पताल की सीएमएस से पूछा। सीएमएस ने बताया कि चार महीने पहले ही युवक ने खाते का ब्योरा दिया है। जल्द ही यह राशि उसके खाते में पहुंच जाएगी।
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